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विवाद में भाजपा की 'जनसुनवाई': आम लोगों के लिए नो एंट्री, सिर्फ कार्यकर्ताओं की सुनी जाएगी बात

जयपुर में भाजपा मुख्यालय पर हो रही जनसुनवाई में आम जनता के प्रवेश पर रोक के कारण विवाद गहरा गया है.

public hearing at BJP office
जनसुनवाई में जाने के लिए भाजपा मुख्यालय के बाहर खड़े आम लोग (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 3, 2025 at 6:20 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: भाजपा सरकार का जनसुनवाई कार्यक्रम तीसरे दिन ही विवादों में घिर गया. पार्टी कार्यालय में हो रही इस जनसुनवाई में केवल कार्यकर्ताओं को ही आने की अनुमति दी जा रही है, जबकि आम जनता के लिए प्रवेश वर्जित है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और महिला अधिकारिता राज्य मंत्री मंजू बाघमार के नेतृत्व में जनसुनवाई शुरू हुई, लेकिन इसमें आम लोगों को अनुमति नहीं दी गई. इसके चलते कई लोग बिना अपनी बात रखे वापस लौटने को मजबूर हुए. हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद पार्टी की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया कि यह जनसुनवाई केवल कार्यकर्ताओं के लिए है. किसी भी अन्य व्यक्ति को यहां सुनवाई में शामिल होने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि से लिखित सिफारिश लानी होगी.

आम जनता को प्रवेश नहीं: नागौर जिले के दिलीप सिंह शेखावत अपने गांव में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था सुधारने की मांग लेकर आए थे, लेकिन उन्हें सुनवाई में जाने की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि वे पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं. उनसे कहा गया कि सुनवाई में शामिल होने के लिए पहले मंडल अध्यक्ष या किसी जनप्रतिनिधि से लिखित सिफारिश लेकर आएं. दिलीप कहते हैं, 'मुझे आश्वासन तो दिया गया कि मेरी समस्या का समाधान किया जाएगा, लेकिन मुझे सुनवाई में जाने तक नहीं दिया गया. मैं चिकित्सा मंत्री से अपने गांव की समस्या के बारे में बात करना चाह रहा था.' दिलीप सिंह अकेले ऐसे नहीं हैं, करीब दो दर्जन लोग ऐसे थे जो सुनवाई में अपनी समस्या लेकर आए थे, लेकिन उनके पास किसी जनप्रतिनिधि की सिफारिश न होने के कारण उन्हें रोक दिया गया. उनसे कहा गया कि आम जनता की समस्याओं की सुनवाई के लिए वे मंत्री और विधायक के आवास पर जाएं. पार्टी कार्यालय में केवल पार्टी कार्यकर्ताओं की ही सुनवाई होती है.

सुनिए....जनसुनवाई को लेकर किसने क्या कहा (ETV Bharat Jaipur)

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यहां सिर्फ कार्यकर्ताओं की सुनवाई: विवाद बढ़ने पर कार्यालय प्रभारी मुकेश पारीक सामने आए. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुनवाई पार्टी कार्यालय में हो रही है. यहां केवल कार्यकर्ताओं की ही बात सुनी जाएगी. आम जनता कभी भी अपनी समस्या लेकर आ सकती है, लेकिन उनके समाधान के लिए हर दिन मंत्री और विधायक अपने आवास पर जनसुनवाई करते हैं. आम जनता वहां जाकर अपनी समस्याएं बता सकती है. पारीक ने कहा कि पार्टी कार्यालय में मंडल अध्यक्ष या किसी जनप्रतिनिधि से लिखित सिफारिश लाने पर ही सुनवाई में शामिल होने दिया जाएगा, यही व्यवस्था है. सरकार और संगठन दोनों मिलकर आम जनता के हित में काम करना चाहते हैं, लेकिन पार्टी कार्यालय पर होने वाली सुनवाई का एक अपना प्रारूप है. इसमें स्थानीय पार्टी पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि से लिखवाना जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या का समाधान या कोई सूचना देने के लिए वह निर्धारित जगह तक पहुंच सके.