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छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध उत्खनन पर राज्यपाल चिंतित, खनिज विभाग को जरूरी कदम उठाने के निर्देश

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने राज्य में रेत के अवैध उत्खनन पर चिंता जाहिर की है.

Governor Ramen Deka
राज्यपाल रमेन डेका (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 3, 2026 at 9:59 PM IST

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की नदियों में हो रहे रेत के अवैध उत्खनन का मुद्दा लोकभवन तक पहुंच गया. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने इस मुद्दे पर खनिज विभाग के अधिकारियों संग बात की है. उन्होंने नदियों और बड़े नालों में रेत खनन की गतिविधियों को वैज्ञानिक, संतुलित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है. उन्होंने कहा कि अत्यधिक खुदाई से नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बदल रहा है और उनके पारिस्थितिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगाना जरूरी- राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि नदियों के सरक्षण के लिए रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगाना जारूरी है. क्योंकि इससे पर्यावरण और जल संसाधनों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है. राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस विषय पर चर्चा की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि रेत खनन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के तहत किया जाना चाहिए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों उद्देश्यों को समान रूप से साधा जा सके. राज्यपाल ने राज्य में चल रहे ड्रोन आधारित निगरानी और खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग की सराहना की है.

नदियों और बड़े नालों की प्राकृतिक संरचना तथा जलधारण क्षमता को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है. अनियोजित खनन गतिविधियों से नदी तटों, भू-जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए खनन कार्यों की नियमित निगरानी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. नदियों एवं जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है- रमेन डेका, राज्यपाल, छत्तीसगढ़

राज्यपाल ने निर्देश दिए कि रेत खनन से संबंधित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए. उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सर्वे और तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है, ताकि खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन कर बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम उठाए जा सकें.

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