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जीआईएस मैपिंग के जरिये ड्रग फ्री होगा देहरादून, एक्शन प्लान तैयार, जानिये पूरी योजना

देहरादून में ड्रग्स पैडलरों और संवेदनशील क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग कराई जाएगी. जिससे दून को ड्रग फ्री करने में मदद मिलेगी.

DRUG FREE DEHRADUN GIS MAPPING
ड्रग्स अपराध जीआईएस मैपिंग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 6, 2026 at 1:30 PM IST

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Updated : June 6, 2026 at 1:42 PM IST

3 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड को नशा मुक्त करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. वहीं, देहरादून में कई ऐसे ड्रग्स पैडलर हैं जो अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं. अब जिला प्रशासन में नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है. नशे को नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए जिलाधिकारी ने ड्रग पैडलर्स और संवेदनशील क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग कराने का निर्णय लिया है.

देहरादून जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करते हुए जीआइएस यानी जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आधारित मैपिंग शुरू करने का निर्णय लिया है. इसका उद्देश्य जिले के संवेदनशील क्षेत्रों और नशे के संभावित नेटवर्क की सटीक पहचान करना है. जिला प्रशासन का मानना है कि ऑनलाइन और वैज्ञानिक तरीके से की गई मैपिंग से नशा तस्करी के हॉटस्पॉट चिन्हित करने में मदद मिलेगी.

ड्रग्स अपराध जीआईएस मैपिंग (ETV Bharat)

कैसे मदद करेगी जीआईएस मैपिंग

  • नए हॉटस्पॉट की पहचान: जहां से बार-बार नशा तस्करी, ड्रग्स बरामदगी या शिकायतें मिल रही हैं उन स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिन्हित किया जाएगा. इससे तुरंत पता चल जाएगा कि कौन से इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं.
  • पैडलर्स का नेटवर्क ट्रैक करना: गिरफ्तार ड्रग पैडलरों के पते, उनके संपर्क क्षेत्र और गतिविधियों को मैप पर दर्ज किया जा सकता है. इससे यह समझने में मदद मिलेगी की नशे की सप्लाई किस रूट और किन इलाकों में हो रही है.
  • स्कूल कॉलेज के आसपास निगरानी: शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर या एक किलोमीटर दायरे में संदिग्ध गतिविधियों वाले क्षेत्रों को चिन्हित किया जा सकता है. इसके आधार पर पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जा सकती है.
  • संसाधनों की बेहतर तैनाती: यदि किसी क्षेत्र में लगातार शिकायतें आ रही हैं तो वहां अतिरिक्त पुलिस बल, एएनटीएफ टीम या विशेष अभियान चलाया जा सकता है.
  • रियल टाइम अपडेट: नई गिरफ्तारी,बरामदगी या शिकायत मिलने पर उसे तुरंत जीआईएस सिस्टम में अपडेट किया जा सकता है. इससे अधिकारियों को नशे के बदलते नेटवर्क की लाइव तस्वीर मिलती रहती है.

मामले में देहरादून जिलाधिकारी आशीष चौहान का कहना है कि नशा समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. इसे खत्म करने के लिए प्रशासन,पुलिस, स्वास्थ्य विभाग,शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा. नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत संवेदनशील क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग कराई जाएगी. साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाएगी और नशा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

देहरादून जिला प्रशासन की यह पहल नशे के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. तकनीक की मदद से नशा तस्करों के नेटवर्क को चिन्हित कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी. जिससे युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने में मदद मिल सकेगी. जीआईएस मैपिंग और संयुक्त अभियान के जरिए प्रशासन की कोशिश है कि देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके.

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Last Updated : June 6, 2026 at 1:42 PM IST