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कभी नक्सलियों का ट्रेनिंग कैंप थी गोगुंडा पहाड़ी, आजादी के बाद अब पहुंची बिजली, गांव में रोशनी के साथ उम्मीदों का नया सवेरा

नक्सलियों का सेफ जोन और सुरक्षाबलों के लिए लंबे समय तक 'NO GO' जोन रहे गोगुंडा में कैंप स्थापना के बाद तस्वीर बदल रही है.

Gogunda village electricity
गांव में रोशनी के साथ उम्मीदों का नया सवेरा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 24, 2026 at 4:54 PM IST

5 Min Read
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नवीन कश्यप की रिपोर्ट

सुकमा: दक्षिण बस्तर के घने जंगलों और लगभग 650 मीटर ऊंची खड़ी पहाड़ी पर बसा गोगुंडा अब रोशन होने लगा है. जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था, सूरज ढलने के बाद जैसे जीवन भी थम जाता था. उस गांव में अब बिजली आ गई है. गोगुंडा वर्षों तक नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहा. नक्सल वारदातों के अलावा भौगौलिक चुनौतियां भी रहीं इसके बावजूद वहां की तस्वीर बदलने लगी है. देखिए ये खास रिपोर्ट-

अंधेरे में बीते चार दशक

गोगुंडा की पहचान लंबे समय तक उसकी दुर्गमता और असुरक्षा रही. ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां, घने जंगल और गहरी घाटियां यहां तक पहुंचना आज भी चुनौती है. बरसात में रास्ते पूरी तरह कट जाते हैं. चार दशकों तक यह क्षेत्र नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा. इसे नक्सलियों का ट्रेनिंग कैंप भी कहा जाता था. आसपास कई घटनाएं और मुठभेड़ों की खबरें आती रहीं. शाम होते ही घरों में ढिबरी और लालटेन जलती थी. मिट्टी के तेल की धुंधली रोशनी में बच्चे पढ़ने की कोशिश करते, महिलाएं धुएं में खाना बनातीं और हर आहट पर चौकन्नी रहतीं. सांप-बिच्छुओं और जंगली जानवरों का डर अलग बना रहता था.

गांव में रोशनी के साथ उम्मीदों का नया सवेरा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कैंप आया, विश्वास लाया

स्थिति में बड़ा बदलाव तब आया, जब क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 74वीं बटालियन की तैनाती हुई. सुरक्षा बलों की मौजूदगी से विश्वास का माहौल बना. जिला पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयासों से गोगुंडा तक सड़क निर्माण संभव हुआ. सड़क पहुंचते ही विकास की पहली मजबूत नींव रखी गई. इसके बाद प्रशासन ने स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन दुकान और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की. सबसे बड़ी उपलब्धि रही गांव तक बिजली पहुंचाना.

कैंप आने से पहले यहां कुछ नहीं था. अब सड़क बनी है जिसके बाद बिजली भी आ गई हमें बहुत खुशी है- माड़वी सुक्का, ग्रामीण

जब पहली बार जले बल्ब

जिस दिन ट्रांसफॉर्मर से सप्लाई शुरू हुई और घरों में पहली बार बल्ब जले, वह पल पूरे गांव के लिए ऐतिहासिक था. बच्चे खुशी से उछल पड़े.महिलाओं ने एक-दूसरे को बधाई दी.बुजुर्गों की आंखों में आंसू थे. वृद्ध ग्रामीण माड़वी सुक्का ने भावुक होकर कहा हमने सोचा नहीं था कि अपने जीवन में गांव में बिजली देख पाएंगे. आज लग रहा है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है. उस रात गांव देर तक जागता रहा. लोग घरों से बाहर निकलकर रोशनी को निहारते रहे, जैसे कोई सपना सच हो गया हो.

Gogunda village electricity
गोगुंडा में कैंप स्थापना के बाद तस्वीर बदल रही (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

शिक्षा और स्वास्थ्य की नई उम्मीद

बिजली आने से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधाएं बेहतर होंगी. भविष्य में डिजिटल कक्षाओं की संभावना भी बढ़ेगी. स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार की उम्मीद है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली होने से इलाज बेहतर होगा. रात के समय आपात स्थिति में रोशनी उपलब्ध रहना बड़ी राहत है.

Gogunda village electricity
सड़क के साथ अब बिजली पहुंची, रोशन हुआ गांव (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

गोगुंडा में बिजली पहुंचना केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत है. हमारा लक्ष्य है कि जिले के अंतिम छोर तक विकास पहुंचे. सड़क और बिजली के बाद अब प्रशासन सुशासन परिसर की स्थापना कर रहा है जिसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य पर जोर दे रहे हैं.-अमित कुमार, कलेक्टर सुकमा

बदलती शाम, बदलता भविष्य

अब गोगुंडा में शाम का मतलब डर नहीं, उजाला है. पहले जहां सूरज ढलते ही गांव सिमट जाता था, अब गलियों में हल्की रौनक दिखती है. बच्चे रोशनी में पढ़ रहे हैं, युवा मोबाइल चार्ज कर ऑनलाइन जानकारी ले रहे हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल शिक्षा की बात हो रही है. महिलाओं के लिए भी बड़ा बदलाव आया है. सिलाई-बुनाई और अन्य घरेलू कार्य रात में भी आसानी से हो पा रहे हैं.

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गोगुंडा में उम्मीदों का नया सवेरा ही नहीं नयी शाम भी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं. क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत होने के बाद ही यह संभव हो पाया है. हमारा प्रयास है कि गोगुंडा जैसे हर संवेदनशील इलाके में शांति और विश्वास का माहौल कायम रहे.- रोहित शाह, एएसपी

संघर्ष करता गांव बदलाव का प्रतीक बन चुका है. पहाड़ियों के बीच चमकती रोशनी यह संदेश देती है कि सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलें, तो सबसे कठिन क्षेत्र भी मुख्यधारा से जुड़ सकता है. गोगुंडा की यह रोशनी सिर्फ बिजली की नहीं यह विश्वास की रोशनी है.

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