दूसरे बांधवगढ़ की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार, बाघों के गढ़ से शिफ्टिंग के क्या मायने?
दूसरे टाइगर रिजर्व में बाघों की दुनिया बसाने मदद कर रहा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, 2008 से लेकर अबतक 28 टाइगर हुए ट्रांसफर, अब माधव टाइगर रिजर्व पर सरकार का फोकस

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 29, 2025 at 7:08 AM IST
|Updated : December 29, 2025 at 9:33 AM IST
रिपोर्ट : अखिलेश शुक्ला
उमरिया : मध्य प्रदेश सरकार दूसरा बांधवगढ़ बनाने की तैयारी में है, सुनने में थोड़ा अजीब लगे पर सरकार की मंशा है कि बांधवगढ़ की तर्ज पर ही दूसरे टाइगर रिजर्व विकसित किए जाएं. देश ही नहीं दुनिया में अपने टाइगर्स के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जाना जाता है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या इतनी है कि यहां आसानी से बाघों का दीदार हो जाता है और टाइगर सफारी के इस रोमांचक अनुभव के लिए देश-विदेश से लाखों टूरिस्ट यहां आते हैं. वहीं, अब बाघों के इस गढ़ से दूसरा बांधवगढ़ बनाने की तैयारी की जा रही है.
बांधवगढ़ में समय-समय पर बाघों की आबादी बढ़ाने, बाघों का आपसी द्वंद्व कम करने और दूसरे टाइगर रिजर्व को भी आबाद करने जरूरत के हिसाब से बाघ शिफ्ट किए जाते हैं. साल 2025 में भी बांधवगढ़ से दूसरे टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिन शिफ्ट किए गए हैं.

माधव टाइगर रिजर्व पर सरकार का फोकस
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते हैं, '' वर्ष 2025 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो बाघ दूसरे टाइगर रिजर्व में भेजे गए हैं. अप्रैल महीने में 4 साल के एक नर बाघ को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में भेजा गया, और हाल ही में 3 साल की एक मादा बाघिन को भी दिसंबर महीने में माधव टाइगर रिजर्व भेजा गया है. इस तरह से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से साल 2025 में दो बाघों को माधव टाइगर रिजर्व में शिफ्ट गया है.'' इससे साफ है कि माधव टाइगर रिजर्व में इन दिनों बाघों की एक अलग ही दुनिया बसाई जा रही है. माधव टाइगर रिजर्व पहले राष्ट्रीय उद्यान था, टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद इसका कुल क्षेत्रफल 1,751 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है, जिसमें लगभग 375 वर्ग किलोमीटर इसका कोर एरिया है.
माधव टाइगर रिजर्व बनेगा बांधवगढ़ की तरह?
9 मार्च 2025 को आधिकारिक तौर पर माधव टाइगर रिजर्व को देश का 58वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया और मध्य प्रदेश का यह 9वां टाइगर रिजर्व बना. माधव टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है जो कि ग्वालियर चंबल संभाग का हिस्सा है. माधव टाइगर रिजर्व को 1958 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था, ये ऐतिहासिक रूप से ग्वालियर के महाराजाओं और मुगल शासकों का कभी शिकार का गढ़ भी हुआ करता था, यहां पर बाघों को फिर से बसाने के लिए साल 2023 में टाइगर री इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, वर्तमान में यहां बाघों की संख्या बढ़ रही है.

बांधवगढ़ से अबतक भेजे गए तीन बाघ
बांधवगढ़ बाघों का गढ़ है और यहां पर जरूरत के हिसाब से दूसरे टाइगर रिजर्व में बाघ भेजे जाते रहे हैं. शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से अब तक तीन बाघ भेजे गए हैं, जिसमें एक बाघिन भी शामिल है. साल 2023 में पहली बार बांधवगढ़ से एक बाघ को माधव टाइगर रिजर्व भेजा गया था, इसके बाद साल 2025 में एक नर बाघ और एक बाघिन जिसे हाल ही में भेजा गया है, इस तरह कुल तीन टाइगर्स बांधवगढ़ से भेजे जा चुके हैं. इस तरह से बांधवगढ़ टाइगर माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की दुनिया बसाने के लिए एक अहम रोल अदा कर रहा है.
दूसरे टाइगर रिजर्व क्यों भेजे जाते हैं बाघ?
आखिर दूसरे टाइगर रिजर्व में बाघों की शिफ्टिंग क्यों की जाती है? इसे लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते हैं, '' साल 2025 में बांधवगढ़ से दो बाघ को माधव टाइगर रिजर्व में भेजा गया है, क्योंकि ये माधव टाइगर रिजर्व बाघ के रहवास के रूप में एक उपयुक्त पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराता है, माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या कम होते देख बांधवगढ़ से बाघों को ट्रांसलोकेट करना बाघों के संरक्षण व संख्या में संवर्धन हेतु एक बेहतर प्रयास है. किसी भी टाइगर रिजर्व से इस तर के ट्रांसलोकेश टाइगर्स को फिर बसाने के लिए किए जाते हैं.''

बांधवगढ़ से कितने टाइगर्स भेजे गए?
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2008 से 2025 तक कुल 28 बाघों को यहां से अलग-अलग लोकेशन पर ट्रांसफर किया गया है, जिसमें बाघ-बाघिन दोनों शामिल हैं.
- साल 2008 में एक बाघ को ट्रांसफर किया गया.
- 2014 में फिर एक बाघ को ट्रांसफर किया गया.
- 2016 में दो बाघ भेजे गए.
- 2018 में तीन बाघ भेजे गए.
- 2019 में एक बाघ भेजा गया.
- 2020 में 6 बाघ भेजे गए.
- 2021 में चार बाघ भेजे गए.
- 2023 में तीन बाघ भेजे गए.
- 2024 में पांच बाघ भेजे गए.
- 2025 में दो बाघ भेजे गए.
दूसरे टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने का बांधवगढ़ को भी फायदा
ऐसा नहीं है कि बाघों के गढ़ बांधवगढ़ से टाइगर शिफ्ट करने से केवल दूसरे टाइगर रिजर्व की ही फायदा होता है, बल्कि इसका फायदा बांधवगढ़ को भी मिलता है. दरअसल, मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा टाइगर्स बांधवगढ़ में ही पाए जाते हैं, ऐसे में कई बार देखा जाता है कि बाघों के बीच में आपसी द्वंद्व और संघर्ष बढ़ जाता है. छोटी टेरिटरी में ज्यादा बाघ होने से आपस संघर्ष से बाघों की मौत की घटनाएं भी बढ़ती हैं, ऐसे में बाघों की शिफ्टिंग से इस संघर्ष को कम करने में मदद मिलती है.
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क्या अभी और बाघ शिफ्ट होंगे?
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते हैं, '' बाघों का ट्रांसलोकेशन मध्य प्रदेश के मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक CWLW और NTCA के अनुमति के बाद ही किया जाता है. बाघों की संख्या के आधार पर बाघ बाहुल्य क्षेत्र से कम बाघ वाली जगह समय-समय पर ट्रांसफर किए जाते हैं, निकट भविष्य में ट्रांसलोकेशन के लिए निर्देश अभी नहीं मिले हैं लेकिन भविष्य में निर्देश मिलने पर बाघों का एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसलोकेश किया जा सकता है.''

