गिरौदपुरी मेला 2026 का सफल आयोजन: लाखों लोगों ने गुरु गद्दी के दर्शन किए, जवानों ने 32 गुमशुदा को अपनों से मिलाया
250 दाल-भात केंद्रों में 3.90 लाख लोगों ने निःशुल्क भोजन किया. आयोजन में सुरक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सुविधा से प्रशासन की व्यवस्था मिसाल बनी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 26, 2026 at 1:36 PM IST
बलौदाबाजार: 22 से 24 फरवरी 2026 तक चला ऐतिहासिक गिरौदपुरी मेला इस वर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.आयोजन में सुरक्षा और निगरानी के ऐसे इंतजाम दिखे, जिन्होंने भीड़ प्रबंधन का एक सख्त लेकिन मानवीय मॉडल पेश किया.
80 कैमरों की नजर, चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग
इस बार पूरे मेला क्षेत्र में 18 राजपत्रित अधिकारियों के नेतृत्व में 21 निरीक्षक, 51 उपनिरीक्षक/सहायक उपनिरीक्षक, 66 प्रधान आरक्षक और 812 आरक्षक व महिला आरक्षक सहित कुल 968 पुलिसकर्मी तैनात रहे. मेला परिसर में 80 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी मदद से 24 घंटे निगरानी रखी गई.
⦁ भीड़भाड़ वाले मार्ग, मुख्य प्रवेश द्वार, मंदिर क्षेत्र, पार्किंग स्थल और नदी किनारे जैसे स्थानों को विशेष फोकस में रखा गया.
⦁ निगरानी कक्ष से लगातार फीड मॉनिटर की जाती रही, जिससे किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया संभव हुई.
⦁ यह व्यवस्था खासतौर पर रात के समय प्रभावी साबित हुई, जब श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती थी.
32 गुमशुदा मिले अपनों से
भीड़ वाले आयोजनों में गुमशुदगी बड़ी चुनौती होती है. इस बार मेला परिसर में अलग-अलग स्थानों पर पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किए गए. इन्हीं केंद्रों की मदद से कुल 32 गुमशुदा लोगों को खोजकर उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया.बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, जो भी अपनों से बिछड़े, उन्हें सहायता केंद्रों पर लाकर अनाउंसमेंट और समन्वय के जरिए परिवारों से मिलाया गया. कई परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौटी.

संदिग्धों और बाहरी कारोबारियों की जांच
मेला क्षेत्र में बाहर से आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों और अन्य राज्यों से आकर ठेला-गुमटी लगाने वालों का सर्च स्लिप भरा गया. कुल 79 लोगों का सत्यापन किया गया.

यातायात प्रबंधन: 20 से अधिक पार्किंग स्थल
लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए 20 से अधिक पार्किंग स्थल बनाए गए. इस बार छाता पहाड़ क्षेत्र में भी व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था की गई, जिससे मुख्य मार्गों पर दबाव कम रहा.गिरौदपुरी चौकी के पीछे स्थित शेरे पंजा स्थल को मुख्य पार्किंग के रूप में विकसित किया गया.पार्किंग से मंदिर तक पहुंचने के लिए मार्गदर्शन संकेतक और पुलिस कर्मियों की तैनाती रही.

जोंक नदी और तालाब क्षेत्र में 8 गोताखोर तैनात रहे
मेला क्षेत्र के पास स्थित जोंक नदी और ग्राम के मुख्य तालाब में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए 8 कुशल गोताखोर 24 घंटे तैनात रहे.

5 फायर ब्रिगेड, 15 फिक्स पॉइंट
आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए 5 फायर ब्रिगेड वाहन 24 घंटे अलर्ट मोड में तैनात रहे.मेला क्षेत्र में 15 से अधिक फिक्स पॉइंट बनाए गए थे, जहां पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मी लगातार मौजूद रहे. फिक्स पॉइंट्स से भीड़ की दिशा नियंत्रित करने, आपातकालीन प्रतिक्रिया और मार्गदर्शन में मदद मिली.
पैदल श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग
इस बार पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग से मार्ग निर्धारित किया गया था. मजबूत बैरिकेडिंग के जरिए इस मार्ग को सुरक्षित रखा गया, जिससे वाहन और पैदल यात्री एक-दूसरे के रास्ते में न आएं.मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर चरणबद्ध एंट्री व्यवस्था लागू रही. इससे भीड़ का दबाव एक साथ नहीं बढ़ा और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन का अवसर मिला.
संचार तंत्र मजबूत, 100 मैनपेक और 30 स्टैटिक सेट
सूचना के त्वरित आदान-प्रदान के लिए 100 मैनपेक सेट और 30 स्टैटिक सेट लगाए गए. इससे पुलिस बल के बीच बेहतर समन्वय बना रहा. हर सेक्टर में तैनात अधिकारी और जवान वायरलेस सेट के जरिए नियंत्रण कक्ष से जुड़े रहे. किसी भी सूचना पर तत्काल निर्देश जारी किए गए. यह व्यवस्था बड़े आयोजन में नियंत्रण बनाए रखने का अहम आधार बनी.

अनुशासन और संयम की मिसाल
तीन दिन तक चले इस विशाल आयोजन में कोई बड़ी दुर्घटना या अव्यवस्था सामने नहीं आई. भीड़ के बावजूद स्थिति नियंत्रण में रही. सुरक्षा बल की सतर्कता के साथ-साथ श्रद्धालुओं का सहयोग भी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा.
रणनीति, सतर्कता और मानवीय दृष्टिकोण
इस बार की व्यवस्था में तीन बातें साफ नजर आईं. व्यापक पूर्व तैयारी, टेक्नोलॉजी का उपयोग और मानवीय दृष्टिकोण.
श्रद्धा के साथ सुरक्षा की मजबूत ढाल
आस्था, अनुशासन और आधुनिक व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम इस बार गिरौदपुरी में देखने को मिला. मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई. परिसर में 84 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे निगरानी की गई. इसके अलावा 9 पुलिस कंट्रोल रूम बनाए गए थे, जिनकी मदद से शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया. मेले की सुरक्षा में 1150 पुरुष एवं महिला पुलिस बल तैनात रहे। 170 वायरलेस सेट के जरिए समन्वय बनाए रखा गया. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 8 अग्निशमन वाहन और 2 क्रेन की व्यवस्था की गई थी.
3.90 लाख लोगों को मिला निःशुल्क भोजन
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बना 250 दाल-भात केंद्रों का संचालन रहा. 21 स्थानों पर इन केंद्रों की व्यवस्था की गई थी. प्रतिदिन लगभग 1 लाख 30 हजार श्रद्धालुओं ने यहां भोजन किया. तीन दिनों में कुल मिलाकर लगभग 3 लाख 90 हजार लोगों को निःशुल्क भोजन कराया गया. साफ-सुथरे वातावरण में व्यवस्थित ढंग से भोजन वितरण किया गया. श्रद्धालुओं ने न केवल स्वाद बल्कि सेवा भावना की भी सराहना की.


स्वास्थ्य सेवाएं भी रही मुस्तैद
भीड़भाड़ को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक इंतजाम किया गया. 10 स्थानों पर चिकित्सा शिविर लगाए गए. 149 मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई और 10 एंबुलेंस तैनात की गई थी. मेडिकल कैंप के ओपीडी में 21,863 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई. आईपीडी में 83 मरीजों का इलाज किया गया. छोटे-मोटे स्वास्थ्य समस्याओं से लेकर आपात स्थितियों तक, हर जरूरत पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध रही. स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से श्रद्धालुओं को राहत मिली और आयोजन के दौरान किसी बड़े हादसे की खबर सामने नहीं आई.

डिजिटल सुविधा ने बनाया मेला आधुनिक
इस बार मेले को तकनीकी रूप से भी सशक्त बनाया गया. वेबसाइट तैयार की गई और मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया. क्यूआर कोड के माध्यम से श्रद्धालुओं को मेले की जानकारी, मार्गदर्शन और जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराई गई.
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