होली से पहले कैथल के किसानों को बड़ा तोहफा, पराली प्रबंधन करने वाले 50000 किसानों के खातों में 50 करोड़ रुपए भेजेगी सरकार
हरियाणा में पराली प्रबंधन पर सरकार की ओर से उठाए गए कदम कारगर होते दिख रहे हैं. लगातार पराली जलाने वालों की संख्या घटी है.

Published : February 23, 2026 at 5:54 PM IST
कैथलः धान की पराली न जलाकर उसका प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार इस बार बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन दे रही है. जिले के 50000 किसानों के खातों में कुल 50 करोड़ रुपए की राशि होली से पहले डाली जाएगी. सरकार की ओर से किसानों को 1200 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से यह प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जबकि पहले यह राशि 1000 रुपए प्रति एकड़ थी. कृषि विभाग के अनुसार योजना के तहत भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अब तक 13 एकड़ तक जमीन रखने वाले किसानों के खातों में करीब 5 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है. वहीं 13 एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों के खातों में यह राशि जल्द ही डाल दी जाएगी.
995 किसानों को सबसिडी पर दिए कृषि यंत्र: फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र सबसिडी पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. जिले में अब तक 995 किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर एस.एम.एस. सहित अन्य कृषि यंत्र दिए गए हैं. इन मशीनों पर सरकार की ओर से करीब 12 करोड़ रुपए की सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है. कृषि यंत्र मिलने से किसानों को पराली प्रबंधन में आसानी हुई है और खर्च में भी कमी आई है.
पराली जलाने के मामले 270 से घटकर 11 रह गए: जिले में इस बार धान सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में रिकॉर्ड स्तर पर कमी दर्ज की गई है. कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष केवल 11 स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए, जिनमें संबंधित किसानों के खिलाफ एफ. आई. आर. दर्ज की गई. इसके विपरीत, पिछले वर्ष जिले में 270 लोकेशनों पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं और 141 किसानों पर कानूनी कार्रवाई की गई थी.
'पराली प्रबंधन से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण': जिला सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि "जिले के 50000 किसानों ने धान अवशेष प्रबंधन किया है. इन किसानों को 1200 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से कुल 50 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 13 एकड़ तक जमीन वाले किसानों के खातों में 5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं. शेष किसानों के खातों में मार्च महीने में राशि डाल दी जाएगी. योजना से किसानों को आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है."
सरकारी योजना का दिख रहा असर: जिला सहायक कृषि अभियंता ने कहा कि "पिछले साल जहां 30000 किसानों को 36 करोड़ रुपए की सहायता दी गई थी, वहीं इस बार 50000 किसानों को 50 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा. इससे किसानों में पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे आधुनिक तरीकों को अपना रहे है. सरकार की इस योजना से किसानों को आर्थिक सहायता मिलने के साथ-साथ खेती में भी सुधार हुआ है. अब किसान पराली जलाने की बजाय उसे खेत में मिलाकर मिट्टी की की उर्वरता बढ़ा रहे हैं, जिससे अगली फसल की पैदावार बेहतर हो रही है."
कैथल में 1.65 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान की खेतीः जिले में इस साल करीब 1.65 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई थी. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों की जागरूकता और सरकारी सहयोग के कारण पराली जलाने की घटनाओं में रिकॉर्ड कमी आई है. सरकार की प्रोत्साहन योजना, सबसिडी पर कृषि यंत्र और किसानों की बढ़ती जागरूकता के कारण यह सकारात्मक बदलाव संभव हुआ है.

