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फरीदाबाद में 93 करोड़ की लागत से बने नर्सिंग कॉलेज, लेकिन उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हुई पढ़ाई, आखिर कौन है जिम्मेदार?

करीब एक साल पहले सीएम नायब सैनी ने फरीदाबाद के दो नर्सिंग कॉलेजों की बिल्डिंग का उद्घाटन किया, लेकिन आज भी ये बंद पड़ी हैं.

FARIDABAD NURSING COLLEGE BUILDING
FARIDABAD NURSING COLLEGE BUILDING (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 26, 2026 at 12:39 PM IST

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Updated : August 26, 2026 at 4:04 PM IST

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फरीदाबाद: ग्रामीण इलाकों में नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फरीदाबाद में दो सरकारी नर्सिंग कॉलेज बनाए गए. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दोनों भवनों का उद्घाटन भी कर दिया. एक साल बीत जाने के बाद भी दोनों भवन खाली पड़े हैं. दयालपुर और अरुआ गांव में तैयार इन दोनों संस्थानों की इमारतों पर करीब 93 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं.

उद्घाटन के बाद भी बंद पड़े सरकारी नर्सिंग कॉलेज: करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है. भवन तैयार होने के बाद भी इन्हें संबंधित विभाग द्वारा औपचारिक रूप से अपने अधीन नहीं लिया गया है. टेकओवर की प्रक्रिया लंबित होने के कारण करोड़ों रुपये की लागत से तैयार बुनियादी ढांचा फिलहाल इस्तेमाल से बाहर है.

देखें संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट (ETV Bharat)

आठ साल पहले बनी थी योजना: दयालपुर और अरुआ में नर्सिंग कॉलेज स्थापित करने की योजना को वर्ष 2018 में मंजूरी मिली थी. दयालपुर कॉलेज की मांग तत्कालीन पृथला विधायक टेकचंद शर्मा ने रखी थी, जबकि अरुआ में कॉलेज बनाने की मांग केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की ओर से की गई थी. दोनों परियोजनाओं का निर्माण हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को सौंपा गया था. कोरोना महामारी के दौरान निर्माण कार्य प्रभावित हुआ, जिसके चलते परियोजनाओं को पूरा होने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा.

दोनों कॉलेजों पर करीब 93 करोड़ रुपये की आई लागत: वर्ष 2025 में दोनों भवन तैयार कर दिए गए. दयालपुर स्थित कॉलेज के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये और अरुआ कॉलेज पर लगभग 47.44 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई है. दोनों संस्थान शुरू होने के बाद हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को नर्सिंग शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना है.

FARIDABAD NURSING COLLEGE BUILDING
सफेद हाथी साबित हो रही नर्सिंग कॉलेज की बिल्डिंग (Etv Bharat)

दयालपुर कॉलेज में हॉस्टल की भी व्यवस्था: दयालपुर में तैयार भवन में करीब 48 कमरे और 6 भवन शामिल हैं. यहां लगभग 208 विद्यार्थियों के रहने के लिए हॉस्टल की सुविधा भी विकसित की गई है. ऐसे में संस्थान शुरू होने के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रहने की सुविधा भी मिल सकेगी.

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करीब एक साल से विरान पड़ी है नर्सिंग कॉलेज की बिल्डिंग (ETV Bharat)

शुरु हुए तो ग्रामीण विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा फायदा: फरीदाबाद के ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी नर्सिंग शिक्षा के सीमित विकल्प होने के कारण इन कॉलेजों के शुरू होने का स्थानीय विद्यार्थियों को काफी फायदा मिल सकता है. फिलहाल एनआईटी क्षेत्र में उपलब्ध नर्सिंग कॉलेज कई ग्रामीण इलाकों से काफी दूरी पर है. बल्लभगढ़ और पृथला क्षेत्र के विद्यार्थियों को नर्सिंग शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं निजी संस्थानों में पढ़ाई का खर्च अधिक होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के सामने भी परेशानी रहती है. यदि दयालपुर और अरुआ के कॉलेज शुरू होते हैं तो आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के नजदीक सरकारी संस्थान में नर्सिंग की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा.

FARIDABAD NURSING COLLEGE BUILDING
देखरेख के अभाव में बड़ी-बड़ी घास उग गई है. (ETV Bharat)

आसपास के दर्जनों गांवों को मिलेगा फायदा: अरुआ कॉलेज से साहूपुरा, फैजपुर खादर, शाहजहांपुर, चांदपुर, इमामुद्दीनपुर, मोठूका, कोराली और छायंसा समेत आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इसी तरह दयालपुर कॉलेज से खुंद जेहेड़ा, अटाली, पन्हेड़ा, गढ़खेड़ा, हीरापुर, नरियाला, बढ़क, फतेहपुर बिल्लौच, सोतई, चंदावली और मच्छगर सहित आसपास के कई गांवों के छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो सकते हैं.

FARIDABAD NURSING COLLEGE BUILDING
आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं दोनों भवन (ETV Bharat)

करोड़ों खर्च, फिर भी कक्षाएं शुरू नहीं: सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दोनों संस्थानों की इमारतें तैयार हो चुकी हैं और उनका उद्घाटन भी कराया जा चुका है, तो फिर पढ़ाई शुरू करने में देरी क्यों हो रही है? विभागीय टेकओवर नहीं होने के कारण ना तो विद्यार्थी दाखिला लेकर पढ़ाई शुरू कर पा रहे हैं और ना ही इन भवनों का उद्देश्य पूरा हो रहा है.

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नर्सिंग बिल्डिंग में एसी भी लगे हैं. (ETV Bharat)

कैबिनेट मंत्री बोले- जल्द शुरू होंगी क्लास: मामले को लेकर राज्य मंत्री राजेश नागर ने कहा कि कॉलेज किस स्तर पर लंबित हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से बातचीत कर दोनों संस्थानों में जल्द कक्षाएं शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा.

कांग्रेस विधायक विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा: वहीं पृथला से कांग्रेस विधायक सुखबीर सिंह तेवतिया ने इसे सरकारी व्यवस्था की विफलता बताया. उनका कहना है कि जब भवन तैयार है तो विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि जल्द कॉलेज चालू नहीं किए गए तो वो इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे.

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दोनों संस्थानों की इमारतों पर करीब 93 करोड़ रुपये खर्च (ETV Bharat)

टेकओवर नहीं मिलने की वजह से विरान पड़ी दोनों कॉलेजों की बिल्डिंग: फिलहाल करोड़ों रुपये की लागत से तैयार दोनों भवन विद्यार्थियों की राह देख रहे हैं और ये सवाल बना हुआ है कि आखिर विभागीय प्रक्रिया कब पूरी होगी और ग्रामीण क्षेत्र के इन दोनों नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई कब शुरू होगी.

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Last Updated : August 26, 2026 at 4:04 PM IST