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871 वर्षों बाद जैसलमेर में जैन संत की एतिहासिक चादर का अभिषेक, 6 से 8 मार्च तक भव्य महोत्सव

जैसलमेर में दादा गुरुदेव की पावन चादर का अभिषेक होगा. इसमें 1.08 करोड़ श्रद्धालु सामूहिक पाठ करेंगे.

grand Chadar Festival in Jaisalmer
चादर महोत्सव में आए जैन संत (ETV Bharat Jaisalmer)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 2, 2026 at 3:15 PM IST

5 Min Read
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जैसलमेर: स्वर्णनगरी जैसलमेर एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रही है. आगामी 6 से 8 मार्च तक यहां जैन समाज का विराट 'चादर महोत्सव' आयोजित होगा, जिसमें करीब 871 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दादा गुरुदेव जिनदत्तसूरि की पावन चादर का विधिवत अभिषेक किया जाएगा. इसे जैन परंपरा की दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है. आयोजन को लेकर शहर में उत्सव जैसा वातावरण है. देश-विदेश से 20 से 30 हजार श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है. होटल, धर्मशालाएं और रिसॉर्ट लगभग पूर्णतः बुक हो चुके हैं. प्रशासन और आयोजन समिति ने मिलकर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं.

उद्घाटन में शामिल होंगे प्रमुख राष्ट्रीय नेता: महोत्सव का शुभारंभ 6 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे. कार्यक्रम के दूसरे दिन 7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी शामिल होने की संभावना व्यक्त की गई है. आयोजन समिति के चेयरमैन एवं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना का अभियान बताया है. जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली और समिति के सचिव पदम टाटिया ने बताया कि पिछले एक महीने से तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं.

आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज (ETV Bharat Jaisalmer)

पढ़ें: जैसलमेर में सुरक्षित है जैन समाज से जुड़ी 872 साल पुरानी चादर, दादा गुरुदेव की धरोहर के दर्शन को आते हैं श्रद्धालु

डेडानसर मैदान में तैयार हुई भव्य 'टेंट सिटी' : महोत्सव का मुख्य केंद्र डेडानसर मेला मैदान है, जहां करीब एक महीने से विशाल टेंट सिटी का निर्माण किया जा रहा है. लगभग 300 श्रमिक दिन-रात जुटकर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं. मुख्य कार्यक्रमों के लिए एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विशाल डोम बनाया गया है, जिसमें 12 हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं. इसके अतिरिक्त 50-50 हजार वर्गफीट के पांच अन्य डोम तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग संग्रहालय, भोजनशाला और अन्य व्यवस्थाओं के लिए होगा.

7 मार्च को 1.08 करोड़ श्रद्धालु करेंगे सामूहिक पाठ: महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 7 मार्च को होने वाला 'सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ' है. आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज के अनुसार, आचार्यश्री जिन मनोज्ञ सागर की प्रेरणा से सुबह 11:45 बजे विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु सामूहिक पाठ करेंगे. आयोजकों का दावा है कि यह एक ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड होगा. इसी दिन जैसलमेर दुर्ग से पारंपरिक 'चादर वरघोड़ा' (भव्य जुलूस) निकाला जाएगा. जुलूस के साथ चादर को महोत्सव स्थल तक लाया जाएगा, जहां सामूहिक इकतीसा पाठ के उपरांत दोपहर में विधिवत अभिषेक और पूजा संपन्न होगी.

grand Chadar Festival in Jaisalmer
चादर महोत्सव के लिए तैयार की गई टेंट सिटी (ETV Bharat Jaisalmer)

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11वीं शताब्दी से सुरक्षित है पवित्र चादर: आयोजकों ने बताया कि दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि जी की यह पावन चादर 11वीं शताब्दी से सुरक्षित मानी जाती है और जैन समाज में गहरी आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि लगभग 145 वर्ष पूर्व जैसलमेर में फैली महामारी के दौरान इसी चादर के प्रभाव से संकट टल गया था. इतिहास में पहली बार करीब 871 वर्षों के बाद इस चादर का विधिवत अभिषेक किया जा रहा है, जो जैन समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि आगामी 6 मार्च को गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरी जी सहित आचार्य, उपाध्याय और संतों के मंगल प्रवेश के साथ महोत्सव की शुरुआत होगी. इसी दिन विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट का विमोचन किया जाएगा.

8 मार्च को आचार्य पद प्रदान समारोह: महोत्सव के अंतिम दिन 8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को 'आचार्य' पद की पदवी प्रदान की जाएगी. साथ ही गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा. इस दिन श्रद्धालुओं को चादर ओक जल और वासक्षेप का वितरण किया जाएगा. श्रद्धालुओं को दादा गुरुदेव के जीवन, जैन परंपराओं और इतिहास से परिचित कराने के लिए 50 हजार वर्गफीट क्षेत्र में एक विशेष संग्रहालय तैयार किया गया है. इसमें उनकी जीवनी, जैन संस्कृति से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज और मूर्तियों का प्रदर्शन किया जाएगा.

संतों की पदयात्रा बनी श्रद्धा का केंद्र: देश के विभिन्न हिस्सों से इस महोत्सव में शामिल होने के लिए साधु-साध्वियां पैदल विहार करते हुए जैसलमेर पहुंचे हैं. आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज स्वयं लगभग 2500 किलोमीटर की पदयात्रा कर यहां पहुंचे हैं, जबकि मनीष सागर महाराज ने करीब 1800 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की है.

तीन दिवसीय कार्यक्रम का विस्तृत शेड्यूल:

6 मार्च:

● संतों का मंगल प्रवेश

● उद्घाटन समारोह

● विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्के का विमोचन

7 मार्च:

● सुबह 11:45 बजे विश्वव्यापी सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ (1.08 करोड़ श्रद्धालु)

● जैसलमेर दुर्ग से भव्य चादर वरघोड़ा

● चादर अभिषेक एवं पूजा

● सांस्कृतिक संध्या

8 मार्च:

● उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान

● गणिनी पद समारोह

● चादर ओक जल एवं वासक्षेप वितरण

आयोजकों ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव न केवल जैन समाज की आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि जैसलमेर को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर नई पहचान भी दिलाएगा. श्रद्धा, इतिहास और भव्यता का यह संगम स्वर्णनगरी के लिए एक अविस्मरणीय अध्याय साबित होने जा रहा है.