कौड़ियों में बिका बायोमेट्रिक, फ्री रिचार्ज का लालच देकर एक्टिवेट की फर्जी सिम, ऐसे पकड़ाए जालसाज
ग्वालियर में फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क का पर्दाफाश, फ्री डेटा का लालच बना रहा साइबर फ्रॉड्स का सहयोगी, ठग चुपचाप चुरा लेते थे पहचान. पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 30, 2026 at 3:08 PM IST
ग्वालियर: देश में बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए साइबर पुलिस भले ही एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हो, लेकिन ये अपराधी अपने नेटवर्क के बलबूते हर दिन ना जाने कितने ही लोगों के बैंक अकाउंट खाली कर रहे हैं. अब इनका नाता मध्य प्रदेश से भी जुड़ने लगा है, क्योंकि साइबर ठगों को ठगी के लिए सिम कार्ड उपलब्ध कराने वालों का नेटवर्क ग्वालियर तक फैला हुआ है.
सेंट्रल एजेंसी ने तैयार किया ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर्स का डेटा
साइबर ठगी में उपयोग होने वाले मोबाइल फ़ोन नंबरों से पुलिस ठगों तक पहुंचने के लिए कदम बढ़ा रही है. इसके लिए पुलिस विभाग की संस्था इंडियन साइबर कोऑर्डिनेशन कमेटी सेंटर जो सभी राज्यों की साइबर पुलिस के बीच कॉर्डिनेशन का काम करती है, इसके द्वारा एक डेटा तैयार किया गया है. जिसमें उन मोबाइल नंबर्स की जानकारी है जिनका उपयोग साइबर ठगी की वारदातों में बार बार किया गया है. ये डेटा सभी राज्यों को शेयर किया गया, जिनमें मध्य प्रदेश भी था. जब इन नंबर्स की इन्वेस्टिगेशन की गई तो खुलासा हुआ ऐसे नेटवर्क का जो साइबर ठगों को कौड़ियों के दाम मोबाइल नंबर बेच रहे हैं. जिनके नाम ये मोबाइल नम्बर जारी हुए उन्हें इस बात की खबर तक नहीं है.

चुपचाप चुरा लेते हैं पहचान
ग्वालियर में अब तक ऐसे 150 से ज़्यादा मामले पुलिस के सामने आए हैं, जिनकी जांच ने पुलिस को इन फर्जी सिम के नेटवर्क तक पहुचाया है. कुछ दिन पहले ही पुलिस को मोहना थाना क्षेत्र में दो ऐसे एजेंट्स पकड़ में आए थे जिन्होंने फ्री में सिम पोर्ट करने का लालच देकर महिलाओं के नाम से उनकी जानकारी के बिना सिम एक्टिवेट कर ठगों को चंद रुपयों में बेच दिए थे, और उन मोबाइल नंबर्स का करीब 8 करोड़ रुपयों की साइबर ठगियों में इस्तेमाल हुआ था.
अब तक 6 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने जांच तेज की तो पुलिस को ऐसे और भी एजेंट्स का पता चला जो भोले भाले ग्रामीणों को झांसा देकर उनसे उनके दस्तावेज और बायोमेट्रिक लेकर ठगों के लिए सिम कार्ड्स इकट्ठा करते थे. ग्वालियर पुलिस शहर में एक पीओएस एजेंट के साथ मोहना, हस्तिनापुर और बिजौली, हजीरा क्षेत्र से अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी कर चुकी है.
ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत मोबाइल नंबर्स का वेरिफिकेशन
ग्वालियर साइबर सेल प्रभारी सीएसपी मनीष यादव ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि, "भोपाल पुलिस मुख्यालय से मोबाइल नंबर्स के डेटा की लिस्ट भेजी गई थी जिसमें ग्वालियर का भी नाम था. जब इस लिस्ट में दर्ज मोबाइल नंबर्स की जांच की गई तो ऐसे करीब 150 केस मिले. इन केस को हमने संबंधित पुलिस थाने के प्रभारियों को ऑपरेशन FAST 2.0 (फोर्ज एक्टिवेशन सिम टर्मिनेशन) के तहत टास्क देकर उन सिम कार्ड के मालिकों से मिलकर वेरिफिकेशन कराया गया. और जांच करायी गई कि, ठगी में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबर जिनके नाम पर हैं वे उनका उपयोग कर रहे हैं या नहीं.''
जिनके दस्तावेज पर सिम उन्हें जानकारी नहीं
जब ऐसा हुआ तो पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य आए. ग्रामीण क्षेत्रों में ये नंबर जिन लोगों और युवाओं के नाम पर जारी हुए थे उनसे पता चला की एक महीने के फ्री डेटा टॉपअप के लालच में उन्होंने अपने दस्तावेज और बायोमेट्रिक के जरिए गांव में आने वाले नेटवर्क या पीओएस एजेंट्स से सिम पोर्ट करायी थी. उन्हें नया सिम कार्ड भी मिला था लेकिन इसके बाद उन्हें आगे की जानकारी नहीं है.
कैसे काम करता है जालसाज सिम का नेटवर्क ?
सीएसपी मनीष यादव के मुताबिक, ''जालसाजी से सिमकार्ड एक्टिवेट करने वाले आरोपी एजेंट गांव गांव घूमते और लोगों को फ्री का डेटा और एक महीने का रिचार्ज का लालच देते, इनके लालच में महिलाएं और युवा फंस जाते और फिर पीओएस एजेंट्स उनके दस्तावेज लेकर सिम पोर्ट के नाम पर अंगूठे के निशान लेते लेकिन एक निशान वे ग्राहक के लिए लेते और इसी बीच बहाने से दो से तीन बायोमेट्रिक एक्स्ट्रा लेकर सेव कर लेते. बाद में इनके जरिए नया सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर ठगों को दो सौ से पांच सौ रुपये में बेच देते.

एक सिम ग्राहक, तीन साइबर ठगों के लिए एक्टिवेट करते थे आरोपी
ग्वालियर में पुलिस ने सबसे पहले मोहना क्षेत्र से ऐसे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, आरोपियों ने गांव के लोगों के बायोमेट्रिक लेकर हर व्यक्ति से एक सिम उन्हें और तीन से चार सिमकार्ड ठगों के लिए एक्टिवेट किए और बाद उन्हें बेच दिया. पुलिस ने जब पता किया तो पुलिस के सामने एजेंट लखन धाकड़ और सोनू धाकड़ के नाम सामने आए जिन्हें गिरफ्तार करने पर ये फर्जी सिमकार्ड तैयार करने वाले नेटवर्क का कनेक्शन सामने आया है.
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ग्रामीण को सिम पोर्ट के नाम पर दिया जाता है झांसा
जांच आगे बढ़ी तो तीन और ऐसे एजेंट्स के नाम पुलिस के सामने आए जो उसी पैटर्न में ग्रामीणों को झांसा देकर फ्री डेटा के नाम पर जालसाजी से सिमकार्ड तैयार कर रहे थे. इस बार खुलासा तीन थाना क्षेत्रों में हुआ. बिजौली, सिरौल और महाराजपुरा और हस्तिनापुर थाना क्षेत्र में जालसाजी के सिमकार्ड तैयार करने वाले नेटवर्क के तीन और सदस्य पुलिस के हत्थे लगे. जब पुलिस ने पीएचक्यू द्वारा जारी लिस्ट में शामिल मोबाइल नंबरों के मूल मालिकों से संपर्क किया तो पता चला कि, ना उन्होंने ये नंबर कभी लिए और ना ही इस्तेमाल किए. उन्होंने गांव में आए एजेंट्स सिम कार्ड पोर्ट जरूर कराये थे. इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और उन एजेंट्स का पता लगाया.
चार और पीओएस एजेंट पुलिस के हाथ लगे
पुलिस ने दूसरी बार में तीन पीओएस एजेंट्स अमन राजावत, प्रदीप राजावत और और संदीप राजावत के खिलाफ FIR दर्ज की. जिन्होंने 15 लोगों के आधार और बायोमैट्रिक लेकर कई सिमकार्ड एक्टिवेट कर ठगों को खपाए थे. इसके बाद पुलिस ने ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र से भी एक एजेंट मंजेश जाटव के खिलाफ भी गिरफ्तारी के साथ मामला दर्ज किया है. इस तरह अब तक पुलिस के सामने 150 से ज़्यादा ऐसे मामलों की पुष्टि हो चुकी हैं. जिनमें दस्तावेज देने वाले की मर्जी के बिना ही सिमकार्ड एक्टिवेट कर ठगों तक पहुंचाए गए हैं.
सिम सप्लाई करने वालों का रिकॉर्ड तैयार कर रही पुलिस
सीएसपी मनीष यादव का कहना है कि, ''ग्वालियर के लगभग दस थानों में जालसाजी से सिम एक्टिवेट करने और ठगों को बेचने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए अलग अलग टीम लगातार काम कर रही है. अब तक ऐसे लोगों के खिलाफ एक दर्जन FIR भी हो चुकी है. और ऐसे लोगों चिन्हित कर एक डेटा ग्वालियर पुलिस भी तैयार कर रही है. जिससे साइबर ठगों की मदद करने वाले ऐसे अपराधियों पर भी नकेल कसी जा सके.''

