महज 15 माह की धनवी ने बनाए 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड, मोबाइल-टीवी से दूरी, किताबें पसंद हैं
गुना के रहने वाले शिवेश सोनी व निधि सोनी की सवा साल की बच्ची धनवी असाधारण प्रतिभा की धनी. हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला पर बनाया रिकॉर्ड.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 4:15 PM IST
गुना : जिस उम्र में बच्चे चल नहीं पाते, बोल नहीं पाते, उस उम्र में अगर किसी बच्चे को एक नहीं बल्कि 2-2 वर्ल्ड रिकॉर्ड मिल जाएं तो इसे अजूबा ही कहा जाएगा. गुना शहर के नाम सिर्फ 15 माह की बच्ची धनवी ने 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर लोगों को हैरान कर दिया. इसमें धनवी के पिता शिवेश सोनी व मां निधि सोनी की मेहनत व लगन भी शामिल है.
हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला पर पकड़
मात्र 15 माह की नन्ही बच्ची धनवी ने अंग्रेजी वर्णमाला के 26 अक्षरों को महज 48 सेकंड में पहचान कर पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया. वहीं दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड हिंदी वर्णमाला के अक्षरों को सिर्फ 1 मिनट 48 सेकंड में पहचाना. जाहिर है इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि केवल असाधारण प्रतिभा के साथ ही संस्कारयुक्त परवरिश, अनुशासित जीवनशैली और माता-पिता के समर्पित मार्गदर्शन के कारण ही मिल सकती है.
वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए पैरेंट्स ने कैसे किया अप्लाई
धनवी की मां निधि सोनी ने बताया "हमने बेटी के पहले जन्मदिन पर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (International Book of Records) की आधिकारिक वेबसाइट www.internationalbookofrecords.com पर अप्लाई किया. इसके बाद हिंदी वर्णमाला के शब्दों को 1 मिनट 48 सेकंड में पूरा करने के लिए पंकज विग फाउंडर ऑफ सीईओ इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी प्रमाण पत्र जुलाई 2025 में कोरियर द्वारा भेजा गया.

धनवी नाम रखने के पीछे पैरेंट्स की सोच
धनवी के पैरेंट्स बताते हैं "उनके घर का वातावरण संस्कार, अनुशासन और भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित है. बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शिक्षा नहीं, बल्कि मूल्य आधारित जीवनशैली आवश्यक है." बच्ची का नाम धनवी रखने के पीछे पैरेंट्स बताते हैं "ये नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है धन की देवी लक्ष्मी, जो शक्ति, लक्ष्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है. माता-पिता के अनुसार, यह नाम उन्होंने सोच-समझकर रखा ताकि बच्ची के व्यक्तित्व में साहस और धैर्य का भाव विकसित हो."

कैसी है धनवी की दिनचर्या
धनवी के पैरेंट्स शिवेश सोनी व निधि सोनी कहते हैं "अपने बच्चों को माता-पिता इशारों, सरल शब्दों और खेल-खेल में उसे सही-गलत की पहचान सिखाकर बढ़ा सकते हैं. घर में सुबह-शाम गायत्री मंत्र, श्लोक और आरती का वातावरण रहता है, जिसमें धनवी भी ध्यान से बैठती है. धनवी को नियमित रूप से बगीचे में ले जाया जाता है, पौधों को पानी देना, पक्षियों को दाना डालना और बुजुर्गों के पैर छूना जैसी परंपराएं उसके दैनिक जीवन का हिस्सा है."
पैरेंट्स ने बताया- धनवी की किताबों में रुचि
आज के डिजिटल युग में भी धनवी को मोबाइल और टीवी से काफी हद तक दूर रखा गया है. केवल सीमित समय के लिए शैक्षिक वीडियो दिखाए जाते हैं. माता-पिता का कहना है "इससे बच्चे की आंखों, मन और कल्पनाशक्ति सुरक्षित रहती है. पंचतंत्र, रामायण, महाभारत और अकबर-बीरबल की कहानियां धन्वी की दिनचर्या का हिस्सा हैं. ये कहानियां मनोरंजन के साथ-साथ उसे नैतिक मूल्यों से भी जोड़ती हैं."
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बच्चों को शुरू से ही संस्कारों में ढालें
पैरेंट्स का कहना है "हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं के साथ धनवी को भजन, श्लोक और हल्के योग अभ्यास भी कराए जा रहे हैं. वे चाहते हैं "धनवी एक जिम्मेदार नागरिक बने, स्वतंत्र सोच रखे और समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे. संस्कार जन्म से ही घर के वातावरण और व्यवहार से रोपे जाते हैं."

