लाहौल घाटी में पहाड़ी से गिरा ग्लेशियर, चंद्रा नदी तक पहुंचा बर्फीला तूफान, बाल-बाल बचे कई गांव
एवलांच का मलबा सीधे चंद्रा नदी तक जा पहुंचा, जबकि बर्फीली हवा का प्रभाव कई गांवों तक दिखाई दिया.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 3:51 PM IST
लाहौल स्पीति: जिला लाहौल स्पीति में अब मौसम साफ होने के बाद पहाड़ी से ग्लेशियर गिरने का भी खतरा पड़ गया है. शनिवार शाम के समय भी लाहौल घाटी में यानदे गंग हिमनद (ग्लेशियर) का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा. घाटी के गोंदला क्षेत्र के ठीक सामने पीर पंजाल की ऊंची चोटी पर स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने इस हिमनद का टूटा हिस्सा चंद्रा नदी तक पहुंच गया. एवलांच से उठा बर्फीला तूफान नदी के पार रालिंग, खंगसर, जांगला और मूर्तिचा गांवों तक महसूस किया गया.
लाहौल में ग्लेशियर टूटा
हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ग्लेशियर गिरने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार एवलांच का मलबा सीधे चंद्रा नदी तक जा पहुंचा, जबकि बर्फीली हवा का प्रभाव कई गांवों तक दिखाई दिया.
चंद्रा नदी तक पहुंचा बर्फीला तूफान
गोंदला पंचायत के प्रधान सूरज ठाकुर ने बताया कि, "शनिवार को यानदे गंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर हिमस्खलन के रूप में नीचे आ गिरा. एवलांच से उठा बर्फीला तूफान नदी के पार रालिंग, खंगसर, जांगला और मूर्तिचा गांवों तक महसूस किया गया. घाटी में इस तरह के एवलांच सामान्य घटनाएं मानी जाती हैं, विशेषकर मौसम में बदलाव के दौरान."

लगातार टूटते हिमखंड से बढ़ी चिंता
वहीं, विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि हालिया बर्फबारी के बाद तापमान में बढ़ोतरी के चलते हिमनद का हिस्सा अस्थिर हो गया, जिससे यह घटना हुई है. हालांकि, इस बार कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन लगातार टूटते हिमखंडों से घाटी में ग्लेशियरों का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने की चिंता भी बढ़ रही है.
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