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GPM जिले में धान खरीदी के पहले दिन व्यवस्था बेपटरी नजर आई, नए नियुक्त लोगों को जानकारी भी कम

सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते व्यवस्था में कमी दिखी. हालांकि कुछ जिलों में हड़ताल खत्म हो गई है.

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सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते व्यवस्था में कमी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : November 15, 2025 at 1:32 PM IST

3 Min Read
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गौरेला पेंड्रा मरवाही: जिले में भी 15 नवंबर से धान खरीदी शुरुआत हो गई है. लेकिन, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पहले दिन व्यवस्था बेपटरी नजर आई. प्रशासन ने सेवा सहकारी कर्मचारियों की जगह धान खरीदी के लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग और उद्यान विभाग के कर्मचारियों को नियुक्त किया है. हालांकि, विपणन संघ अधिकारी का कहना है कि पुरानी कर्मचारी भी वापस आ सकते हैं.

जिले में करीब 24 हजार किसान रजिस्टर: गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में इस वर्ष शासन ने लगभग एक लाख 51 हजार मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. इसके लिए 35 हजार 259 हेक्टेयर भूमि से धान खरीदी की जाएगी. वहीं 24 हजार 493 किसानों ने अब तक धान खरीदी के लिए अपना पंजीयन कर लिया है. धान खरीदी के लिए मार्केटिंग फेडरेशन को लगभग 7 हजार 581 गठान जुट बारदानों की जरूरत होगी.

GPM जिले में धान खरीदी के पहले दिन व्यवस्था बेपटरी नजर आई (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

जिले में 20 धान खरीदी केंद्र: फिलहाल नए पुराने बारदाने मिलकर 5059 गठान की व्यवस्था का दावा मार्केटिंग फेडरेशन कर रहा है. दावों के बावजूद पहले दिन खरीदी केंद्रों में कई चीजें नदारद रहीं. न तो शासन के द्वारा धान खरीदी उत्सव का कहीं फ्लेक्स लगाया गया न तो तराजू, कुर्सी टेबल, रजिस्टर लाइट नजर आई. और तो और जिन कंप्यूटर से खरीदे गए धान को अपलोड जाएगा वह कंप्यूटर भी खरीदी केंद्र में नजर नहीं आए. हालांकि ये पहला ही दिन है. गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में 20 धान खरीदी केंद्रों में धान की खरीदी होती है.

नए नियुक्त कर्मचारियों में अनुभव की कमी: जिला प्रशासन ने 17 कर्मचारियों को धान खरीदी केंद्र प्रभारी बनाया है. साथ ही सभी 20 खरीदी केंद्रों के लिए नए कंप्यूटर ऑपरेटर को भी ट्रेनिंग दे दी गई है. जिन कर्मचारियों को धान खरीदी के लिए नियुक्त किया गया है वे सुबह 10 बजे खरीदी केंद्र पहुंच गए लेकिन, उन्हें धान खरीदी और उसके दौरान होने वाले काम की जानकारी नहीं है. ना तो उन्हें धान की परख है, न ही उन्हें यह पता है कि धान खरीदी के लिए लेबर कहां से आएंगे.

ऐसे में सेवा सहकारी समितियां के कर्मचारियों की हड़ताल लंबी चली तो धान खरीदी करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि कुछ जिलों में ये हड़ताल खत्म हो चुकी है. इधर, मार्केटिंग फेडरेशन के कर्मचारियों का दावा है कि जिन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है वे धान खरीदेंगे और शासन की व्यवस्था रुकेगी नहीं.

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