मोक्ष की नगरी में डेंगू से मुक्ति: दिल्ली, कोलकाता और गुजरात से आए प्रवासी एकदम फिट
बिहार के कई जिलों में डेंगू पांव पसार रहा है. हालांकि गया जिले में हालात सामान्य हैं. रिपोर्ट-रत्नेश कुमार

Published : August 22, 2026 at 6:47 PM IST
गया: बिहार के गया जिले से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली, कोलकाता और गुजरात जैसे राज्यों से डेंगू से संक्रमित होकर लौटे तीन प्रवासी मजदूर अब पूरी तरह स्वस्थ होकर फिट हो चुके हैं. अच्छी बात यह है कि मोक्ष की इस पावन नगरी में स्थानीय स्तर पर डेंगू का एक भी मामला नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.
गुजरात से लौटा था पहला मरीज: विकास कुमार गुजरात में छोटी-मोटी नौकरी करते थे. अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और स्थिति गंभीर होने लगी. इसके बाद वह गुजरात से गया जिला अंतर्गत वजीरगंज थाना के कुर्किहार स्थित अपने घर लौट आए. उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया. जांच के बाद वह डेंगू पाया गया. बेहतर इलाज मिलने के बाद ठीक हुए.

सभी पूरी तरह स्वस्थ: इसी प्रकार दो और युवक जो बाहर काम करते थे, अपने गांव लौटे थे. वे दोनों युवक भी डेंगू से ग्रसित पाए गए. इनमें से एक कोलकाता और दूसरा दिल्ली में काम करते थे. ये सभी संबंधित राज्यों में काम के दौरान ही डेंगू से ग्रसित हुए थे. स्थिति बिगड़ने पर जब वे अपने गांव लौटे, तब बीमारी की बात सामने आई. ये दोनों भी पूरी तरह से फिट हैं.
आधिकारिक रिपोर्ट: इस संबंध में जिला वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी डा. एमई हक ने बताया कि फिलहाल डेंगू का कोई भी मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं है. वैसे, सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक सिर्फ दो डेंगू के मरीज की पहचान हुई है. जानकारी के अनुसार एक डेंगू का मरीज निजी अस्पताल में भर्ती हुआ था. तीनों को डिस्चार्ज कर दिया गया है.

"डेंगू को लेकर इस वर्ष अभी स्थिति नियंत्रण में है. स्थानीय तौर पर एक भी मरीज डेंगू का नहीं मिला है. जो भी मरीज आए हैं, वे दूसरे राज्य में ही डेंगू से संक्रमित हुए थे. गया जिले में स्थानीय स्तर पर कोई नया संक्रमित नहीं है. डेंगू से बचाव के लिए प्रशासन हर कदम उठा रही है." -डॉ. एमई हक, वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी
2022 से में कमी: आंकड़ा पर गौर करें तो पिछले 4 वर्षों में डेंगू से मौत की संख्या कम रही है. 2022 से टेस्टिंग बढ़ाने के कारण डेंगू से मौतों में कमी आई. पिछले 5 सालों के आंकड़ों को देखें तो गया में डेंगू का डंक बेअसर रहा है. संदिग्ध मरीजों की टेस्टिंग बढ़ा दी गई है.
2023 में में दो मरीज की मौत: 2022 में टोटल 792 टेस्ट हुए, जिसमें 180 केस मिले और मौत शून्य रही. 2023 में कुल 2361 जांच में 591 मरीज मिले और दो मौतें दर्ज हुईं. 2024 में 2263 टेस्टिंग में 429 मरीज मिले और एक की मौत दर्ज की गई.

हाल के वर्षों का डेटा: 2025 में कुल 167 टेस्टिंग हुई, जिसमें 34 केस मिले और मौतों की संख्या शून्य रही. पिछले 5 सालों के आंकड़ों के अनुसार तीन लोगों की मौतें डेंगू के कारण हुई है. 2026 में अब तक तीन मरीज चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है.
बचाव के लिए लगातार फॉगिंग: डेंगू से बचाव के लिए फॉगिंग लगातार की जा रही है. 2026 में अब तक 395 टेस्ट हुए हैं, जिसमें एक भी मरीज नहीं मिले हैं. करीब 15 जगह फॉगिंग हुई और आगे भी जारी है. 2022 में 75 स्थान पर फॉगिंग हुई थी. 2023 में 159 स्थान पर, 2024 में 146 स्थान पर और 2025 में 23 स्थान पर हुई थी.
डेंगू से बचाव: डॉ. एमई हक ने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई तरह के दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं, ताकि डेंगू का विस्तार न हो सके. इसमें दिन में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करने, मच्छरदानी में मच्छर भगाने वाली दवा या क्रीम का प्रयोग दिन में भी करने की सलाह दी जाती है.
जलजमाव रोकने की सलाह: टूटे-फूटे बर्तन, कूलर, एसी, फ्रिज से पानी निकासी रखने, घर के अंदर अगल-बगल में पानी नहीं जमने देने और आसपास साफ-सफाई रखने को कहा गया है. गमला का पानी बदलने, जमे पानी पर मिट्टी डालने और बुखार होने पर जांच कराने की सलाह दी जाती है.
डेंगू के मुख्य लक्षण: डॉ. एमई हक ने बताया कि डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार आना, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पीछे दर्द और त्वचा पर लाल धब्बे का निशान होना अन्य है. वही नाक, मसूड़े से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना आदि शामिल है. लक्षण दिखने पर चिकित्सक से संपर्क करें.
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