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कद्दू कोहड़ा के खोल में संरक्षित होगा देसी तोता, पक्षी प्रेमी तंजील बनवा रहे हैं 500 घोंसले

बिहार के 'स्पैरो मैन' तंजील उर रहमान खान अब पैरेट मैन बनने की राह पर हैं. उन्होंने तोता संरक्षण का कार्य शुरू किया है. पढ़ें..

TANZIL UR REHMAN KHAN
गया में तोता संरक्षण के लिए प्रयास (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 4, 2026 at 6:41 AM IST

8 Min Read
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गया: बिहार के गया के रहने वाले पक्षी प्रेमी तंजील उर रहमान खान का जीवन पक्षियों के संरक्षण के लिए समर्पित है. बड़े स्तर पर गौरैया संरक्षण पर काम करने के बाद अब वो तोते के रहने के लिए 500 घोंसले बनाएंगे. इसकी शुरुआत करते हुए उन्होंने अपने घर की दीवारों समेत पेड़ पर लगभग 60 घोंसले टांगे हैं. हालांकि उन्हें इस मुहिम में भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना है लेकिन फिर भी घोंसले बनाने के लिए जिस तरीके और समानों का वो उपयोग कर रहे हैं, उस से तोतों को प्राकृतिक घोंसले का एहसास हो सकता है.

पिंजरे में ना रहे तोता: बोधगया प्रखंड के निस्खा गांव निवासी गौरैया प्रेमी के रूप में प्रसिद्ध तंजील उर रहमान खान लंबे अरसे से पंछियों के संरक्षण का बीड़ा उठाए हुए हैं. वह झारखंड पुलिस के जवान थे लेकिन पंक्षियों के संरक्षण और सामाजिक कार्यों के लिए उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. वो अपने गांव में रहते हैं और अपने परिवार का लालन-पोषण करने के लिए खेती किसानी करते हैं.

तंजील उर रहमान खान की मुहिम (ETV Bharat)

"पक्षियों के संरक्षण के लिए मैंने अपने जीवन के कई साल दिए हैं. खासकर लुप्त होते पक्षी गौरैया के संरक्षण के लिए उन्होंने एक पूरा मिशन खड़ा कर दिया था, जिसका परिणाम भी क्षेत्र में देखने को मिला है. लुप्त हो रहे गौरैये अब उनके गांव के हर घर आंगन में झुंड में घूमती-फिरती हैं लेकिन अब पिंजरे में बंद होने वाले पक्षी तोता के लिए खास अभियान शुरू किया है. वे कहते हैं, 'मेरा लक्ष्य है कि कोई भी तोता पिंजरे में बंद नहीं हो.'

कद्दू और नारियल से बना रहे हैं 'घर': तंजील उर रहमान खान तोता के लिए खास किस्म का घर बना रहे हैं. तोते के घर के लिए वह विशेष रूप से सब्जी का भरपूर उपयोग कर रहे हैं. तोता के घोंसला के लिए कद्दू, कोहड़ा, नारियल का छिलका, लकड़ी-मिट्टी और सीमेंट के लेप का इस्तेमाल हो रहा है. इन सामानों और सब्जी के उपयोग से तोते के घोंसले को वह प्राकृतिक रूप देने के प्रयास कर रहे हैं, ताकि तोता उन घोंसलों में अपना घर बनाएं और वो उसी वातावरण में रहें, जो उन्हें पसंद है.

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कद्दू कोहड़ा के खोल में रहेगा तोता (ETV Bharat)

वातानुकूलित की तरह है तोते का घोंसला: तंजील उर रहमान खान कहते हैं कि जिन-जिन चीजों का उन्होंने उपयोग किया है, उनमें सिर्फ सीमेंट को छोड़कर सभी नेचुरल हैं. सब से पहले वो मोटे कद्दू को सुखाकर उसका खोल बनाते हैं, जिसे खोलहड़ भी कहा जाता है, फिर उसके ऊपर सूखे नारियल का छिलका घांस लपेटते हैं. फिर उसके ऊपर फिर पतली लकड़ी लगाते हैं, उसके ऊपर फिर ब्रश से सीमेंट का घोल चढ़ाते हैं और उसके ऊपर मिट्टी का लेप देते हैं. तंजील कहते हैं कि इस इस तरह उन्होंने डिजाइन किया है कि वो गर्मी के दिनों में तपे नहीं, बल्कि ठंडक का एहसास ये घोंसले उन्हें 'तोता' को कराएं.

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वातानुकूलित की तरह है तोते का घोंसला (ETV Bharat)

तोतों को पसंद है खोलहड़: तंजील उर रहमान खान कहते हैं कि तोतों को खोलहड़ में रहना पसंद आता है. वो इसीलिए ताड़ और नारियल के पौधों में अपना घोंसला ज्यादा बनाते हैं. तोते आमतौर दूसरी पंछियों की तरह पेड़ घर दीवार पर तिनके घांस के घोंसले में नहीं रहते हैं. वो ज्यादातर पेड़ के अंदर होल वाली जगह पर रहना पसंद करते हैं.

वे बताते हैं कि इसलिए उन्होंने ऐसा डिजाइन किया है कि तोते आराम से आकर रहें. एक बार वो रहना शुरू कर दें तो फिर वो इस में लगातार रहेंगे. कद्दू के खोल को ही क्यों उन्होंने घोंसले के लिए चुना? इस पर तंजील कहते हैं कि कद्दू का खोल गर्मी और धूप में भी हीट नहीं होगा. जब वह गर्म नहीं होगा, तब तोते के छोटे बच्चे उसमें आराम से रह सकेंगे. ये एक साइंटिफिक रीजन भी होता है. तोते के लिए इसका ख्याल रखना बेहद जरूरी है.

कैसे आया ये आइडिया?: इस बारे में तंजील कहते हैं कि कद्दू जब पक जाता है तो वह उपयोगी नहीं रहता, लोग उसे फेंक देते हैं. हालांकि सूखने के बाद वो लकड़ी की तरह ही कड़ा सख्त होता है, हमने इसी लिए कद्दू के कवर से तोते के घोंसले बनाए हैं. ये एक तरह से नया एक्सपेरिमेंट है.

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तोता का घोंसला (ETV Bharat)

"इसमें सूती का कपड़ा भी उपयोग किया है. उसमें फेविकोल लगाकर कपड़े को चिपकाया, मजबूती के साथ इसको वाटरप्रुफ बनाया है, ताकि इसमें बरसात के दिनों में भी पानी जमा नहीं हो. इसको ऐसा डिजाइन किया है कि पानी बरसे भी तो ऊपर से ही पानी निकल जाए, उसके खोल के अंदर नहीं जाए."- तंजील उर रहमान खान, पक्षी प्रेमी

नया शौक है तोतों का संरक्षण: तंजील उर रहमान खान ने कहा कि उनके क्षेत्र में तोता की संख्या देखी जाती है लेकिन उनके रहने और खाने-पीने के लिए एक स्थान नहीं है. इसलिए मैंने सोचा कि जिस तरह से अन्य पक्षियों के संरक्षण और रहने की व्यवस्था पहले की है, उसी तरह उनके रहने की भी व्यवस्था की जाए. इसके लिए अब मैं बड़े पैमाने पर कार्य करेंगे.

वह कहते हैं, 'अभी एक तरह से एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं. अगर इसमें सफलता मिलती है तो फिर बड़े स्तर पर इस अभियान को शुरू करेंगे. तोता का भी संरक्षण होना जरूरी है, क्योंकि लोग इसे पिंजरे में कैद रखते हैं. इससे पहले गौरैया और कई पंछियों के संरक्षण के लिए काम किया था.'

पिंजरे से आजाद हो पंछी: तंजील खान कहते हैं कि उन्हें पिंजरे में पक्षी बंद देखकर दुख होता है. अगर किसी इंसान को एक रूम में रखा जाए और वहीं उसे बंद कर सारी चीजें दी जाए तो सोचिए उसका क्या हाल होगा? वो एक तरह से जेल ही होगी. हम चाहते हैं कि पक्षी भी आजाद होकर अपनी पसंद के ठिकानों पर रहे. इंसान के नाते हम लोगों से जो भी इन पक्षियों के लिए सहयोग बने, वह करना चाहिए. हर व्यक्ति अगर छोटी सी भी कोशिश करता है तो वो उसके लिए भी वो फायदेमंद होगा.

1 साल में 100 घोंसला बनाने की तैयारी: तंजील खान ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि इसी साल दिसंबर तक वह अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में कम से कम 500 से अधिक तोते के लिए घोंसला लगवाएं. इसके लिए उन्होंने शुरुआत अपने घर से किया है. वह कहते हैं कि जिस तरीके से वो घोंसला बना रहे हैं, वह आसान नहीं है. एक घोंसला पर 300 से 500 रुपये खर्च होंगे, जबकि एक घोंसले को बनाने में लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है. वो कहते हैं कि हमारा उद्देश्य यही है कि घोंसला बनाकर गौरैये की तरह ही इन्हें भी संरक्षित करें.

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1 साल में 100 घोंसला बनाने की तैयारी (ETV Bharat)

खोते से निकाल लेते हैं बच्चे: तंजील खान ने कहा कि वह पिछले कई सालों से देख रहे थे कि लोग तोते के खोते से तोते के बच्चे को निकाल लेते हैं. उसे लेकर वह बेचते हैं और फिर लोग उसे पिंजरे में कैद कर पालते हैं. हालांकि अब सरकारी स्तर से रोक लगने के बाद लोग खुले तौर पर तो नहीं निकालते हैं लेकिन फिर भी चोरी-चुपके वह इस कार्य को करते हैं. बेचना और पिंजरे में रखना दोनों गलत है.

आसान नहीं है राह: तंजील खान भी कहते हैं कि उनका यह काम आसान नहीं है. पहले से इस तरह के कार्य को लेकर उन्हें तजुर्बा है. पहले तो लोगों के विरोध का ही सामना करना पड़ता है. खासकर वह लोग उन्हें निशाना बनाएंगे जो तोते के बच्चों को निकाल कर बाजारों में बेच देते हैं. हालांकि वो ये भी कहते हैं कि इससे उन्हें कोई परवाह नहीं. उन्होंने गौरैया के समय भी कई तरह की समस्याओं का सामना किया था. मजाक भी उड़ाया गया था.

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कद्दू कोहड़ा के खोल में रहेगा तोता (ETV Bharat)

वे कहते हैं, 'तोता एक बेहद आकर्षक पक्षी है. इसकी मजबूत घुमावदार चोंच और इसके रंग इंसानों को प्रभावित करते हैं. तोता भी सबसे बुद्धिमान पक्षियों में से एक है. इसे भाषा समझने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाता है और वो प्रशिक्षण के बाद उन शब्दों को दोहराता भी है. ऐसे में लोगों को तोता को आजादी देनी चाहिए और उनके संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए.

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