19 रमज़ान को ‘गिलेम का ताबूत’ निकाला गया, अज़ादारों ने नम आंखों से अली "रज़ियल्लाहु अन्हु" को याद किया
“या अली मौला अली” की सदाओं से सोमवार को गूंज उठा लखनऊ.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 9, 2026 at 2:31 PM IST
लखनऊ: 19 रमज़ान की सुबह शहर-ए-लखनऊ में ज़रबत-ए-अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम अली "रज़ियल्लाहु अन्हु" की याद में अकीदत व एहतराम के साथ “गिलेम का ताबूत” निकाला गया. बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर “या अली मौला अली” की सदाओं के साथ इमाम अली की शहादत को याद किया.

गिलेम का ताबूत निकाला गया: सुबह सआदतगंजके शबीह मस्जिद-ए-कूफ़ा में विशेष अंदाज़ में अज़ान-ए-सुबह और नमाज़-ए-फ़ज्र अदा की गई. इसके बाद मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें इमाम अली "रज़ियल्लाहु अन्हु" की संघर्ष को बयान किया गया. मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि अमीरुल मोमिनीन पर उस वक्त हमला किया गया, जब आप मस्जिद-ए-कूफ़ा में सज्दे की हालत में थे. ज़हर में डुबी हुई तलवार से वार किया गया, जिससे इमाम अली"रज़ियल्लाहु अन्हु" गंभीर रूप से घायल हो गए और मुसल्ला ख़ून से तर बतर हो गया. उसी वक्त आपने फरमाया “रब्ब-ए-काबा की क़सम, मैं कामयाब हो गया.”
अज़ादारों ने मातम कर इमाम अली को याद किया: मजलिस के आखिर में शबीह ताबूत निकाला गया. काले कपड़ों में सोगवार बच्चे, बूढ़े, जवान, मर्द और औरतें ताबूत को कंधों पर उठाकर जुलूस की शक्ल में निकले. जुलूस में ताबूत के आगे अलम भी था. अज़ादार सीना-ज़नी करते हुए आगे बढ़ते रहे. जुलूस की आखरी तकरीर में मसाइब-ए-आल-ए-मोहम्मद (स.अ.) के सीरत बयान किए गए. इस दौरान अज़ादारों ने मातम कर इमाम अली की शहादत को याद किया.
ज़हर लगी तलवार से हमला: बताया जाता है कि 19 रमज़ान 40 हिजरी को मस्जिद-ए-कूफ़ा में अब्दुर्रहमान इब्न मुल्जिम ने हज़रत इमाम अली"रज़ियल्लाहु अन्हु" पर सज्दे की हालत में ज़हर लगी तलवार से हमला किया था. इस हमले में आप गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गए और बाद में आपकी शहादत हुई. उस समय आपके चाहने वालों ने आपको गिलेम में लपेटकर बैत-उश-शरफ़ ले गए. उसी घटना की याद में 19 रमज़ान के लखनऊ में “गिलेम का ताबूत” निकाला जाता है, जिसकी शुरुआत करीब 80 साल पहले हकीम सैयद मोहम्मद तकी मरहूम ने की थी.

जुलूस में पुलिसकर्मी तैनात: जुलूस को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे, चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था. RAF और CRPF की भी तैनाती की गई थी, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जा रही थी, जबकि कई घरों के छतों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

शिया समुदाय का महत्वपूर्ण जुलूस: डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार, इस जुलूस में लगभग 25 हज़ार लोग शामिल होए थे और यह शिया समुदाय का बेहद महत्वपूर्ण जुलूस था. सुरक्षा व्यवस्था के तहत 10 एडिशनल एसपी, 32 डिप्टी एसपी, 12 कंपनी पीएसी, दो-दो कंपनी RAF और CRPF तथा करीब 500 अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. 91 स्थानों पर रूफटॉप ड्यूटी और 52 संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जबकि ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी की गई.
महत्वपूर्ण चौराहों पर इंस्पेक्टर और एसीपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई थी, पूरे जुलूस को सुरक्षा घेरे में लेकर निकाला गया, जिसमें आगे-पीछे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.
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