दिनभर मेहनत के बाद केवल मिलता था खाना, 25 से अधिक बंधुआ मजदूर का महाराष्ट्र से रेस्क्यू
गुना के मजदूर महाराष्ट्र में बने बंधक, 600 रुपए प्रतिदिन मजदूरी की लालच देकर ठेकेदार ने फंसाया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 30, 2025 at 8:40 PM IST
गुना: ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों को महाराष्ट्र ले जाकर बिना मजदूरी काम कराने का मामला सामने आया है. आरोप है कि गुना के अमरोद, उमरी और परसोदा से शहरिया समाज के लोगों को ठेकेदार के माध्यम से महाराष्ट्र भेजा गया था. जिसमें उन्हें बताया गया था कि वहां गन्ने के खेत में काम करने के प्रतिदन 600 रुपए दिए जाएंगे, लेकिन सभी लोगों को मजदूरी के बदले केवल खाना ही मिलता था और दिनभर काम करना पड़ता था.
25 से अधिक मजदूर गए थे महाराष्ट्र
इस संबंध में श्रम विभाग के अधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि "विजयपुर, उमरी क्षेत्र के 25 से 26 मजदूर गन्ने की कटाई के लिए महाराष्ट्र के सोलापुर और वहां के आसपास के गांवों में किसी ठेकेदार के माध्यम से चले गए थे. वहां पैसों की लेनदेन को लेकर इनका विवाद हो गया, तो इनके किसी परिचित ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यालय में इसकी शिकायत की."
सभी मजदूरों का किया गया रेस्क्यू
आशीष तिवारी ने आगे बताया कि "इसकी सूचना गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल को मिली. फिर उनके माध्यम से इन्हें रेस्क्यू करने के निर्देश हमें दिए गए, तो हमने वहां के किसान श्रवण से बात की, जिसके यहां ये मजदूरी करते थे. जिसके बाद उसने सभी मजदूरों को ट्रेन के माध्यम से गुना भिजवा दिया. इसमें करीब 13-14 महिलाएं और बाकी पुरुष थे. इन परिवार के साथ कुछ बच्चे भी गए थे, सभी लोग वापस अपना गांव लौट गए हैं."

प्रशासन अन्य मजदूरों की जुटा रही जानकारी
श्रम विभाग अधिकारी का कहना है कि "मजदूरों ने बताया है कि अभी महाराष्ट्र के परवानी जिला के छावनी में भी कुछ मजदूर ठेकेदार के चंगुल में फंसे हैं. जिसके बाद वहां के एक मजदूर रामू राठौर से बात हुई है, वो भी जल्द ही गुना आ जाएंगे. इसके साथ ही गुना प्रशासन इस मामले में की जांच कर रही है और मजदूरों से बात कर जानकारी इकट्ठा कर रही है."
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ज्यादा मजदूरी के लालच में छोड़ते हैं आशियाना
श्रम विभाग के अधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि "ठेकेदार ज्यादा मजदूरी का लालच देकर इन्हें ले जाते हैं. इस वजह से ये अपनी जगह छोड़कर चले जाते हैं. इस मामले में प्रशासन कई बार आह्वान भी किया है कि वे कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन प्रशासन को सूचना देकर जाएं, ताकि किसी तरह की समस्या होने पर उस पर कार्रवाई की जा सके."

