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गुप्तकाशी विश्वनाथ पुजारी नियुक्ति पर छिड़ा घमासान, अब ईश्वर लिंग ने लगाए गंभीर आरोप, जानिए क्या कहा

गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर पुजारी नियुक्ति विवाद को लेकर अब ईश्वरलिंग ने अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

GUPTKASHI VISHWANATH TEMPLE
विश्वनाथ मंदिर पुजारी नियुक्ति विवाद (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 30, 2026 at 2:23 PM IST

4 Min Read
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देहरादून: केदारनाथ अधिष्ठान के मंदिर गुप्तकाशी विश्वनाथ में हाल ही में नियुक्त पुजारी की नियुक्ति को लेकर केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के उल्लंघन का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को गलत बताया. उन्होंने बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) से इस नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है. वहीं, अब दूसरी तरफ से गुप्तकाशी विश्वनाथ में मुख्य पुजारी ने मंदिर समिति के सामने अपना पक्ष रखा है.

गुप्तकाशी विश्वनाथ में पुजारी नियुक्ति विवाद में दूसरा पक्ष: गुप्तकाशी विश्वनाथ में BKTC द्वारा नियुक्त किए गए पुजारी ईश्वर लिंग ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी को पत्र भेजते हुए अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा उनकी विधिवत नियुक्ति के बावजूद कुछ लोगों द्वारा उनकी नियुक्ति को निरस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने इसे न केवल उनके कार्मिक अधिकारों का हनन बताया है, बल्कि मंदिर परंपराओं और नियमों के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है.

ईश्वर लिंग द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, केदारनाथ अधिष्ठान में खाली चल रहे पुजारी पद पर उनकी नियुक्ति 25 मई 2026 को की गई थी. इसके बाद उन्होंने 26 मई को ऊखीमठ स्थित मंदिर समिति कार्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण किया. 27 मई से गुप्तकाशी मंदिर में पुजारी के रूप में नियमित सेवाएं देना शुरू कर दिया. कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनकी नियुक्ति को रद्द कराने के उद्देश्य से मंदिर समिति को कुछ शिकायतें और पत्र भेजे गए हैं.

केदारनाथ रावल के दीक्षित शिष्य होने का दावा: अपने पत्र में ईश्वर लिंग ने बताया है कि वह पूज्य रावल केदारनाथ श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महास्वामी के दीक्षित शिष्य हैं. 1 मई 2015 को ऊखीमठ मंदिर परिसर में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान रावल केदारनाथ ने उन्हें विधिवत रूप से अपना दीक्षित शिष्य बनाया था. उनका कहना है कि वह वर्षों से मंदिर परंपराओं और धार्मिक व्यवस्थाओं से जुड़े रहे हैं. विभिन्न मंदिरों में सेवाएं देते आए हैं.

ईश्वर लिंग ने पत्र में उल्लेख किया है कि, 12 अक्टूबर 2016 को मंदिर समिति ने उन्हें वीरेश्वर पुजारी के पद पर 9500 रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया था. इसके बाद उन्होंने गुप्तकाशी और ऊखीमठ स्थित मंदिरों में विभिन्न अवसरों पर पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं. कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने धार्मिक व्यवस्थाओं के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

नियुक्तियों में परंपराओं की अनदेखी का आरोप: ईश्वर लिंग का कहना है कि लंबे समय तक नियमित और स्थायी नियुक्ति नहीं मिलने पर उन्होंने लोक सेवा अभिकरण का दरवाजा खटखटाया. इस संबंध में उन्होंने क्लेम पिटीशन दायर की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए अभिकरण ने 12 नवंबर 2025 को मामले के निस्तारण के निर्देश दिए. इसके बाद मंदिर समिति की बैठक में 10 मार्च 2026 को सर्वसम्मति से उनकी नियुक्ति का प्रस्ताव पारित किया गया. इसी प्रक्रिया के तहत 25 मई 2026 को उन्हें पुजारी पद पर नियुक्त किया गया.

अपने शिकायत पत्र में ईश्वर लिंग ने मंदिर समिति की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों के दौरान पुजारियों, वीरेश्वर पुजारियों तथा अन्य सेवकों की नियुक्तियों में परंपराओं और निर्धारित नियमों का कई बार उल्लंघन किया गया. उनका दावा है कि कुछ मामलों में निकट संबंधियों और विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियुक्तियां की गईं, जिससे योग्य व्यक्तियों के अधिकार प्रभावित हुए.

आमरण अनशन की चेतावनी, PM से लेकर CM को भेजी प्रतिलिपि: ईश्वर लिंग ने अपने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तथ्यहीन शिकायतों के आधार पर उनकी नियुक्ति के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जाती है या उनके कार्मिक अधिकारों का हनन किया जाता है, तो वह अपने परिवार के साथ ऊखीमठ मंदिर परिसर में आमरण अनशन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की जिम्मेदारी मंदिर समिति प्रशासन की होगी.

बताया गया है कि, ईश्वर लिंग द्वारा भेजे गए इस शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज सहित मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संबंधित पदाधिकारियों को भी प्रेषित की गई है. फिलहाल इस पूरे मामले में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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