सोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: एक साल में 75% और 250% की ऐतिहासिक उछाल, जानिए कारण
पिछले एक साल में सोने-चांदी के दाम ने आसमान छू लिया है. जानिए किन कारणों से भाव में तेजी आई है...

Published : January 3, 2026 at 7:31 PM IST
भरतपुर : सोना और चांदी एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश के रूप में स्थापित हुआ है. बीते एक साल में कीमती धातुओं की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी ने न केवल निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि निवेश विकल्पों की दिशा भी बदल दी है. जनवरी 2025 से अब तक सोने में करीब 75 प्रतिशत और चांदी में लगभग 250 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस उछाल के पीछे वैश्विक मांग, सोलर और इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी में बढ़ता उपयोग सबसे बड़े कारण माने जा रहे हैं.
एक साल में कहां से कहां पहुंची कीमतें : भरतपुर के सर्राफा व्यापारी शैलेन्द्र गोयल श्रीजी ने बताया कि जनवरी 2025 में सोना करीब 78 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था. आज वही सोना बढ़कर करीब 1 लाख 38 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) तक पहुंच चुका है. इसी तरह चांदी, जो एक साल पहले 90 हजार रुपए प्रति किलो के आसपास बिक रही थी, अब 2 लाख 40 हजार रुपए प्रति किलो के स्तर को छू चुकी है.
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सोने की चमक के पीछे ये हैं वजहें : शैलेन्द्र गोयल बताते हैं कि सोने में आई तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना है. डॉलर के कमजोर होते ही अंतरराष्ट्रीय निवेशक गोल्ड की ओर रुख करते हैं. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसे हालात, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है. ऐसे माहौल में सोना हमेशा सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता है.
गोयल का कहना है कि महंगाई के दौर में मुद्रा का मूल्य घटता है, जबकि सोना लंबे समय तक अपनी कीमत बनाए रखता है. यही कारण है कि निवेशक सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं. आने वाले दिनों में भी सोने की कीमतों में मजबूती बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि बीच-बीच में हल्का करेक्शन संभव है.

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चांदी : टेक्नोलॉजी बनी गेम-चेंजर : चांदी में आई 250 प्रतिशत की उछाल ने बाजार को सबसे ज्यादा चौंकाया है. यह तेजी केवल निवेश की वजह से नहीं, बल्कि बदलती टेक्नोलॉजी का सीधा असर है. शैलेन्द्र गोयल ने बताया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और नई इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है. व्यापारी राजकुमार तिलकधारी का कहना है कि दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है. इलेक्ट्रिक कारों, चार्जिंग सिस्टम, बैटरियों और सोलर उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. चीन, जापान और अमेरिका जैसे बड़े औद्योगिक देशों में इस वजह से चांदी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है.

निवेशकों का भरोसा धातुओं पर कायम: व्यवसायी राजकुमार तिलकधारी का कहना है कि सोना और चांदी दोनों ही धातुओं पर लोगों का भरोसा हमेशा से रहा है. जरूरत पड़ने पर इन्हें बेचकर तुरंत नकदी हासिल की जा सकती है, जो किसी भी निवेश के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग के चलते घरेलू बाजार में भी भाव लगातार ऊपर जा रहे हैं.
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सोना: परंपरा भी, सुरक्षा भी : राजकुमार तिलकधारी ने बताया कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा भी है. शादी-विवाह और त्योहारों में सोने की खरीद को शुभ माना जाता है. महिलाओं के लिए सोने के गहने सामाजिक और भावनात्मक महत्व रखते हैं. इसी वजह से जब भी आर्थिक संकट या अनिश्चितता बढ़ती है, भारतीय बाजार में सोने की मांग अपने आप बढ़ जाती है.

जमीन से हटकर सोना-चांदी की ओर रुझान : राजकुमार तिलकधारी का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों की सोच बदल रही है. जमीन और प्रॉपर्टी में निवेश लंबी अवधि, कानूनी प्रक्रियाओं और बड़ी पूंजी से जुड़ा होता है, जबकि सोना-चांदी तुरंत खरीदे और बेचे जा सकते हैं. इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अब जमीन की बजाय सोना और चांदी में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं. कुल मिलाकर, सोना और चांदी की कीमतों में आई यह ऐतिहासिक तेजी सिर्फ बाजार के आंकड़े नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, कमजोर होती मुद्राओं और नई टेक्नोलॉजी की कहानी भी कहती है. मौजूदा हालात में ये दोनों धातुएं निवेशकों के लिए न सिर्फ परंपरा, बल्कि सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी हैं.

