'15 से 20 लाख लीटर जल का हर रोज हो रहा है दोहन', बिहार विधानसभा में गूंजा गिरते जल स्तर का मुद्दा
बिहार में गिरते जल स्तर को लेकर चिंता व्यक्त की गई है. कंपनियों के द्वारा जल के दोहन का मामला विधानसभा में उठा. पढ़ें खबर

Published : February 24, 2026 at 8:36 PM IST
पटना : बिहार में धीरे-धीरे गर्मी दस्तक दे रही है. भूगर्भ जल को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है. गिरते जल स्तर को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. निजी कंपनियों के द्वारा भूगर्भ जल का दोहन किया जा रहा है. मामले को बिहार विधानसभा में जोर-जोर से उठाया गया.
भाजपा विधायक ने उठाया मामला : दरअसल, बिहार में भीषण गर्मी के मौसम में कई इलाकों में जल की संकट उत्पन्न हो जाती है. जल स्तर में गिरावट की वजह से चापाकल और दूसरे स्रोत भी काम करना बंद कर देते हैं. बेगूसराय जिले में भूगर्भ जल को लेकर जनप्रतिनिधि गंभीर हैं. भाजपा विधायक रजनीश कुमार ने निजी कंपनियों के रवैया को लेकर सवाल उठाया.
15 से 20 लाख लीटर जल का हो रहा है दोहन : बेगूसराय जिला स्थित तेघड़ा से भाजपा विधायक रजनीश कुमार ने बिहार विधानसभा में भूगर्भ जल का मसला उठाया. रजनीश कुमार ने कहा कि बेगूसराय जिला स्थित बरौनी इलाके में कोल्ड ड्रिंक की तीन कंपनियां हैं. तीनों कंपनियों के द्वारा हर रोज 15 से 20 लाख लीटर भूगर्भ जल रोज दोहन किया जा रहा है. सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए.
''बेगूसराय इलाके में लगातार जल स्तर गिर रहा है. गिरते जल स्तर को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता है. सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. कंपनियों को कितनी मात्रा में भूगर्भ जल का उपयोग करना है, इसे भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.''- रजनीश कुमार, भाजपा विधायक

'31 जिलों में भूगर्भ जल अब सुरक्षित नहीं' : बिहार में भूगर्भ जल की स्थिति वर्तमान में दोहरे संकट से गुजर रही है. एक और जहां जल का स्तर गिर रहा है, वहीं प्रदूषण के स्तर में लोगों की चिंता बढ़ा दी है. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के 38 में से 31 जिलों में भूगर्भ जल अब सुरक्षित नहीं रहा है.
जलस्तर में 2-3 मीटर की औसत गिरावट : बिहार की समग्र स्थिति राज्य के लगभग 28 से 30 जिलों में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा) में स्थिति 'क्रिटिकल' है. उन इलाकों में गर्मियों में चापाकल पूरी तरह सूख जाते हैं. बात अगर बेगूसराय जिले की करें तो बेगूसराय में पिछले एक दशक में जलस्तर में 2-3 मीटर की औसत गिरावट दर्ज की गई है.
सरकार है प्रसायरत : बिहार सरकार 'हर घर नल का जल' योजना के माध्यम से चापाकलों पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश कर रही है. इसके अलावा सरकार तालाब और कुओं को फिर से पुनर्जीवित करने में जुटी है. वर्षा के जल को कैसे संचय किया जाए इस पर भी मंथन चल रहा है.
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