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पालकी में विराजेंगे बाबा सूरदास, होली से पहले 20 गांवों से होकर निकलेगी आस्था की यात्रा, लाखों भक्त करेंगे मंदिर की परिक्रमा

तिलपत के सूरदास मंदिर से होली पर 30 किलोमीटर परिक्रमा निकलेगी, लाखों श्रद्धालु आस्था संग शामिल होंगे.

SURDAS TEMPLE TILPAT HOLI PARIKRAMA
पालकी में विराजेंगे बाबा सूरदास (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 21, 2026 at 10:43 AM IST

3 Min Read
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फरीदाबाद: फरीदाबाद जिले के तिलपत गांव स्थित प्राचीन सूरदास मंदिर में होली के अवसर पर निकलने वाली परिक्रमा आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है. बताया जाता है कि यह परंपरा लगभग 100 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है. हर साल होलिका दहन से एक दिन पहले मंदिर से भव्य परिक्रमा निकाली जाती है, जिसमें हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

30 से 35 किलोमीटर की परिक्रमा: यह परिक्रमा लगभग 30 से 35 किलोमीटर लंबी होती है और करीब 20 गांवों से होकर गुजरती है. श्रद्धालु पालकी में विराजमान बाबा सूरदास की प्रतिमा के साथ ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच यात्रा पूरी करते हैं. अलग-अलग स्थानों से लोग जुड़ते जाते हैं और पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. शाम तक यह परिक्रमा पुनः मंदिर प्रांगण में लौटती है, जहां श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर कार्यक्रम का समापन करते हैं.

होली से पहले 20 गांवों से होकर निकलेगी आस्था की यात्रा (Etv Bharat)

पुजारी ने बताई परंपरा की विशेषता: मंदिर के पुजारी रवि शास्त्री ने ईटीवी भारत को बताया कि “यह परिक्रमा पिछले 100 सालों से अधिक समय से लगातार निकाली जा रही है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं. इस बार भी 1 मार्च को परिक्रमा निकाली जाएगी, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इस परिक्रमा में शामिल होता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं."

SURDAS TEMPLE TILPAT HOLI PARIKRAMA
लाखों भक्त करेंगे मंदिर की परिक्रमा (Etv Bharat)

बाबा सूरदास की कथा से जुड़ी आस्था: मंदिर के पुजारी रवि शास्त्री ने आगे बताया कि, "स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, तिलपत गांव में एक समय भारी विपत्ति आई थी. गांव में लगातार असामयिक मृत्यु हो रही थी और महिलाएं विधवा हो रही थीं, जिससे लोग पलायन करने लगे थे. तभी बाबा सूरदास गांव में आए और लोगों को गांव न छोड़ने की प्रेरणा दी. उन्होंने गांव में रहकर लोगों का मनोबल बढ़ाया और कहा जाता है कि इसके बाद गांव में विपदा टल गई. गांव फिर से खुशहाल हुआ और उसी समय बाबा सूरदास ने परिक्रमा की शुरुआत की. तभी से यह परंपरा हर साल होली के अवसर पर निभाई जाती है."

SURDAS TEMPLE TILPAT HOLI PARIKRAMA
मंदिर के पुजारी रवि शास्त्री (Etv Bharat)

महाभारत काल से जुड़ा तिलपत गांव का इतिहास: तिलपत गांव का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है. मान्यता है कि महाभारत युद्ध टालने के लिए श्रीकृष्ण ने दुर्योधन से पांडवों के लिए पांच गांव मांगे थे, जिनमें तिलपत भी शामिल था. यही कारण है कि यह गांव धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु इस गौरवशाली इतिहास को भी स्मरण करते हैं.

SURDAS TEMPLE TILPAT HOLI PARIKRAMA
बाबा सूरदास की कथा से जुड़ी आस्था (Etv Bharat)

पुलिस प्रशासन का सहयोग: इस वर्ष 1 मार्च को परिक्रमा सुबह मंदिर से शुरू होकर शाम तक वापस लौटेगी. 2 मार्च को मंदिर प्रांगण में होलिका दहन किया जाएगा, जबकि 4 मार्च को रंगों की होली धूमधाम से मनाई जाएगी. आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. हर वर्ष की तरह इस बार भी आस्था, इतिहास और परंपरा का यह संगम पूरे भव्य रूप में देखने को मिलेगा.

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