बिहार के इस स्कूल में बच्चों को भेजने के बाद धक-धक करता है माता-पिता का दिल, पास में गहरा तालाब, न बाउंड्री वॉल न सुरक्षा
वैशाली में तालाब किनारे बिना बाउंड्री वाला विद्यालय असुरक्षित है. जर्जर कमरों और अवैध कब्जे के बीच मासूम जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं.

Published : July 9, 2026 at 8:30 AM IST
वैशाली: बिहार के वैशाली से ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने स्कूलों में नौनिहालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी विद्यालयों में प्रत्येक शनिवार को मुख्यमंत्री सुरक्षा कार्यक्रम द्वारा छात्र छात्राओं को आपदाओं के प्रति जागरूक करने वाले विद्यालय जब खुद आपदाओं को आमंत्रित करने वाले बन जाएं तो सवाल उठना लाजमी है. सवाल है ये कि सैद्धांतिक शिक्षा और व्यवहारिक स्थिति के बीच फासला कितना बड़ा है.
पोखर के किनारे संचालित स्कूल: बिहार के वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड स्थित सोन्धो दूल्ह पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय की भौगोलिक स्थिति और बुनियादी संरचना के अभाव के कारण यहां कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है.यह विद्यालय बड़ा सा पोखर के किनारे संचालित हो रहा है. जिसमें सालों भर पानी भरा रहता हैं. विद्यालय में बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों के पोखर में गिरने और डूबने का खतरा हर समय बना रहता है.

स्कूल में बाउंड्री वॉल भी नहीं: यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है. लापरवाही का आलम यह है कि पोखर के किनारे स्थित स्कूल में अब तक बाउंड्री वॉल भी नहीं बनाई गई है, जिस वजह से यहां कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है. विद्यालय में कमरों की संख्या 8 हैं. जिसमें से 2 कमरे बिल्कुल जर्जर हैं. हालात ये हैं कि बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता हैं.

विद्यालय में ढंग का मैदान नदारद: वर्ष 1959 स्थापित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में वर्ग एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. यहां कुल 229 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें 121 छात्र और 108 छात्राएं शामिल हैं. विद्यालय में रोजाना 170 से 180 बच्चे उपस्थित रहते हैं. बच्चों को चेतना सत्र के दौरान गतिविधि करायी जाती हैं. लेकिन विद्यालय में एक ढंग का मैदान न होने के कारण खेल सामग्री होने के बाद भी बच्चे नहीं खेल पाते हैं.

बच्चों की सुरक्षा पर खतरा: दरअसल विद्यालय के चारों ओर बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है. खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. खेलकूद के दौरान या अवकाश के समय बच्चों के पोखर की ओर चले जाने की आशंका बनी रहती है, इन हालातों में बच्चों के अभिभावक भी चिंतित रहते हैं. बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण असमाजिक तत्वों के द्वारा भी विद्यालय की संपत्ति को आए दिन नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
असुरक्षित स्थिति शिक्षण कार्य में बाधा: इन बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापक सोहन कुमार, सहायक ऊषा कुमारी, संगीता कुमारी, खुशबू कुमार, नीति कुमारी, रजनी गुप्ता ,स्वीटी कुमारी, संतोष कुमार, सहित कुल 8 शिक्षक पदस्थापित हैं. सभी शिक्षकों द्वारा बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन विद्यालय की असुरक्षित स्थिति शिक्षण कार्य में भी बाधा बन रही है.

अभिभावकों की मांग: ग्रामीण व अभिभावक शंकर पासवान का कहना है कि हमारे बच्चे भी विद्यालय में पढ़ने जाते है. बच्चों को लेकर चिंता बनी रहती हैं. अगर समय रहते बाउंड्री वॉल का निर्माण नहीं कराया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. सरकार से गुहार लगाते हुए वे कहते हैं कि हमारी बस इतनी मांग है कि स्कूल के चारों तरफ दीवार का निर्माण करा दिया जाए ताकि बच्चे डूबने से और दूसरे किसी खतरे से बचे रहे.
"बच्चों को लेकर चिंता बनी रहती हैं.स्कूल के आस-पास की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है. अगर समय रहते बाउंड्री वॉल का निर्माण नहीं कराया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. हमारी बस इतनी मांग है कि स्कूल के चारों तरफ दीवार का निर्माण करा दिया जाए." - शंकर पासवान, अभिभावक

अनहोनी का डर: विद्यालय के प्रधानाध्यापक सोहन कुमार के मुताबिक उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया. साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें भी वास्तविक स्थिति से रूबरू करवाया है. बावजूद इसके अब तक बाउंड्री वॉल का निर्माण नहीं हो सका है. प्रधानाध्यापक ने कहा कि समस्या का कोई निदान नहीं हुआ. इससे न केवल बच्चों बल्कि अभिभावकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बच्चे जब स्कूल आते हैं तो अभिभावकों के मन में हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए.
"पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया. साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें भी वास्तविक स्थिति से रूबरू करवाया है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. हम आपके माध्यम से मांग करना चाहेंगे कि इस समस्या का स्थाई निराकरण किया जाए."- सोहन कुमार, प्रधानाध्यापक

अधिकारी की स्वीकारोक्ति: मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुशील कुमार ने स्वीकारोक्ति जताते हुए कहा कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय सोन्धो डीह पोखर के पास स्थित हैं और वहां बाउंड्री वॉल भी नहीं है, जिससे बच्चों एवं शिक्षकों को परेशानी है. कोई दुर्घटना ना हो इसके लिए हमने बच्चों को कमरे से होकर आने-जाने की वैकल्पिक व्यवस्था की है.
जल्द ठीक कराने का आश्ववासन: वहीं विद्यालय में खेल के मैदान की सठीक व्यवस्था नहीं होने को लेकर पदाधिकारी ने बताया कि छोटे से ग्राउंड में बच्चे खेलते हैं. निर्माण के लिये विभाग के बड़े अधिकारी को अवगत कराया गया. उसके बाद जेई के द्वारा नापी करायी गई हैं. व्यवस्था को जल्द से जल्द ठीक कराने की कोशिश की जा रही है.

"हां विद्यालय पोखर के पास स्थित हैं और वहां बाउंड्री वॉल भी नहीं है, जिससे बच्चों एवं शिक्षकों को परेशानी है. कोई दुर्घटना ना हो इसके लिए हमने बच्चों को कमरे से होकर आने-जाने की वैकल्पिक व्यवस्था की है. छोटे से ग्राउंड में बच्चे खेलते हैं व्यवस्था को जल्द से जल्द ठीक कराने की कोशिश की जा रही है." - सुशील कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी
इसे भी पढ़ें-
पढ़ने वाले 11.. पढ़ाने वाले 4, सवालों के घेरे में बिहार के इस सरकारी स्कूल का हाल

