2.75 करोड़ मधुमक्खियों के मालिक हैं चितरंजन, क्या आपको पता है मधुमक्खियां भी तीन प्रकार की होती हैं?
गयाजी के चितरंजन शंभू के पास है 2.75 करोड़ से अधिक मधु मक्खियां, जिनकी मदद से करते है लाखों की कमाई


Published : February 20, 2026 at 5:27 PM IST
गया : यूं तो मधुमक्खी पालना बेहद मुश्किल है. थोड़े से शहद के लिए उनके डंक मारने का डर हमेशा बना रहता है, पर बिहार के गयाजी के चितरंजन शंभू ने जैसे इस डर पर काबू पा लिया है. इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि वह 2.75 करोड़ से अधिक मधुमक्खियों के मालिक हैं.
शहद के साथ-साथ मधुमक्खियों को बेचने का काम : चितरंजन शंभू गया जी के परैया के रहने वाले हैं, उनके पास इटालियन और देसी प्रजाति की मधुमक्खियां हैं, हालांकि कुछ महीनों पहले तक उनके पास लगभग 3.40 करोड़ मधु मक्खियां थी, अब उन्होंने इनमें ज्यादातर मधुमक्खियों को बेच दिया है, वो शहद के साथ मधुमक्खियों का भी व्यापार करते हैं.
4 लाख मधुमक्खी से हुई थी शुरुआत : चितरंजन औसतन साल में 25 से 30 टन मधु का उत्पादन कर लेते हैं, बक्से में मधुमक्खियों को रख कर मधु उत्पादन करने वाले वह बड़े उत्पादकों में से एक हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे उनके 25 सालों का संघर्ष है.
"मैंने लगभग चार लाख मक्खियों से मधु उत्पादन की शुरुआत की थी, मगर आज मेरे पास मधुमक्खियों की एक बड़ी संख्या है. इतनी संख्या राज्य में शायद ही किसी उत्पादक के पास है."- चितरंजन शंभू, मधु उत्पादक
कैसे रखी जाती हैं 2 करोड़ मधुमक्खियां : 2 करोड़ मधुमक्खियों को एक साथ रखना किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं है, चितरंजन की मानें तो इतनी मक्खियों को उन स्थानों पर रखा जाता है , जहां आसानी से उनका भोजन उपलब्ध हो सके. वहीं चितरंजन कैसे इनकी गिनती करते हैं इसे आप इस रूप में समझ सकते हैं.
एक बक्से में 10 छत्ते होते हैं. हर छत्ते में 4 हजार से 6 हजार मधुमक्खियां होती हैं. एक छत्ते में 4 हजार से जोड़ें तो एक बॉक्स में 40000 मधुमक्खियां होंगी. चितरंजन के पास अभी एक्टिव लगभग 700 बक्से हैं. 700 बक्से में 40 हजार के हिसाब से 2.80 करोड़ मधुमक्खियां होंगी.

दिन-रात की जाती है निगरानी : इन मधुमक्खियों की देखभाल के लिए चितरंजन ने 10 लोगों को तनख्वाह पर रखा है, जो विभिन्न जगहों पर रखे हुए बक्से की रखवाली के साथ-साथ मक्खियों के भोजन का प्रबंध , अगर मक्खियां निकल कर पेड़, भवन या चट्टानों पर बसेरा डालें तो उन्हें वहां से अपने बक्से के छत्ते में लाने का काम करते हैं.
मधुमक्खियों में भी बंटा है काम : चितरंजन शंभू बताते हैं कि तीन प्रकार की मधुमक्खियां है. इनमें रानी मक्खी, नर मधुमक्खी और श्रमिक मधुमक्खी होती हैं. श्रमिक मधुमक्खियों का काम होता है अच्छी गुणवत्ता वाले फूलों का रस इकट्ठा करना और छत्ता तैयार करना. जबकि रानी मक्खी का काम सिर्फ अंडे देने का होता है. वहीं नर मधुमक्खी का काम सिर्फ रानी के साथ संबंध बनाना है.

40 लाख से चार करोड़ तक का सफर: चितरंजन ने चार लाख मधुमक्खियां यानी कि 10 बक्सों से अपने बिजनेस की शुरुआत की थी. जिन्हें वह पंजाब से लेकर आए थे. वहीं उन्होंने मधु उत्पादन के तौर तरीके और बारीकियों को साल 2000 में सीखा था. वर्तमान में उनके पास 700 से अधिक मधुमक्खियों के बक्से हैं. आज इनके प्लांट की उत्पादन क्षमता 25 से 30 टन तक पहुंच चुकी है.
यह फर्क होता है शहद में : शहद का दो तरह से उत्पादन होता है, पहला जिसमें भौंरा मक्खी खुद ही पेड़ या अन्य जगहों पर छत्ता लगाकर शहद का उत्पादन कर देती हैं, जबकि दूसरी तरीके में बक्से का इस्तेमाल किया जाता है. चितरंजन बताते हैं कि इटालियन मधुमक्खी जो बक्से में रखी जाती हैं उसका उत्पादन ज्यादा होता है. यह एक बक्से में 70 से 80 किलों सालाना शहद का उत्पादन कर देती है. हालांकि इसके लिए समय-समय पर उनका स्थान बदला जाता है.

मक्खियों को करते हैं स्थांतरित : चितरंजन बताते हैं कि वह सरसों और सहजन के सीजन में गयाजी में ही रहते है, जबकि मार्च में लीची के फूलों के लिए मुजफ्फरपुर चले जाते हैं, अप्रैल में झारखंड तो जामुन के फूलों के लिए नेपाल भी जाते है. शंभू की मानें तो सहजन के फूलों से बने शहद को औषधि रूप से सबसे अच्छा माना जाता है. वहीं बरसात के मौसम में मधुमक्खियों को चीनी देकर जीवीत रखा जाता है.
एक सीजन के फूलों से 4 बार निकाली जाती है शहद : किसी भी फूल से शहद तीन से चार राउंड निकाली जाती है. चितरंजन बताते हैं कि अगर बक्से एक जगह पर रखे जाएं तो एक सप्ताह में एक राउंड शहद निकल जाती है. सभी फसल के सीजन में चार राउंड शहद निकाला जाता है. अगर फूल अच्छे रहें तो पांचवीं राउंड भी हो जाता है.

'पॉलिसी बनाने की है जरूरत' : चितरंजन बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन तो करते हैं लेकिन वह बाजार उपलब्ध नहीं होने से मायूस भी हैं. चितरंजन शंभू की मानें तो जब तक सरकार बाजार उपलब्ध नहीं कराएगी तब तक उत्पादन की क्षमता और नहीं बढ़ेगी, सरकार को इसके लिए पॉलिसी बनानी चाहिए.
"सरकार को शहद की खरीद का न्यूनतम रेट तय करना चाहिए. साथ ही मिड डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों में शहद को शामिल किया जाना चाहिए ताकि उत्पादन बढ़े और उत्पादकों को उचित लाभ मिल सके."- चितरंजन शंभू, मधु उत्पादक
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