विधानसभा में सरकार ने माना 2 सालों में पुलिस हिरासत में 21 लोगों की मौत, 13 मामलों में पुलिस को क्लीन चिट
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शांति धारीवाल ने 24 फरवरी को पूछा था विधानसभा में अतारांकित सवाल.

Published : February 28, 2026 at 2:04 PM IST
जयपुर : राजस्थान सरकार ने माना है कि पिछले 2 साल के शासन में पुलिस हिरासत में 21 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने मौजूदा विधानसभा के बजट सत्र में इसकी जानकारी सदन को दी है, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शांति धारीवाल ने 24 फरवरी को इस संबंध में अतारांकित प्रश्न के जरिए सरकार से जानकारी मांगी थी. शांति धारीवाल ने अतारांकित सवाल के जरिए सरकार से पूछा था कि 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक पुलिस हिरासत में कितने लोगों की मौत हुई है और इस मामले में सरकार ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है, जिस पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि 1 जनवरी 2024 से लेकर 31 दिसंबर 2024 तक प्रदेश में आठ लोगों की पुलिस हिरासत में हुई है जबकि जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 13 मौत हुई है. साल 2024 में हुई आठ मौतों के मामले में पुलिस को क्लीन चिट दी गई है जबकि 2025 में पांच मामलों में पुलिस को क्लीनचीट दी गई है जबकि 9 मामलों में जांच अभी जारी है.
साल 2024 में हुई आठ मौतों में पुलिस को क्लीन चिट : सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक कुल आठ मौतें हुई हैं, जिनमें जांच के बाद सभी मौतों के मामले में पुलिस की कोई भूमिका नजर नहीं आई है. जांच में किसी को भी दोषी नहीं पाया गया है. सरकार के मुताबिक 23 मार्च 2024 को जैसलमेर के तनोट थाना में मोहम्मद दुलाल की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी जांच में उसकी मौत हार्ट अटैक से होने पाया गया, इसलिए पुलिस को क्लीन चिट दी गई है. 4 अप्रैल 2024 को चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी थाने में उंकार की मौत हुई थी न्यायिक जांच में पुलिस की लापरवाही नहीं मानी गई. 17 अप्रैल 2024 को लालसोट थाने में मनोज उर्फ गीला की मौत हुई थी इसमें केवल संतरी राकेश कुमार की लापरवाही सामने आई है, इसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही होगी. इसी तरह 25 अप्रैल 2024 को मुकेश की मांडल थाने में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. इसमें भी पुलिस की कोई लापरवाही सामने नहीं आई है.
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24 अप्रैल 2024 को राकेश की ब्यावर के जैतारण थाने में मौत हो गई थी, जांच में पुलिस की कोई भूमिका संदिग्ध नजर नहीं आई. वहीं 29 मई 2024 को झुंझुनू जिले के मंड्रेला थाने में कुमार गौरव की मौत हुई थी, जांच में उसकी मौत लू लगने से बताई गई है. 4 अक्तूबर 2024 को फलोदी जिले के देचू थाने में फूल सिंह की मौत हुई थी इसमें भी किसी पुलिस कर्मचारी अधिकारी को दोषी नहीं माना गया है. 5 दिसंबर 2024 को श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ पुलिस स्टेशन में नरेश नरसी ने आत्महत्या की थी, यहां भी जांच में कोई पुलिस अधिकारी कर्मचारी दोषी नहीं पाया गया.
साल 2025 में इन मामलों में भी क्लीन चिट :-
- 16 फरवरी 2025 को टोंक के देवली थाने में उमराव ने आत्महत्या की थी यहां उसकी मृत्यु हार्ट अटैक से बताई गई है.
- 16 जून 2025 को दौसा जिले के बसवा थाने में गुड्डू ने आत्महत्या की थी न्यायिक जांच में पुलिस को जिम्मेदार नहीं माना गया.
- 10 अगस्त 2025 को राजसमंद जिले के कांकरोली थाने में खूबचंद सोनी ने आत्महत्या की थी न्यायिक जांच में मृतक की मौत का कारण हृदय घात को बताया गया.
- 15 अगस्त 2025 को पाली जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र में विक्रम सिंह की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी इसमें भी पुलिस को क्लीन चिट दी गई है.
हिरासत में हुई इन मौतों के मामलों की जांच जारी :-
- पप्पू मीणा - 14 अप्रैल 2025,थाना खेतड़ी
- हरीश - 8 मई 2025, थाना छीपाबड़ौद
- बलदेव सिंह- 27 दिसंबर 2025, थाना हिंदू मलकोट श्रीगंगानगर
- दिलीप - 30 सितंबर 2025,थाना दोबड़ा, डूंगरपुर
- सुरेश पंचाल - 4 अगस्त 2025 थाना ऋषभदेव उदयपुर
- लोकेश सुमन- 28 जुलाई 2025, थाना किशनगंज बारां
- मनीष पांडे - 21 जून 2025, थाना सदर जयपुर
- मोहन सिंह -7 जून 2025 थाना राजियासर, जिला श्रीगंगानगर
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