ETV Bharat / state

CSJMU में तैयार हुआ तनाव का थर्मामीटर; 'जनरल एंग्जायटी स्केल' बताएगा मानसिक सेहत

देशभर के युवाओं को होगा इसका लाभ. पढ़ाई के तनाव और दबाव को लेकर पूरे साल भर परेशान रहते हैं छात्र-छात्राएं.

CSJMU में तैयार हुआ तनाव का थर्मामीटर.
CSJMU में तैयार हुआ तनाव का थर्मामीटर. (Photo Credit: ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 4, 2026 at 12:10 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

कानपुर: भागमभाग और प्रतिस्पर्धा के दौर में चिंता या तनाव आम समस्या बन गए हैं. युवा पीढ़ी में यह समस्या गंभीर होती जा रही है. परीक्षा का डर, कम नंबर आने की आशंका, सामने पेश होने का गिला या फिर भविष्य की अनिश्चितता, यह सभी मानसिक तनाव के कारण हैं. इन्हीं समस्याओं का सटीक आकलन करने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के शोधकर्ताओं ने अनूठी पहल की है.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर. पंजवानी ने मिलकर 'जनरल एंग्जायटी स्केल' नामक एक मानक पैमाना विकसित किया है. यह स्केल 17 से 25 साल के युवाओं में चिंता के स्तर को बेहद सटीक तरीके से मापने में सक्षम है.

चिंता के 5 आयामों पर काम करेगा पैमाना: इस स्केल की सबसे बड़ी खासियत यह है यह चिंता को महज एक समस्या के रूप में न देखकर उसके 5 अलग-अलग पहलुओं (डायमेंशंस) में बांटता है.

इसमें शैक्षणिक चिंता (एकेडमिक एंग्जायटी) यानी पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा को लेकर तनाव, संज्ञानात्मक चिंता (कॉग्निटिव एंग्जायटी) यानी मानसिक थकान और अत्यधिक सोच-विचार, भावनात्मक चिंता (इमोशनल एंग्जायटी) यानी नकारात्मक सोच और आत्म-आलोचना, सामाजिक चिंता (सोशल एंग्जायटी) यानी क्लास या समूह में बोलने का डर और व्यवहारिक चिंता (बिहेवियरल एंग्जायटी) यानी भविष्य को लेकर निराशावादी दृष्टिकोण शामिल हैं.

देशभर के 800 छात्रों पर हुआ परीक्षण: इस स्केल को तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने शुरुआत में 65 सवाल तैयार किए. विशेषज्ञों की राय और कड़ी छानबीन के बाद इसे घटाकर इन्हें 35 सवालों तक सीमित किया गया. इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया.

यह पैमाना फाइव-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है, जिसमें 'पूर्णतः सहमत' से लेकर 'पूर्णतः असहमत' तक के विकल्प हैं. इसे पूरा करने में मात्र 18 से 20 मिनट का समय लगता है. इसे व्यक्तिगत या समूह दोनों तरह से प्रशासित किया जा सकता है.

शोध में मिली उच्च विश्वसनीयता: डॉ. विमल सिंह के अनुसार, इस पैमाने की विश्वसनीयता (रिलाएबिलिटी) 0.94 है, जो अत्यंत उच्च मानी जाती है. साथ ही इसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्केल जीएडी-7 (जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिस्आर्डर 7) के साथ जांचा गया.

इसमें 0.62 का सकारात्मक सहसंबंध (पॉजिटिव कोरिलेशन) पाया गया. इसका मतलब है कि यह पैमाना उतना ही प्रभावी और सटीक है, जितने कि विश्व स्तर पर इस्तेमाल होने वाले मानक टूल हैं. विश्वसनीयता को देखते हुए प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक प्रकाशन संस्था 'प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड' ने प्रकाशित किया है.

आम लोगों और छात्र-छात्राओं को यह फायदे: इस नए पैमाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब कोई भी शिक्षक, परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक किसी भी छात्र-छात्रा के चिंता का स्तर मात्र कुछ मिनटों में पहचान सकता है.

पहले अक्सर यह नहीं पता चल पाता था किसी छात्र को किस तरह की चिंता अधिक है. पढ़ाई की, सामाजिक दबाव की या भावनात्मक? इस स्केल से यह स्पष्ट हो जाएगा. इसके आधार पर जरूरतमंद छात्रों को सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श (काउंसिलिंग) दी जा सकेगी.

इससे वह समय रहते समस्या से उबर सकेंगे. शोधकर्ताओं का कहना है यह पैमाना न केवल शोध कार्यों में उपयोगी होगा, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों में करियर काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए भी वरदान साबित होगा.

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने बताया कि विश्वविद्यालय शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी रहा है. यह पैमाना युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम है. मुझे विश्वास है कि यह शोध देश भर के शिक्षण संस्थानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

वहीं प्रमुख शोधकर्ता डॉ. विमल सिंह ने बताया कि हमने इस पैमाने को पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर खरा उतारा है. यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे.

यह भी पढ़ें: इस टाइमिंग में सौर ऊर्जा से चार्ज करें ईवी, मिलेगी 20% टैरिफ में छूट