गुरु खुशवंत साहेब की पदयात्रा बनीं जनअभियान, समाज कल्याण के लिए निकाली गई है यात्रा
गुरु खुशवंत साहेब की सतनाम सद्भाव पदयात्रा चौथे दिवस भी जारी है. चौथे दिन यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 21, 2026 at 3:48 PM IST
बलौदाबाजार : सत्य, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश लेकर निकली विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा अब एक जन-अभियान का रूप ले चुकी है.प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और आरंग विधायक, साथ ही सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में यह पदयात्रा रायपुर से प्रारंभ होकर ग्रामीण अंचलों से गुजरते हुए पवित्र गिरौदपुरी धाम की ओर अग्रसर है. धर्मगुरु का साफ संदेश है. यह पदयात्रा किसी प्रचार या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण और आत्मिक जागरण के लिए है.युवा हमारे भविष्य हैं, हर कार्य में उन्हें आगे आना चाहिए.
यात्रा को मिल रहा अच्छा प्रतिसाद
पदयात्रा की मूल भावना गुरु घासीदास बाबा के उस अमर संदेश से जुड़ी है. मनखे-मनखे एक समान समानता, भाईचारा और भेदभाव-मुक्त समाज का यही विचार इस यात्रा की धड़कन बना हुआ है.चतुर्थ दिवस की शुरुआत पलारी स्थित सतनाम भवन से हुई, जहां श्रद्धालुओं और पदयात्रियों ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। “बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे-मनखे एक समान” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा. पलारी से प्रारंभ हुई यात्रा अमेरा, कंजी और डोटोपार जैसे गांवों से होते हुए आगे बढ़ी. रास्ते में समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया. ढोल-नगाड़ों और पंथी नृत्य की गूंज के बीच यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक एकता का उत्सव बन गई.

धर्म और दायित्व साथ-साथ
गौरतलब है कि गुरु खुशवंत साहेब जहां एक ओर धर्मगुरु के रूप में समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे राज्य शासन में कैबिनेट मंत्री भी हैं.लेकिन इस पदयात्रा में उन्होंने अपने धार्मिक दायित्व को प्राथमिकता देते हुए समाज को एकजुट करने का प्रयास किया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के आदर्शों से प्रेरित यह यात्रा केवल पैदल चलने का कार्यक्रम नहीं है, यह हृदय से हृदय को जोड़ने का अभियान है.
आज पूरा हिंदुस्तान एक स्वर में समानता की बात कर रहा है. हमें उस विचार को जीवन में उतारना होगा. समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की है. युवा हमारे भविष्य हैं, यदि वे आगे आएंगे तो समाज में नई ऊर्जा का संचार होगा- गुरु खुशवंत साहेब, कैबिनेट मंत्री
पलारी में ऐतिहासिक स्वागत
पलारी पहुंचने पर पदयात्रा का जो दृश्य सामने आया, वह अभूतपूर्व था.सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया. महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ जयघोष किया.स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजजनों ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया. कई लोगों ने इसे सामाजिक समरसता की नई शुरुआत करार दिया
तीसरे दिन का उत्साह, चौथे दिन की रफ्तार
तृतीय दिवस की यात्रा राजागुरु, धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब के सानिध्य में आगे बढ़ी थी. चौथे दिन यात्रा ने नई ऊर्जा के साथ रफ्तार पकड़ी. गांव-गांव में लोग गुरु दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं. कई स्थानों पर लोगों ने पदयात्रियों के लिए जलपान और विश्राम की व्यवस्था की. महिलाओं ने आरती उतारकर स्वागत किया. यात्रा का चौथे दिन का समापन नगर पंचायत लवन में निर्धारित है, जहां सामूहिक भोज और रात्रि विश्राम का आयोजन रखा गया है. आयोजकों का कहना है कि यहां बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की संभावना है.
गिरौदपुरी धाम में समाप्त होगी यात्रा
पंचम दिवस की यात्रा लवन से प्रस्थान कर 22 फरवरी को पावन गिरौदपुरी धाम पहुंचेगी. गिरौदपुरी धाम, गुरु घासीदास बाबा की तपोभूमि के रूप में श्रद्धा का केंद्र है. यात्रा का समापन गुरु के चरणों में मत्था टेकने और आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ होगा. यह समापन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उस संदेश की पुनर्पुष्टि होगी जिसे यात्रा के दौरान जन-जन तक पहुंचाया गया है.
समाज में एकजुटता की नई लहर
इस पदयात्रा ने सामाजिक स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है. कई गांवों में लंबे समय बाद कई वर्गों के लोग एक साथ दिखाई दिए. धर्मगुरु ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट कहा कि समाज की ताकत उसकी एकता में है. भेदभाव और विभाजन से विकास संभव नहीं है. समान अधिकार और सम्मान ही स्थायी प्रगति का आधार है. हमने सद्भाव, समानता और संगठन की जो ज्योति जलाई है, वह अब छत्तीसगढ़ के हर गांव और हर घर की चौखट तक पहुंचनी चाहिए.
राजनीति से परे सामाजिक पहल
आपको बता दें कि गुरु खुशवंत साहेब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा किसी राजनीतिक मंच का हिस्सा नहीं है.यह सामाजिक और आध्यात्मिक जागरण का अभियान है.उनका कहना है कि समाज का उत्थान राजनीति से बड़ा लक्ष्य है. यदि समाज मजबूत होगा तो शासन भी मजबूत होगा.
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