अधर में लटके वन महकमे में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर्स, समान काम के बदले समान वेतन पर शासन करेगा फैसला
उपनल कर्मचारियों को समान काम-सामन वेतन पर वन विभाग ने भी काम शुरू कर दिया है, लेकिन मामला कंप्यूटर ऑपरेटर्स पर फंस रहा है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 29, 2026 at 8:14 PM IST
देहरादून: उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) कर्मियों को समान काम के बदले समान वेतन देने पर तमाम विभागों में होमवर्क जारी है. वन महकमा भी इसी दिशा में कागजी कार्यवाही को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर कुछ ऐसी तकनीकी पेचीदगियां सामने आ गई है, जिसके चलते उन्हें फौरन इसका लाभ मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है. स्थिति यह है कि विभाग ने अब गेंद शासन के पाले में डाल दी है, जिसके बाद वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य शासन के हाथ में है.
वैसे तो अलग-अलग पदों पर काम करने वाले उपनल कर्मचारियों के लिए वन विभाग ने समान काम के बदले समान वेतन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है, लेकिन विभाग के कम्प्यूटर ऑपरेटर के मामले में फिलहाल पेंच फंस रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस पद पर विभाग के भीतर कुछ तकनीकी पेचीदगियां है और इसी वजह से विभाग में इन कर्मचारियों के लिए इस नई व्यवस्था के तहत लाभ पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है.
जानिए कहां फंस रहा मामला: परेशानी यह है कि वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर का ढांचागत रूप से कोई पद ही नहीं है. ऐसे में इन्हें समान काम के बदले समान वेतन किस व्यवस्था के तहत दिया जाए इस पर विचार किया जा रहा है. इसमें कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें लेवल तीन के अनुसार वेतन देने की व्यवस्था बनाई जाए, लेकिन वन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर का कोई ढांचा ही नहीं होने के कारण उन्हें लेवल 3 दिया जाना वन विभाग मुमकिन नहीं मान रहा.
लेवल वन के अनुरुप मिलेगा वेतन: वन विभाग का मानना है कि इसको लेकर पूर्व में ही एक आदेश हो चुका है. आदेश के तहत किसी विभाग में ढांचा स्वीकृत नहीं होने पर ऐसे कर्मचारियों को क्लास 4 यानी लेवल 1 के अनुरूप वेतन दिया जाना सुनिश्चित किया गया है. इसी बात को आगे रखते हुए वन विभाग ने अब इस बात का फैसला शासन पर छोड़ दिया है.
शासन लेगा अंतिम निर्णय: वन विभाग में मानव संसाधन की जिम्मेदारी देख रहे पीके पात्रो कहते हैं कि प्रमुख वन संरक्षक हॉफ की अध्यक्षता में भी इस मामले पर विचार हो चुका है, इसके बाद तमाम नियमों और व्यवस्थाओं के अनुसार चर्चा करते हुए शासन को ही इस पर अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजा गया है.
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