गोरखपुर: हॉस्पिटल संचालक से लाइसेंस बचाने के नाम पर 15 लाख की ठगी
न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में बैक्टीरियल इन्फेक्शन से नौ मरीजों को अपनी आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी थी

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 5:49 PM IST
गोरखपुर: गोरखपुर के सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल का लाइसेंस बहाल कराने को लेकर संचालक डॉक्टर राजेश राय से 15 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है. बीते दिनों न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में बैक्टीरियल इन्फेक्शन से नौ मरीजों को आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी थी, जबकि नौ को आंखें निकलवानी पड़ी थी, इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएमओ डॉ. राजेश झा ने हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया था.
अब इस मामलें में एक नया मोड़ सामने आया है, अस्पताल संचालक डॉक्टर राजेश राय के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार की डीपी लगी एक मोबाइल नंबर से उन्हें कॉल आया, कॉल करने वाला व्यक्ति ने स्वयं को मुख्यमंत्री का OSD बताया और मामले को 15 लाख में रफा दफा कराने की बात कही.
कुछ दिनों बाद दो लोग गोरखपुर पहुंचे, उनमें से एक का नाम गोल्डन बाबा बताया जाता है, जिसने संचालक को बताया कि दो दिन पहले वह सीएमओ गोरखपुर से मिला था. साथ ही यह भी बताया कि मामला 15 लाख में मैनेज होगा.
राजेश राय 28 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे 15 लाख रुपये लेकर सीएमओ कार्यालय स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे. वहां एक व्यक्ति ने उनसे झोला लिया, लेकिन उसी दिन शाम को अस्पताल का लाइसेंस निरस्तीकरण पत्र जारी हो गया.
इस मामले के खुलासे के बाद सीएमओ डॉक्टर राजेश झा ने पेंट थाने में एक तहरीर दी है, उसमें उन्होंने लिखा है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मोबाइल नंबर 8419022640 से कुछ लोगों को फोन करके मेरे नाम पर धन उगाही का प्रयास किया जा रहा है. जबकि उनका यह नंबर नहीं है. उन्होंने इस नंबर और उसको संचालित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग प्रभारी निरीक्षक से किया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी है.
बता दें कि, जिले के सिकरीगंज कस्बा स्थित न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में एक फरवरी को गोरखपुर और पड़ोसी जिले के कुल 30 मरीजों ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था. 4 फरवरी के बाद करीब 18 मरीज के आंखों में इंफेक्शन हो गया. आनन-फानन में कुछ का इलाज गोरखपुर में शुरू हुआ. लेकिन हालत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली एम्स, गोरखपुर एम्स और BHU ले जाया गया. जिसमें नौ मरीजों की आंखों की स्थिति इतनी बिगड़ी कि उनकी आंखें निकालने पड़ी. नौ मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई. इस मामले में जिलाधिकारी स्तर से मजिस्ट्रेटियल जांच की गई. जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने का निर्णय लिया गया था.
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