खून में है पहलवानी, 16 साल के अंशुमन के दांत हैं फौलाद, एक साथ खींचते हैं 2 कार
ग्वालियर के बाहुबली सुनील यादव के बाद उनके बेटे अंशुमन 15 अगस्त के दिन स्कूल में दिखाएंगे अपना पहलवानी वाला हुनर. पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 13, 2026 at 10:50 PM IST
|Updated : August 22, 2026 at 5:03 PM IST
ग्वालियर: आजकल के युवाओं में कुछ हटके करने का जज्बा उन्हें नाम बनाने का मौका दिलाता है, कुछ ऐसा ही शौक है ग्वालियर के 16 साल के अंशुमन यादव का, जो इतनी छोटी उम्र में अपनी ताकत का प्रदर्शन अनोखे हुनर से कर रहे हैं. अंशुमन यादव अपने दातों से एक नहीं बल्कि दो-दो कार खींच लेते हैं. यहां तक की एक कार खींचना तो उनके लिए एक उंगली का काम है.
दांतों से 2, एक उंगली से एक कार खींच लेते हैं अंशुमन
हायर सेकेंडरी के छात्र अंशुमन का ये हुनर उनके खून में घुला हुआ है, क्योंकि वे बाहुबलियों के परिवार से आते हैं. उनके पिता सुनील यादव भी ऐसा ही हुनर रखते हैं. सुनील ने तो अपने दांतों से एक दो नहीं बल्कि 10 कार खींचने का रिकॉर्ड बनाया है और उनके पिता यानि अंशुमन के दादा नेशनल लेवल के पहलवान थे. अंशुमन आने वाली 15 अगस्त के दिन अपने स्कूल में अपने हुनर का प्रदर्शन 2 कारें अपने दातों से और एक कार एक उंगली से खींच कर करने वाले हैं.
पिता से प्रभावित हो कर शुरू किया था स्टंट
ईटीवी भारत से बातचीत में अंशुमन यादव ने बताया, "उन्हें इस तरह कार दांतों से खींचने का मोटिवेशन अपने पिता सुनील यादव से मिला, जो 2016 में कई कमाल के स्टंट्स करते थे. ट्रक खींचने के साथ कई कारों को एक साथ खींचना उनके बाएं हाथ का काम है. उनसे ही इन्स्पायर होकर मैंने भी प्रयास किया और कुछ महीनों की प्रैक्टिस में वह कर दिखाया जिसकी वे उम्मीद लगा रहे थे."
हर दिन करते हैं 2 घंटे पिता के साथ ट्रेनिंग
इतनी कम उम्र में इतनी ताकत दिखाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जिसके लिए अंशुमन ने बताया, "वे हर दिन पिता के साथ शाम के समय जिम जाते हैं. जहां दो घंटे के दौरान अपने दांतों से वेट प्लेट्स उठाना, अपनी उंगलियों से वजन उठाने की प्रैक्टिस करते हैं. वे अब करीब 40 से 50 सेकेंड्स तक ऐसा करने में सक्षम हैं और लगातार अपनी क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं."

पिछले साल पॉवर लिफ्टिंग में जीता नेशनल गोल्ड
अंशुमन ने बताया, "पिछले साल 2025 में उन्होंने पॉवर लिफ्टिंग की एक नेशनल प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया था, और वहां उन्होंने अपने प्रदर्शन के बलबूते गोल्ड मेडल हासिल किया. वे भविष्य में और कारें साथ में खींचने की और बढ़ेंगे. वे चाहते हैं की आने वाले गणतंत्र दिवस तक कम से कम 7 से 8 कारें अपने दातों से एक साथ खींच सकें."
दादा पहलवान, पिता बाहुबली
अंशुमन के पिता सुनील यादव पुलिसकर्मी हैं और ग्वालियर में ही पदस्थ हैं. सुनील को लोग और पुलिस विभाग में बाहुबली के नाम से जाना जाता है. ये तमगा ये नाम उन्होंने अपनी ताकत के सार्वजनिक प्रदर्शन से कमाया है. सुनील यादव ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया, "उनके पिता देश के नामी पहलवान थे, पहलवानी में नेशनल प्लेयर थे वे खुद भी पहलवान बनना चाहते थे लेकिन कुश्ती में ज्यादा समय नहीं दे सके तो जूडो में हाथ आजमाया और नेशनल प्लेयर बने. इसके बाद स्टंट्स शुरू किए तो इससे काफी नाम मिला."

'यूट्यूबर को देख हुए थे मोटीवेट फिर खुद एक साथ खीचीं 16 कारें'
सुनील यादव बताते हैं, "उन्होंने 2016 में यूट्यूब पर स्टीलमैन नाम के व्यक्ति के कार खींचने के स्टंट्स देखे थे. इससे वे काफी प्रभावित हुए और सोचा कि जब वह कर सकता है तो मैं क्यों नहीं. इसी जिद ने उन्हें बाहुबली बना दिया. शुरुआत एक कार से हुई थी लेकिन जल्द ही उन्होंने एक साथ 16 कारें एक साथ खींच कर खुद को साबित किया कि वे अब 10 गाड़ियां तो अपने दांतों से ही खींच देते हैं." वे यहीं नहीं रुके उन्होंने अपने हाथ की एक उंगली से तो एक ट्रक खींच कर सभी को चौंका दिया था. उनके इसी बाहुबल से उन्हें बाहुबली की पहचान मिली.

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'900 किग्रा वजनी कार दांतों से खींचता है 9 साल का भतीजा'
सुनील यादव कहते हैं, "आज उनका बेटा अंशुमान 2 कारे दांतों से और एक कार एक उंगली से खींच लेता है. वे अपने 9 साल के भतीजे रुद्र को भी 3 महीने से ट्रेनिंग दे रहे हैं, जो इतनी सी उम्र में 900 किलो से ज्यादा वजन वाली एक कार अपने दांतों से खींच लेता है, और 2 कारें कंधे से. उनका कहना है वह जल्द ही अपनी उंगली से भी कार खींचने में सफल होगा." वे चाहते हैं कि, दोनों बच्चे पढ़ाई के साथ साथ स्पोर्ट्स में आगे बढ़ें और देश के बाहर जाकर भारत के लिए मेडल लाएं.

