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मॉडर्न टेक्नोलॉजी से होगी ग्लेशियर झीलों की मॉनिटरिंग, अलर्ट मोड पर आपदा प्रबंधन तंत्र

ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे पर अब हाईटेक तकनीक के जरिए नजर रखने की तैयारी की जा रही है.

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ग्लेशियर झीलों की निगरानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 30, 2026 at 4:37 PM IST

5 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए अब उनकी निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी है. ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार और अन्य बदलावों पर रियल टाइम नजर रखने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर समय रहते लोगों को अलर्ट करने की व्यवस्था भी मजबूत होगी. वहीं लगातार बारिश को देखते हुए राज्यभर में आपदा प्रबंधन तंत्र को 24×7 अलर्ट मोड पर रखा गया है. यात्रा संचालन भी मौसम और सड़क की वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाएगा.

उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन और लगातार बदलती हिमालयी परिस्थितियों के बीच ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे पर अब हाईटेक तकनीक के जरिए नजर रखने की तैयारी की जा रही है. राज्य में मौजूद ग्लेशियर झीलों की स्थिति, जलस्तर और उनमें होने वाले बदलावों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीक का उपयोग किए जाने की संभावना पर काम होगा. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा.

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में रविवार को ग्लेशियर झीलों की स्थिति और उनसे जुड़े संभावित जोखिम की समीक्षा की गई. उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियरों एवं ग्लेशियर झीलों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी को जरूरी माना गया है. खासतौर पर झीलों के जलस्तर, आकार, जलभराव और अन्य असामान्य बदलावों की लगातार निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया.

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों का आकार बढ़ने या जलस्तर में अचानक परिवर्तन जैसी परिस्थितियां भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती हैं. ऐसे में समय रहते संभावित खतरे की पहचान और प्रभावित क्षेत्रों तक चेतावनी पहुंचाना आपदा प्रबंधन की बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने के साथ ही संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने की तैयारी है.

जहां आवश्यकता होगी, वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित कर किसी भी असामान्य स्थिति की समय रहते जानकारी जुटाने और संभावित प्रभावित आबादी को पहले से सतर्क करने की व्यवस्था की जाएगी. आधुनिक तकनीक के उपयोग से दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों में स्थित ग्लेशियर झीलों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की संभावना है.

बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की भी समीक्षा की गई. राज्यभर में नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों के साथ बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली गई. मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों के लिए आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रखा गया है.

भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और बार-बार सड़क अवरुद्ध होने वाले स्थानों पर पहले से पर्याप्त मशीनरी और तकनीकी दल तैनात करने पर भी जोर दिया गया है. ऐसी जगहों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखे जाएंगे, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई कर यातायात बहाल किया जा सके.

जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी के लिए पंप और अन्य उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही बिजली, पेयजल और संचार जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने पर अतिरिक्त टीमों को तत्काल मौके पर भेजने और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू करने पर भी फोकस रहेगा.

दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति को देखते हुए खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से करने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मानी गई है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के बीच समन्वय के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा जाएगा.

यात्रा संचालन को लेकर भी मौसम और मार्गों की वास्तविक स्थिति को प्राथमिक आधार बनाने पर जोर है. अत्यधिक बारिश या सड़क बंद होने जैसी परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और हालात सामान्य होने के बाद ही आगे की यात्रा की अनुमति दी जाएगी. आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने इस संदर्भ में अधिकारियों की बैठक लेते हुए उनसे अब तक की तैयारी का ब्यौरा भी लिया, और आगामी कार्यों पर भी चर्चा हुई.

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