हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, भारत की संस्कृति एवं आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक: राज्यपाल संतोष गंगवार
जमशेदपुर में हस्तकरघा दिवस पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा यह वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, भारत की संस्कृति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.

Published : August 7, 2026 at 4:00 PM IST
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में हस्तकरघा दिवस पर आयोजित समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार शामिल हुए. मौके पर राज्यपाल ने कहा कि हस्तकरघा हमारी विरासत है, इससे बड़ा स्वदेशी कुछ भी नहीं है. आज इसे प्रोत्साहित करने की जरुरत है. जमशेदपुर में वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के द्वारा 13वां हस्तकरघा दिवस समारोह का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम बिस्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया.
बता दें कि वर्ष 2014 से हस्तकरघा दिवस मनाया जा रहा है. जमशेदपुर के आयोजन में बंगाल, महारष्ट्र और बिहार से भी प्रतिनिधि शामिल हुए. कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि आज बुनकर विद्या लुप्त हो रही है. इस विद्या को बचाने और संवारने की जरुरत है. जबकि राज्य में बुनकर को लूम उपलब्ध कराने के लिए पूरी व्यवस्था है.
उत्कृष्ट बुनकरों को किया सम्मानित
समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कई बुनकरों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस उन लाखों बुनकरों के श्रम, कौशल एवं सृजनशीलता को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने सदियों से भारत की सांस्कृतिक पहचान को अपने हाथों से बुना है. उन्होंने कहा कि हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा एवं आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक है.
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के अवसर पर यह स्मरण करना भी प्रासंगिक है कि वर्ष 1942 में प्रारम्भ हुए भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान की थी. उस दौर में चरखा, खादी और हस्तकरघा केवल वस्त्र निर्माण के साधन नहीं थे, बल्कि स्वदेशी, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रतीक बन गए थे. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी एवं स्वदेशी को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर देशवासियों में आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव की भावना का संचार किया.
बाजार उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है: राज्यपाल
झारखंड की जनजातीय एवं ग्रामीण परंपराओं में हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत विद्यमान है. राज्य का तसर रेशम अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, डिजाइन, विपणन तथा डिजिटल माध्यमों से जोड़कर बुनकरों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाना समय की आवश्यकता है.
राज्यपाल ने कहा कि उनके मंत्री रहते राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस मनाने की पहल प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य देश के बुनकरों के श्रम, कौशल एवं योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना तथा हस्तकरघा क्षेत्र को नई पहचान प्रदान करना था. प्रधानमंत्री द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' 'आत्मनिर्भर भारत' तथा पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी अनेक पहलों के माध्यम से बुनकरों, शिल्पकारों एवं पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि विकसित भारत की आर्थिक शक्ति भी बन सकते हैं.
ये भी पढ़ें: राज्यपाल से मिले सीएम हेमंत सोरेन, बैठक के बाद कहा- आंदोलनरत छात्रों को खुला ऑफर, मांगों पर गंभीरता से होगा विचार
रांची में जलवायु अखड़ा का समापन: भारत पंचामृत मिशन को आगे बढ़ाने पर राज्यपाल का जोर
पीएम मोदी ने वर्चुअली किया पिस्का-मुरी स्टेशन का उद्घाटन, राज्यपाल रहे समारोह में शामिल

