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बिहार पुलिस के दारोगा सच्चिदानंद राय बने मिसाल, 35 साल से विक्षिप्त-लावारिस लोगों का बने सहारा

गया के एसआई सच्चिदानंद राय पिछले 35 वर्षों से मानसिक रूप से विक्षिप्त और लावारिस लोगों की सेवा कर रहे हैं. पढ़ें खबर

200 विक्षिप्तों की कर चुके हैं सेवा
सच्चिदानंद राय, सब इंस्पेक्टर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : May 31, 2026 at 4:41 PM IST

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गया : समाज में मानसिक रूप से विक्षिप्त और लावारिस लोगों को अक्सर उपेक्षा और तिरस्कार का सामना करना पड़ता है. लोग उनसे दूरी बनाकर निकल जाना ही बेहतर समझते हैं. लेकिन बिहार पुलिस के एक दरोगा ने इस सोच को बदलने का बीड़ा उठाया है.

200 विक्षिप्तों की कर चुके हैं सेवा : गया जिले के कोठी थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर सच्चिदानंद राय पिछले 35 वर्षों से ऐसे लोगों की सेवा कर रहे हैं और अब तक 200 से अधिक मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लावारिस लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने का प्रयास कर चुके हैं.

SI सच्चिदानंद 200 विक्षिप्तों की कर चुके हैं सेवा (ETV Bharat)

बचपन से ही था सेवा का जुनून : मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी सच्चिदानंद राय वर्ष 1993 में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे. कई पदोन्नतियों के बाद वे वर्तमान में गया के कोठी थाना में एसआई के रूप में कार्यरत हैं. हालांकि उनका यह सेवा कार्य पुलिस नौकरी से भी पुराना है.

''बचपन से ही सड़क किनारे भटकते मानसिक रूप से बीमार लोगों को देखकर मेरा मन विचलित हो जाता था. धीरे-धीरे ऐसे लोगों की मदद शुरू की और यह सेवा मेरे जीवन का मिशन बन गई.''- सच्चिदानंद राय, सब इंस्पेक्टर

बचपन से ही था सेवा का जुनून
बचपन से ही था सेवा का जुनून (ETV Bharat)

नहलाने से लेकर इलाज और आश्रय तक की व्यवस्था : सच्चिदानंद राय केवल भोजन या कपड़े देकर ही नहीं रुकते. वे ऐसे लोगों को नहलाते हैं, उनके बाल और नाखून कटवाते हैं, नए कपड़े पहनाते हैं, भोजन कराते हैं और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज भी करवाते हैं.

'परिवार के सदस्य की तरह करते हैं केयर' : उनके सहयोगी बताते हैं कि कई बार ऐसे लोगों के पास जाना भी आम आदमी के लिए मुश्किल होता है, लेकिन सच्चिदानंद राय उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह संभालते हैं. हाल ही में उन्होंने एक वृद्ध विक्षिप्त व्यक्ति को सड़क किनारे से उठाकर अस्पताल पहुंचाया, इलाज कराया और बाद में एक आश्रम में सुरक्षित ठहराने की व्यवस्था की.

एसआई सच्चिदानंद राय
एसआई सच्चिदानंद राय (ETV Bharat)

परिजनों की भी करते हैं तलाश : सच्चिदानंद राय का पहला प्रयास होता है कि ऐसे लोगों के परिजनों का पता लगाया जाए. यदि परिवार मिल जाता है तो वे संबंधित व्यक्ति को उनके सुपुर्द कर देते हैं. यदि कोई परिजन नहीं मिलता तो सरकारी या प्रशासन द्वारा चिन्हित आश्रमों में उनका ठहराव सुनिश्चित करते हैं. इतना ही नहीं, आश्रम में भेजने के बाद भी वे लगातार संपर्क में रहते हैं और समय-समय पर उनकी स्थिति की जानकारी लेते हैं. आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक मदद भी करते हैं.

परिवार और पुलिस विभाग से मिला सहयोग : सच्चिदानंद राय बताते हैं कि शुरुआत में उनके माता-पिता इस कार्य को लेकर चिंतित थे, लेकिन बाद में उनकी लगन देखकर उन्होंने हमेशा हौसला बढ़ाया. पुलिस सेवा में आने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके मानवीय प्रयासों की सराहना की.

एसआई सच्चिदानंद राय
एसआई सच्चिदानंद राय 200 विक्षिप्तों की कर चुके हैं सेवा (ETV Bharat)

''पुलिसिंग केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है. गया पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मुझे ऐसे कार्यों के लिए प्रोत्साहित करते हैं.''- सच्चिदानंद राय, सब इंस्पेक्टर

सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रहेगी सेवा : सच्चिदानंद राय का कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद वे अपना पूरा समय इसी सेवा कार्य को समर्पित करना चाहते हैं. उनकी योजना अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा मानसिक रूप से विक्षिप्त और बेसहारा लोगों की मदद पर खर्च करने की है.

इंसानियत की मिसाल : स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि सच्चिदानंद राय के कार्यों की खुलकर सराहना करते हैं. उनका मानना है कि ऐसे समय में जब लोग अपने बुजुर्गों और जरूरतमंदों से दूरी बना लेते हैं, एक पुलिस अधिकारी का इस तरह मानवता के लिए समर्पित होना समाज के लिए प्रेरणा है.

इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं : सच्चिदानंद राय की कहानी यह बताती है कि वर्दी केवल कानून लागू करने की पहचान नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता, करुणा और मानवता की भी मिसाल बन सकती है. उनकी सेवा ने न केवल सैकड़ों बेसहारा लोगों को सहारा दिया है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता.

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