ग्वालियर के अंबेडकर विवाद में एडवोकेट को हाईकोर्ट से झटका, स्पेशल डबल बेंच लेगी फैसला
ग्वालियर के अंबेडकर विवाद में फंसे हाईकोर्ट के सीनियर वकील की शनिवार को भी नहीं हो पाई जमानत. सुनवाई के लिए स्पेशल डबल बेंच गठित.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 3, 2026 at 6:32 PM IST
ग्वालियर: अंबेडकर विवाद में गिरफ्तार हाईकोर्ट के सीनियर वकील अनिल मिश्रा को शनिवार को फिर झटका लगा है. उन्हें एक और दिन अब जेल में ही गुजारना होगा क्योंकि शनिवार को हाईकोर्ट में हुई स्पेशल बेंच की सुनवाई में जमानत याचिका पर निर्णय नहीं हो सका है.
अंबेडकर विवाद में फंसे हाईकोर्ट के सीनियर वकील
देश के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्ग विशेष द्वारा मनुस्मृति ग्रंथ जलाए जाने के विरोध में भड़के लोग बदले की भावना से प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल में ग्वालियर में भी वर्ग विशेष द्वारा मनुस्मृति ग्रंथ जलाए जाने के विरोध में रक्षक मोर्चा के सदस्यों पर बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर जलाने का आरोप लगा है. जिसका वीडियो सर्कुलेट हुआ तो कार्रवाई की मांग में दलित संगठनों ने एसपी और कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया. पुलिस ने ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत 7 लोगों पर मामला दर्ज किया था. वकील समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर शनिवार को कोर्ट में पेश कर दिया.
हाईकोर्ट में लगाई जमानत याचिका
इस घटना क्रम के चलते ग्वालियर में तनाव की स्थिति बनी. जिला कोर्ट में भी आरोपियों की जमानत पर सुनवाई हुई लेकिन न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और आरोपियों को जेल भेज दिया. इसके तुरंत बाद हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में बार एसोसिएशन द्वारा जमानत के लिए याचिका दायर की गई.
शनिवार को भी नहीं हुआ निर्णय
शनिवार को ग्वालियर हाईकोर्ट में स्पेशल बेंच ने अनिल मिश्रा और उनके साथी आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई की. सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा की ओर से पैरवी कर रहे ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट पवन पाठक ने बताया कि, शनिवार को भी जमानत याचिका पर निर्णय नहीं हो सका है.
सरकारी वकील ने मांगी 3 दिन बाद की तारीख
सीनियर वकील पवन पाठक का कहना है कि "मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस मामले को टालमटोल करने का प्रयास किया जा रहा है जिससे एडवोकेट अनिल मिश्रा को न्याय ना मिल सके. सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने केस डायरी पेश करने के नाम पर उच्च न्यायालय से समय लिया है.
उनकी तरफ से सोमवार या मंगलवार को सुनवाई के लिए समय मांगा जा रहा था, जिससे तब तक अनिल मिश्रा जेल में ही रहें. उनका तर्क था कि वे केस डायरी के साथ अनिल मिश्रा के पूर्व में किए गए कार्यों का उल्लेख करना चाहते हैं. लेकिन कोर्ट ने उन्हें रविवार तक का ही समय देते हुए आदेशित किया है कि शासन की ओर से रविवार को ही जवाब पेश किया जाए."
अब स्पेशल डबल बेंच में होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए स्पेशल डबल बेंच गठित कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच सुनवाई करेगी. ऐसे में याचिकाकर्ता के सीनियर वकील पवन पाठक का कहना है कि मध्य प्रदेश शासन इस मामले में जस्टिस अहलूवालिया की बेंच में सुनवाई से बचना चाहते हैं.
'हाईकोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन'
अपनी पैरवी में पवन पाठक ने यह बात रखी है कि "41(1) के नोटिस में सामान्य प्रक्रिया है कि, 7 साल तक की सजा वाले केस में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ चाहे वह एससी-एसटी एक्ट का ही क्यों ना हो, उसे नोटिस देकर छोड़ा जाना चाहिए लेकिन इस मामले में इसका पालन नहीं किया गया.
साथ ही किसी भी गिरफ्तारी में पुलिस द्वारा लिखित में उस व्यक्ति को तुरंत नोटिस देना होता है, जिसमें बताया जाता है कि उसकी गिरफ्तारी किस अपराध में की गई है. और यदि केस 7 साल के नीचे का है तो नोटिस देना मेंडेटरी है. अनिल मिश्रा के केस में हाईकोर्ट के इस नियम का उल्लंघन किया गया है."
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'गिरफ्तारी के 16 घंटे बाद दी गई परिवार को सूचना'
अनिल मिश्रा की ओर से सीनियर वकील पवन पाठक का कहना है कि "पुलिस ने अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी गुरुवार शाम 7 बजे कर ली थी लेकिन उनके परिवार को लिखित में सूचना शुक्रवार सुबह 11 बजे दी. वहीं शाम 7 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और एफआईआर रात 8 बजे लिखी गई, जिसका अर्थ है कि जब गिरफ्तारी हुई तब अनिल मिश्रा के खिलाफ किसी भी थाने में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं थी. जिसका सीधा मतलब है कि पुलिस की प्रक्रिया अवैध है. अब इस मामले में रविवार को स्पेशल डबल बेंच में जमानत याचिका पर सुनवाई होगी जिसमें ये सभी बिंदु रखे जाएंगे."

