अस्पताल में 13 महीने की बच्ची की मौत, परिजनों का आरोप, इंजेक्शन लगाने से बिगड़ी तबीयत, कोरबा मेडिकल कॉलेज की घटना
बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. लापरवाही की शिकायत मिलने पर प्रबंधन ने जांच कमेटी बनाई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 26, 2026 at 7:27 AM IST
कोरबा: मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सर्दी, खांसी और निमोनिया से पीड़ित 13 महीने की बच्ची वान्या की इलाज के दौरान मौत हो गई है. घटना के बाद परिजनों ने बुधवार को अस्पताल परिसर में हंगामा किया. परिजनों ने डॉक्टर और नर्स पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया. मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के दौरान लापरवाही से इनकार किया है.
हालांकि आरोपों की जांच के लिए 3 चिकित्सकों की एक जांच टीम का भी गठन किया गया है. परिजन देर शाम तक हंगामा करते रहे, वह बच्ची के शव को वापस ले जाने को तैयार नहीं थे. अंततः अस्पताल प्रबंधन ने जांच का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को पूरा किया जा सका.
कोमा में जाने के बाद बच्ची की मौत
दरअसल, बरमपुर निवासी प्रियंका केवट, पति संजू केवट अपनी 13 माह की बच्ची वान्या केवट को सर्दी और खांसी से पीड़ित होने पर इलाज के लिए 20 फरवरी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे थे. परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने बच्ची को भाप देने के लिए अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी. सहमति देने पर बच्ची को आपातकालीन वार्ड ले गए और हाथ में केन्युला लगाया गया. केन्युला लगाते समय बच्ची रोने लगी. इसके बाद इंजेक्शन लगाने के साथ ही बच्ची की तबीयत और बिगड़ गई. बच्ची कोमा में चली गई. इसके 4 दिन बाद मंगलवार की रात को बच्ची की मौत हो गई.

अस्पताल परिसर में परिजनों का हंगामा
घटना के बाद आक्रोशित परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ट्रामा सेंटर भवन के सामने धरने पर बैठ गए. परिजनों ने लगभग डेढ़ से दो घंटे तक हंगामा किया. वह देर शाम तक कार्रवाई की मांग पर डटे रहे. लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पर कोई पहले नहीं की गई. नायब तहसीलदार और पुलिस मौके पर पहुंची. परिजनों को समझाया गया, तब जाकर मामला शांत हुआ.
परिजनों ने कहा कि अस्पताल से आए दिन लापरवाही की घटनाएं सामने आते रहती हैं. मौके पर पहुंचे अस्पताल प्रबंधन के चिकित्सकों पर परिजनों ने अभद्रता बरतने का भी आरोप लगाया. यह भी कहा कि परिवार में गंभीर घटना घटने के बाद भी चिकित्सक संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे थे.

दोषियों पर कार्रवाई की मांग
परिजनों ने कहा कि 4 से 5 दिन पहले बच्ची घर में खेल-कूद कर रही थी. जिसे अस्पताल लाने पर इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाया गया. इससे बच्ची की मौत हो गई है. परिजनों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. संबंधित स्टाफ और चिकित्सक पर ठोस कार्रवाई की मांग की है. परिजनों के हंगामा और मांग के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मृतका के शव का पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही है. इस पर परिजनों ने सहमति जताई. प्रबंधन ने 3 डॉक्टरों की जांच टीम बनाई है, इसमें छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शशीकांत भास्कर, स्त्री रोग विशेष डॉ. अनुपमा और डॉ. भोज कुमार साहू को शामिल किया गया है.

परिजनों को पीएम रिपोर्ट का इंतजार
मृत बच्ची की नानी अमृता निषाद ने कहा, ''लगभग चार दिन पहले बच्ची को लेकर उसके माता-पिता अस्पताल आए थे. मुझे उन्होंने बताया था कि सर्दी जुकाम और बुखार है. इसके बाद डॉक्टर ने कहा कि भाप देने के लिए भर्ती करना पड़ेगा. इसके बाद बच्चे को दवा लगाया गया और इंजेक्शन लगाते ही वह तड़पने लगी. इसके बाद बच्ची कोमा में चली गई. इस दौरान मैं लगातार अस्पताल आ रही थी. लेकिन बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. अब उसकी मौत हो गई है, चार दिन कोमा में रहने के बाद बच्ची की मौत होना बेहद दुखद घटना है, यह सिर्फ और सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ के लापरवाही के कारण हुआ है. किसी और के साथ ऐसा ना हो, इसलिए हम ठोस कार्रवाई चाहते हैं. प्रबंधन से हम न्याय की मांग कर रहे हैं.''
जांच टीम का गठन, लापरवाही की होगी जांच
कोरबा मेडिकल कॉलेज के सुप्रीटेंडेंट डॉ. गोपाल कंवर ने कहा, ''निमोनिया से पीड़ित 13 महीने की बच्ची को लेकर परिजन 19 फरवरी को अस्पताल पहुंचे हुए थे. जिसे डॉक्टरों ने इलाज के लिए भर्ती किया था. बच्ची की हालत नाजुक थी, इलाज के दौरान मंगलवार रात को उसकी मौत हो गई है. डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने का पूरा प्रयास किया था. इसमें लापरवाही नहीं बरती गई है. पहले तो परिजन पीएम के लिए तैयार नहीं थे, काफी हंगामा भी किया. लेकिन अब मान गए हैं. तीन डॉक्टर की जांच टीम भी गठित की गई है. इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.''
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