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डोटासरा बोले, 'हार के डर से पंचायत चुनाव नहीं करा रही सरकार', मंत्री मदन दिलावर पर कसा तंज

सदन में गोविंद सिंह डोटासरा की संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल और पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर से कई बार हुई नोंक–झोंक हुई.

Govind Singh Dotasra
गोविंद सिंह डोटासरा (Courtesy - Rajasthan Assembly)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 26, 2026 at 5:04 PM IST

9 Min Read
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जयपुर: राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को ग्रामीण विकास पंचायत राज की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लक्ष्मणगढ़ से विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर पंचायत राज चुनाव से भागने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सरकार को पता है कि पंचायत चुनाव में करारी हार होगी, इसलिए चुनाव नहीं करा रहे हैं. डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री में दम है, तो भरतपुर से चुनाव जीत कर बता दें, मैं मान जाऊंगा. मुख्यमंत्री चुनकर तो जयपुर के सांगानेर से आए हैं और भरतपुर में पैसा खर्च कर रहे हैं, ऐसा नहीं चलेगा.

'मेरे बीच में बोले, तो चौकड़ी भुला दूंगा': प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश को 3000 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया है और ग्रामीण विकास को खत्म करने का काम किया है. हाईकोर्ट चुनाव कराने के लिए कह चुका है, लेकिन चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं. राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम SIR लागू हुआ. SIR से नई वोटर लिस्ट बन गई, लेकिन सरकार पुरानी वोटर लिस्ट से चुनाव क्यों करवा रही है. इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि आपको कुछ पता नहीं है. इस तरह की बातें मत किया करो. इस पर डोटासरा ने कहा कि मेरे बीच में बोलोगे, तो चौकड़ी भुला दूंगा. इस पर जोगाराम पटेल ने कुछ आरोप लगाए, तो डोटासरा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने ही जोधपुर में कहा था कि उन्हें एयरपोर्ट पर घुसने नहीं दिया, जो एक लाख रुपए देता है, वही अंदर जाता है.

डोटासरा ने सरकार पर लगाए ये आरोप (Courtesy - Rajasthan Assembly)

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'जमानत पर चल रहे हैं पंचायत राजमंत्री': डोटासरा ने पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर पर भी तंज कसते हुए कहा कि मंत्री कह रहे हैं कि भैंस का नहीं गाय का दूध पियो. इस पर मंत्री दिलावर ने कहा कि चिंता मत करिए, मिड डे मील की जांच चल रही है. इस पर डोटासरा ने कहा कि आपके खिलाफ जो 14 मुकदमे तक चल रहे हैं, उनमें से 6 में आप जमानत पर चल रहे हैं. बाकी मामलों में भी बेल ले लो. डोटासरा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि पंचायती राज, और शिक्षा विभाग से इस भले आदमी से हटाओ और प्रदेश को बचाओ.

अविनाश गहलोत से डोटासरा की नोंकझोक: वहीं चर्चा के दौरान डोटासरा की मंत्री अविनाश गहलोत से भी नोकझोंक हुई. अविनाश गहलोत ने कहा कि अशोक गहलोत की सरकार में मंच से ट्रांसफर के पैसे को लेकर तमाम शिक्षकों ने हाथ खड़े किए थे, तब आपके मुंह से एक शब्द नहीं निकला. भ्रष्टाचार पर बात करना आसान है, लेकिन जब बात आएगी, तो उसका जवाब भी देना होगा. राहुल गांधी से लेकर तमाम बड़े नेता नेशनल हेराल्ड केस में बेल पर है उस पर भी बात किया करो.

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मदन दिलावर को लगाया किरोड़ी के पीछे: डोटासरा ने अपने भाषण में किरोड़ी लाल मीणा पर भी तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान ऐसा पहला राज्य है, जहां पर ग्रामीण विकास और पंचायत राज अलग-अलग डिपार्टमेंट बनाए गए हैं. मेरी मांग है कि पंचायत राज विभाग भी किरोड़ी लाल मीणा को दिया जाए, जिससे कि वो कम से कम दौड़ भाग करके छापेमारी करके कुछ काम तो कर सकें. लेकिन सरकार ने तो किरोड़ी मीणा की पापुलैरिटी खत्म करने के लिए मदन दिलावर को उनके पीछे लगा दिया है. जिस पर किरोड़ी मीणा ने कहा कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में देशभक्ति का पाठ पढ़कर आया हूं. वहां पर सर्व समाज को साथ लेकर चलने की बात सिखाई जाती है.

'ग्राम विकास अधिकारियों को डेपुटेशन पर लगाया': डोटासरा ने कहा कि जब एलडीसी और थर्ड ग्रेड टीचर जिले के अधिकारी हैं, तो फिर ग्राम विकास अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में प्रतिनियुक्ति पर क्यों लगाया गया. डोटासरा ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति मंत्री मदन दिलावर के नाम का बेजा इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार करता है, लेकिन मंत्री उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं. वह व्यक्ति पूरे डिपार्टमेंट में बदनाम है.

'परिसीमन में पंचायत राज मंत्री की एक नहीं चली': डोटासरा ने अपने भाषण में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर में तंज कसते हुए कहा कि पंचायत राज के लिए 12 महीने तक परिसीमन चलता है. कानून के मुताबिक मुख्यमंत्री ने मदन दिलावर की अध्यक्षता में एक केबिनेट सब कमेटी का गठन किया था. उन्होंने दावा किया कि उस कमेटी में मंत्री की नहीं चली. पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी ने पूरा परिसीमन किया है. यहां तक की मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में एक पंचायत का परिसीमन करवाने के लिए भी मुख्यमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक घूमते रहे, लेकिन उनका कुछ नहीं हुआ.

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डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपनी मर्जी के हिसाब से परिसीमन किया है. कहीं पर एक वार्ड 3000 मतदाताओं का बनाया है, तो कहीं पर 13000 मतदाताओं का एक वार्ड बनाया है. जो 30 साल से पंचायत बनी हुई थी, उसका नाम चेंज और मुख्यालय चेंज कर दिया गया है. कोर्ट ने अप्रैल तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन अब सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई है क्योंकि सरकार चुनाव कराने में सक्षम नहीं. अगर अभी चुनाव हुए तो सुपड़ा साफ हो जाएगा. डोटासरा ने कहा कि साल 23–24 में 561 करोड़ रुपए मनरेगा का बकाया चल रहा था. साल 25–26 में 190 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है. इसके अलावा केंद्र से मिलने वाली 3000 करोड़ की राशि 2 साल से नहीं मिली है, लेकिन मुख्यमंत्री और तमाम मंत्री बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.

डोटासरा ने कहा कि मेवात क्षेत्र विकास में सरकार ने 25-26 में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा, लेकिन केवल 25.09 करोड़ रुपए खर्च हुए. केवल 262 गांव में काम हुआ है. डांग विकास क्षेत्र 25-26 में 100 करोड़ रुपए खर्च होना था, लेकिन 17.43 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. मगरा क्षेत्र विकास में 100 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान रखा गया था, लेकिन उसमें केवल 12.67 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. यहां तक कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना में साल 2025 में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा हुआ, लेकिन उसे शून्य पैसा खर्च हुआ है. इस तरह मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र में 2025-26 में 150 करोड़ का बजट रखा गया था, लेकिन उस पर केवल 12.68 करोड़ रुपए ही खर्च हुआ है.

इससे पहले ग्रामीण विकास पंचायती राज की अनुदान मांगों की चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी राज्य सरकार को घेरने का काम किया. जूली ने कहा कि पंडित नेहरू ने नागौर में पंचायत राज की शुरुआत की थी. हमारी सरकार ने त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की थी. उन्होंने कहा कि देश के संविधान में लिखा हुआ है कि हर 5 साल में चुनाव होने चाहिए, लेकिन सरकार चुनाव नहीं करा रही और किस मुंह से संविधान की बात कर रही है.

'विकास के तमाम काम अटक गए': उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है उसके बावजूद भी प्रदेश को हर साल 3000 करोड़ रुपए मिलते थे. लेकिन दो बार से वो रकम चुनाव नहीं होने के चलते नहीं मिल रही है. इसके चलते विकास के तमाम काम अटक गए हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने तमाम लोगों को काम का अधिकार दिया था. कोरोना महामारी के दौरान भी लोगों को पलायन नहीं करना पड़ा. क्योंकि मनरेगा के तहत लोगों में काम मिला था. जूली ने कहा कि नरेगा के काम देश में हुए, भाजपा के पेट में दर्द हुआ. इसलिए नरेगा को खत्म करने का काम किया जा रहा है.

'40 परसेंट पैसा कहां से देंगे': जूली ने कहा कि पहले राज्यों की हिस्सेदारी सिर्फ 10% थी, लेकिन अब नए कानून के मुताबिक राज्यों को 40 परसेंट हिस्सेदारी देनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि जो सरकार 10 परसेंट नहीं दे पा रही थी, वह 40% हिस्सेदारी कैसे देंगे. जबकि पहले ही राज्यों पर कर्ज का बोझ बड़ा हुआ है. जूली ने कहा कि केंद्र सरकार ने 125 दिन के रोजगार देने की बात कही है. लेकिन 125 दिन के रोजगार के लिए 21000 करोड़ रुपए देने होंगे, वो पैसा कहां से आएगा. राज्य सरकार देश और प्रदेश को गुमराह कर रही है. जूली ने कहा कि गरीबों की हाय बहुत बुरी होती है, सरकार को मनरेगा पर ध्यान देना चाहिए.