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हिमाचल में पुलिसकर्मियों पर केस चलाने से पहले लेनी होगी सरकार से परमिशन, इन्हें मिलेगा लाभ

हिमाचल प्रदेश में अब अदालत बिना सरकार की अनुमति लिए पुलिसकर्मियों पर केस नहीं चला सकती है.

Himachal Pradesh Police
हिमाचल प्रदेश पुलिस (HP Police)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 16, 2026 at 12:10 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के कामों पर अदालत राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही संज्ञान ले सकेगी. इसको लेकर राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से एक महत्त्वपूर्ण अधिसूचना जारी की गई है. अधिसूचना के तहत राज्य पुलिस के कई वर्गों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकृत श्रेणी में शामिल किया गया है. सरकार के इस फैसले के बाद अब ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों को लेकर संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ किसी भी अदालत में सीधे संज्ञान नहीं लिया जा सकेगा. इसके लिए पहले राज्य सरकार की अनुमति प्राप्त करनी होगी.

इन 2 श्रेणी में शामिल किए पुलिस अधिकारी

हिमाचल सरकार की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस 2023 की धारा 218 की उपधारा 3 के तहत जारी अधिसूचना में गैर राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की दो श्रेणियों को शामिल किया गया है. पहली श्रेणी एनजीओ-1 की है, जिसमें पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर और सहायक उप निरीक्षक यानी एएसआई को शामिल किया गया है. इसी के साथ दूसरी श्रेणी एनजीओ-2 की है, जिसमें हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को शामिल किया गया है. सरकार ने साफ किया है कि अगर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के दौरान इन पुलिस कर्मियों द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है, तो उस मामले में अदालत तभी संज्ञान ले सकेगी, जब राज्य सरकार से पहले अनुमति प्राप्त की गई हो.

सिर्फ इन मामलों पर लागू होगा ये प्रावधान

हालांकि राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान सिर्फ उन्हीं मामलों पर लागू होगा, जो पुलिस कर्मियों द्वारा आधिकारिक ड्यूटी निभाने या ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित हों. लिहाजा निजी मामलों या ऑफिशियल ड्यूटी से बाहर की गतिविधियों के लिए ये सुरक्षा नहीं मिलेगी. राज्य सरकार इस फैसले को पुलिस बल को कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है. माना जा रहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान कई बार पुलिस कर्मियों को कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने पड़ते हैं. ऐसे में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए पुलिसकर्मियों को कानूनी संरक्षण देने की मंशा से यह फैसला लिया गया है.

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