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राह चलते जान पायेंगे गयासुर की कथा, बदला गयाजी शहर का नया स्वरूप

गयाजी के गोलंबरों पर बनी कलाकृतियों के माध्यम से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अब राह चलते गयासुर की कथा जान पाएंगे.

Gayaji city transforming
गयाजी शहर का स्वरूप (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 28, 2026 at 2:21 PM IST

4 Min Read
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गया: भगवान विष्णु की छाया में बसा प्राचीन गयाजी धाम पवित्र और प्राचीन शहरों में से एक है. ऋग्वेद में वर्णित इस पुण्य धाम का नाम पिछले साल 2025 में बिहार सरकार ने बदलकर गयाजी कर दिया था. अब इस ऐतिहासिक शहर में आने वाले श्रद्धालुओं को सड़कों के गोलंबरों से ही धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति होनी शुरू हो जाएगी.

गोलंबरों पर दिखेगी पौराणिक विरासत: गयाजी नगर निगम की ओर से शहर के विभिन्न चौक-चौराहों को ऐतिहासिक व धार्मिक स्मारकों से सजाया जा रहा है. शहर के प्रमुख पीर मंसूर मोड़ और काशीनाथ मोड़ गोलंबर पर बने स्मारकों में भगवान विष्णु के चरण चिन्ह, विष्णुपद मंदिर का चित्र, भगवान बुद्ध के चित्र के साथ गयासुर की कथा और सांस्कृतिक कलाकृतियों को शामिल किया गया है.

Gayaji city transforming
गयाजी शहर का स्वरूप (ETV Bharat)

आधुनिक लाइटिंग से जगमगाया शहर: इन नवनिर्मित गोलंबरों में सिर्फ धार्मिक चित्र ही नहीं उकेरे गए हैं, बल्कि इनमें आधुनिक फाउंटेन भी लगाए गए हैं. ये रात में अति सुंदर दिखें, इसके लिए इन्हें रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है. जब इन पर रोशनी पड़ती है, तो शहर की सुंदरता बढ़ जाती है और गयाजी का गौरवशाली इतिहास ताजा हो जाता है.

निगम फंड से चौराहों का निर्माण: नगर निगम के मेयर गणेश पासवान ने बताया कि शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए 8 बड़े और 5 छोटे गोलंबरों का निर्माण कराया जा रहा है. इसमें समाहरणालय से लेकर ओटीए 5 नंबर गेट तक के गोलंबर शामिल हैं. आधे से ज्यादा का निर्माण हो चुका है. निगम अपने फंड से इनका निर्माण तेजी से करा रहा है.

Gayaji city transforming
गयाजी शहर का स्वरूप (ETV Bharat)

"ठगयाजी नगर निगम ने अपने फंड से इसका निर्माण करा रहा है. पिछले साल ही बोर्ड की बैठक में इस का निर्णय लिया गया था, सभी गोलंबर का अलग-अलग बजट है, जो बचे हुए हैं उन्हें भी तेजी के साथ करने का आदेश दिया गया है." -गणेश पासवान, मेयर, गयाजी

स्टेशन से ही होगी अध्यात्म की अनुभूति: विष्णुपद मंदिर के पंडा महेश लाल ने इस कार्य के लिए निगम को धन्यवाद दिया है. उन्होंने कहा कि गयाजी सनातन का आदि तीर्थ है. अब यहां आने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से निकलते ही रास्ते में विष्णु धाम की अनुभूति होगी. इससे उनके मन में बड़ी श्रद्धा का भाव जगेगा और वे रास्ते से ही नमन कर सकेंगे.

भारत सरकार और बिहार सरकार से आग्रह है कि जो भी कनेक्टिविटी के स्थल हैं, वहां पर भी या अन्य मार्गों पर भी ऐसे गेट बनाए जाएं जहां पर विष्णु पद मंदिर, बोधगया मंदिर के चित्र बने हों ताकि शहर में इंटर करते ही लोग गया जी को नमन करें, उन्हें धार्मिक यात्रा का अनुभव हो, गयाजी में वैसे कई स्थान हैं जिनके विकास से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी जो पर्यटन के अनुसार से भी महत्वपूर्ण होगा." -महेश लाल, पंडा, विष्णुपद मंद्र

गयाजी शहर का बदल रहा स्वरूप (ETV Bharat)

कनेक्टिविटी मार्गों पर द्वार बनाने की मांग: महेश लाल पंडा ने भारत और बिहार सरकार से आग्रह किया है कि शहर के अन्य कनेक्टिविटी मार्गों पर भी ऐसे स्वागत गेट बनाए जाएं. जिन पर विष्णुपद मंदिर और बोधगया मंदिर के चित्र बने हों ताकि शहर में प्रवेश करते ही लोग नमन करें. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी.

यात्रियों और जनप्रतिनिधियों में भारी उत्साह: धनबाद से आए श्रद्धालु रंजन कुमार ने कहा कि काशीनाथ मोड़ पर गयासुर का इतिहास पढ़कर मन को शांति मिली. सशक्त स्थाई समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि महाबोधि मंदिर जैसी कलाकृतियों से शहर की पहचान मजबूत होगी. इन आकर्षक डिजाइनों से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी के इतिहास को नई पीढ़ी तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा.

Gayaji city transforming
गयाजी शहर का स्वरूप (ETV Bharat)

"धार्मिक स्थल की पहचान शहर के रास्ते पर लगे बोर्ड स्मारक और अन्य स्टैच्यू से होना चाहिए, पहले आते थे तो सिर्फ एक दो जगहों पर बोर्ड मिलते थे अब हम विष्णु पद पहुंचने से पहले ही इसकी महत्ता को जान सकते हैं और दर्शन करना शुरू कर सकते हैं." -रंजन कुमार, तीर्थ यात्री

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