राजस्थान विधानसभा में हंगामा: खाद संकट से लेकर सीवरेज प्लांट तक उठे मुद्दे, कांग्रेस का वॉकआउट
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को प्रश्नकाल में खाद संकट छाया रहा, जिसका मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने मुखर होकर जवाब दिया.

Published : February 20, 2026 at 2:12 PM IST
जयपुर: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को प्रश्नकाल जमकर हंगामेदार रहा. खाद वितरण व्यवस्था, शिक्षक भर्ती, पेयजल ढांचे और सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराया गया. सबसे अधिक आक्रामक रुख कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का रहा, जिन्होंने न सिर्फ सवालों के जवाब दिए, बल्कि पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए मौजूदा सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं. वहीं, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया.
प्रश्नकाल की शुरुआत में टोडाभीम के विधायक घनश्याम मेहर ने मिलावटी खाद और बीज के मामले में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने यूरिया और डीएपी की उपलब्धता, केंद्र को भेजी गई मांग और किसानों को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई. विधायक ने आरोप लगाया कि किसानों को खाद के लिए लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जबकि निजी डीलरों के पास खाद उपलब्ध रही और कालाबाजारी के मामले सामने आए. इस पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में यूरिया और डीएपी की कोई समग्र कमी नहीं रही. उन्होंने बताया कि लंबे मानसून, अक्टूबर में दो बार हुई बारिश और बढ़े हुए बुवाई क्षेत्र के कारण खाद की मांग अचानक बढ़ गई थी. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2024-25 में यूरिया की 26.20 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 29.29 लाख मीट्रिक टन का आवंटन मिला, जो मांग से अधिक है.
पढ़ें: विधानसभा में कोरम पर सख्त हुए स्पीकर वासुदेव देवनानी, पक्ष-विपक्ष को दी हिदायत
पिछली सरकार पर निशाना: मंत्री मीणा ने सदन में पिछली सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले शासनकाल में लोगों की आदतें बिगड़ गई थीं, चाहे रिटेलर्स हों या ट्रेडर्स. उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के समय में नकली खाद और बीज के खिलाफ सिर्फ 20 एफआईआर दर्ज हुई थीं, जबकि मौजूदा सरकार ने इस बार 107 एफआईआर दर्ज की हैं. उन्होंने बताया कि अब तक 11,938 निरीक्षण किए गए, 765 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 169 लाइसेंस निलंबित और 146 लाइसेंस रद्द किए गए. मंत्री ने बताया कि नकली खाद-बीज बनाने वाली 27 फैक्ट्रियों को सील किया गया है. 28 मामलों में गिरफ्तारी हुई है, 16 मामलों में कोर्ट में चालान पेश किए गए हैं और 21 मामलों में अग्रिम जमानत दी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नकली खाद-बीज और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ जल्द ही सख्त कानून लाने पर काम कर रही है.
सेल्फी की चर्चा:इसी बीच सदन की कार्यवाही के दौरान एक अलग दृश्य भी चर्चा में रहा. जब मंत्री प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे, उसी समय मांडलगढ़ से विधायक गोपाल खंडेलवाल अपने मोबाइल फोन से सेल्फी लेते दिखाई दिए. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिस पर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं.
70 हजार से अधिक रिक्तियों का मुद्दा : धरियावद से विधायक थावरचंद ने प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने विषयवार रिक्तियां और भर्ती की समय सीमा पूछी. इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पिछली सरकार ने 6,264 विद्यालयों का क्रमोन्नयन तो किया, पर 50 हजार पद सृजित नहीं किए. वर्तमान सरकार ने 2,202 पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है और 3,225 पदों की भर्ती 2025 में निकाली गई है. उन्होंने दावा किया कि अब तक 72 हजार पद भरे जा चुके हैं और शेष पद चरणबद्ध तरीके से भरे जाएंगे. कांग्रेस विधायक रामकेश ने भाजपा के संकल्प पत्र का हवाला देते हुए एक वर्ष में सभी रिक्तियां भरने के वादे पर सवाल उठाया.
गोदामों की स्वीकृतियां जारी : प्रश्नकाल में अजमेर जिले के नसीराबाद क्षेत्र की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के भवन और गोदाम निर्माण का मुद्दा उठा. विधायक रामस्वरूप लांबा ने कहा कि कई समितियों के पास न अपना भवन है न गोदाम, जिससे संचालन प्रभावित हो रहा है. उन्होंने निर्माण की समयसीमा और कार्ययोजना पूछी. सहकारिता राज्य मंत्री गौतम दक ने जवाब दिया कि निर्माण के लिए भूमि उपलब्धता, केंद्रीय सहकारी बैंक की अनुशंसा और बजट जरूरी है. पांच समितियों में से चार के पास भूमि नहीं है, जबकि एक के प्रस्ताव पर नियमानुसार विचार संभव है.
सदन से वॉक आउट: : जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने जहाजपुर सहित अन्य कस्बों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति और पीपीपी मॉडल पर संचालन को लेकर सवाल उठाया. इस पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार स्टेट सीवरेज एवं वेस्ट वॉटर पॉलिसी 2025 के तहत पीपीपी मॉडल पर एसटीपी संचालित करने पर विचार कर रही है. उन्होंने बताया कि फिजिबिलिटी के लिए सीवरेज नेटवर्क और प्रति हेक्टेयर 100 प्रतिशत आबादी घनत्व जैसे मापदंड तय हैं, जिन्हें कई कस्बे पूरा नहीं करते. मंत्री ने कहा कि 298 शहरों में वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट के कार्य प्रस्तावित हैं और बजट घोषणा में ट्रीटमेंट प्लांट को शामिल किया गया है. जहाजपुर समेत अन्य शहरों को भी चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाएगा. जहाजपुर में पट्टा निरस्तीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी ने गलत पट्टा जारी किया है तो उसे निरस्त कर संबंधित के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
कांग्रेस विधायक रामकेश ने केंद्र और राज्य की योजनाओं तथा समयसीमा पर सवाल किया. मंत्री ने जवाब में कहा कि भारत सरकार की अमृत योजना 1.0 और 2.0 के तहत स्वीकृत सभी परियोजनाएं समय पर पूरी की जाएंगी. टेंडर शर्तों में ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का प्रावधान है. उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व में कई शहरों में इनलेट-आउटलेट की तकनीकी खामियों के कारण संचालन प्रभावित हुआ, जिसे अब सुधारने के प्रयास सफल रहे हैं.
उपनेता को लेकर सदन में नोकझोंक : पूरक प्रश्न को लेकर सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. प्रतिपक्ष के उपनेता रामकेश मीणा ने एक प्रश्न पर पूरक पूछने के लिए खड़े हुए तो सरकार के सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने आपत्ति जता दी. गर्ग ने कहा कि रामकेश मीणा उपनेता हैं, नेता प्रतिपक्ष नहीं, इसलिए हर प्रश्न पर खड़े होकर पूरक पूछना उचित नहीं है. इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने उपनेता को पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दे दी है. बावजूद इसके गर्ग ने अपनी बात दोहराते हुए पूर्व की परंपराओं का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि जब गुलाबचंद कटारिया नेता प्रतिपक्ष थे और राजेंद्र राठौड़ उपनेता थे, तब भी हर पूरक प्रश्न पर खड़े होने की अनुमति नहीं होती थी, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में. गर्ग ने तीखे अंदाज में कहा कि 'आप भी नेता प्रतिपक्ष नहीं हो, जो हर सवाल पर खड़े हो जाते हो. उपनेता हैं, इसलिए हर प्रश्न पर पूरक से बचें.' इस पर अध्यक्ष देवनानी ने दो टूक कहा कि उन्होंने आज उपनेता को अनुमति दे दी है और वही अंतिम निर्णय है.

