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राजस्थान की तीन विभूतियों को पद्मश्री, पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मान

भव्य समारोह के बीच सोमवार शाम को दिल्ली में पद्म पुरस्कारों का वितरण हुआ.

राजस्थान की तीन विभूतियों को पद्मश्री
राजस्थान की तीन विभूतियों को पद्मश्री (Photo Source- Social Media)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 25, 2026 at 9:39 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली/जयपुर: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों के तहत इस वर्ष राजस्थान की तीन महान हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया, जबकि राजस्थान मूल के विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण प्रदान किया गया. इन सभी विभूतियों ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए न केवल राजस्थान, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है.

राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगाराम भील और समाजसेवी संत स्वामी ब्रह्मदेव महाराज को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया. इस मौके पर देशभर से चयनित विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिसमें पहले चरण में 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए गए.

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लोक संस्कृति के जीवंत संरक्षक गफरुद्दीन जोगी: डीग जिले के कैथवाड़ा गांव में जन्मे गफरुद्दीन मेवाती जोगी लोक संस्कृति के सशक्त वाहक माने जाते हैं. उन्होंने भपंग वादन के जरिए मेवात और ब्रज क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवित रखने का कार्य किया. महाभारत, लोक रामायण, शिव विवाह और कृष्ण लीला जैसी मौखिक परंपराओं को उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया. इतना ही नहीं, उन्होंने करीब 20 विलुप्त होती लोक वाद्य परंपराओं को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

थार की धुनों को वैश्विक पहचान देने वाले तगाराम भील: जैसलमेर जिले के मूलसागर गांव के निवासी तगाराम भील ने पारंपरिक वाद्य ‘अलगोजा’ को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. बचपन से ही लोक संगीत में रुचि रखने वाले तगाराम ने अपने पिता से इस कला को सीखा और कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करते हुए इसमें महारत हासिल की. वर्ष 1981 में स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रस्तुति के बाद उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली और उन्होंने थार के संगीत को दुनिया भर में पहचान दिलाई.

समाजसेवा का पर्याय बने स्वामी ब्रह्मदेव: श्रीगंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव महाराज लंबे समय से दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के उत्थान के लिए समर्पित हैं. उन्होंने शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के जरिए समाज में एक अलग पहचान बनाई है. उनके प्रयासों से हजारों बच्चों को शिक्षा और बेहतर जीवन का अवसर मिला. समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

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पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण: राजस्थान मूल के प्रसिद्ध विज्ञापन विशेषज्ञ पीयूष पांडेय को कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. भारतीय विज्ञापन जगत को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जैसे ऐतिहासिक अभियानों सहित उन्होंने 100 से अधिक प्रतिष्ठित विज्ञापन तैयार किए, जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं.

राजस्थान की संस्कृति और सेवा को राष्ट्रीय पहचान: इन सम्मानों के जरिए राजस्थान की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और समाजसेवा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मान न केवल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं.

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