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दिल्ली-एनसीआर ग्रीन टैक्स पर ट्रांसपोर्टरों का चक्का जाम, पानीपत में 200 ट्रक खड़े, करोड़ों का कारोबार प्रभावित

ग्रीन टैक्स के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के दौरान पानीपत में 200 ट्रक खड़े हैं. इससे कारोबार और माल ढुलाई प्रभावित हुई है.

Green Tax Protest in Haryana
दिल्ली-एनसीआर ग्रीन टैक्स पर ट्रांसपोर्टरों का चक्का जाम (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : May 22, 2026 at 2:42 PM IST

3 Min Read
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पानीपत: दिल्ली-एनसीआर में लगाए गए ग्रीन टैक्स के विरोध में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की ओर से घोषित तीन दिवसीय हड़ताल का असर अब पानीपत में भी साफ दिखाई देने लगा है. हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को शहर में करीब 150 से 200 ट्रक खड़े रहे, जिससे दिल्ली जाने वाली गाड़ियों का संचालन लगभग पूरी तरह प्रभावित रहा. ट्रकों के पहिए थमने से माल ढुलाई के साथ-साथ करोड़ों रुपये का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है.

ट्रांसपोर्टरों ने बढ़ते टैक्स पर उठाए सवाल: पानीपत ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर मलिक ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि, "पहले प्रति ट्रक ₹3 हजार ग्रीन टैक्स लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर ₹5 हजार तक कर दिया गया है. ट्रांसपोर्टरों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. सरकार ने पहले यूरो-4 गाड़ियों को बंद कराकर ट्रांसपोर्टरों को महंगी यूरो-6 गाड़ियां खरीदने के लिए मजबूर किया. एक यूरो-6 ट्रक करीब ₹10 लाख तक महंगा पड़ता है. ऊपर से लगातार बढ़ रहे टैक्स ने कारोबार को मुश्किल में डाल दिया है."

पानीपत में 200 ट्रक खड़े (ETV Bharat)

"ग्रीन टैक्स का हिसाब सार्वजनिक करे सरकार": धर्मवीर मलिक ने सरकार से ग्रीन टैक्स की राशि के उपयोग का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई. उन्होंने कहा कि, "सरकार बताए कि पहले जो करोड़ों रुपये ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले गए, उनका इस्तेमाल प्रदूषण कम करने में कहां किया गया. 21, 22 और 23 मई तक देशभर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी रहेगी और इन दिनों दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या लगभग शून्य रहेगी. सरकार को हड़ताल से पहले और बाद के प्रदूषण स्तर की तुलना सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदूषण का कारण केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर नहीं है."

₹50 लाख रोजाना का कारोबार प्रभावित: ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार पानीपत से प्रतिदिन करीब ₹50 लाख का ट्रांसपोर्ट कारोबार होता है. रोजाना 150 से 200 ट्रक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, लेकिन हड़ताल के चलते सभी वाहन खड़े हैं. इससे व्यापारियों और उद्योगों की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है. कई राज्यों में भेजा जाने वाला माल गोदामों और ट्रकों में ही रुका पड़ा है.

चालकों की बढ़ीं मुश्किलें: इस बारे में ट्रक चालक मुकेश ने कहा कि, "राजस्थान, पंजाब सहित कई राज्यों में जाने वाला माल रुका हुआ है. गाड़ियां खड़ी होने से हमारा काम पूरी तरह ठप हो गया है." वहीं, चालक सुरेश ने कहा कि, "डीजल, टायर और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भाड़े में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. आमदनी बंद हो गई है और खर्च बढ़ते जा रहे हैं."

ट्रांसपोर्ट उद्योग की बढ़ी चिंता: ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से ग्रीन टैक्स वापस लेने और डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत देने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर बाजार और आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचेगा. पानीपत सहित देशभर में ट्रकों के पहिए थमने से ट्रांसपोर्ट उद्योग की समस्याएं बढ़ सकती है.

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