लगातार गैस, एसिडिटी और पेट दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने चेताया
लगातार गैस, एसिडिटी और पेट दर्द को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. डॉक्टर ने इसे लेकर चेतावनी दी है. चंदन भट्टाचार्य की रिपोर्ट.

Published : August 25, 2026 at 5:04 PM IST
|Updated : August 25, 2026 at 6:37 PM IST
रांची: पेट में गैस बनी, थोड़ी एसिडिटी हुई और दर्द भी हुआ, तो अक्सर हम इसे मामूली परेशानी मानकर दवा लेकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन यही लक्षण अगर बार-बार दिखाई दें तो सावधान होने की जरूरत है. हैदराबाद के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश पोलावरापु ने चेताया है कि लगातार गैस, एसिडिटी और पेट दर्द को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. इसके पीछे पेट के अलावा लिवर, आंत, अग्न्याशय और पित्ताशय से जुड़ी बीमारी भी हो सकती है.
रांची प्रेस क्लब में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. जगदीश ने कहा कि कभी-कभार गैस या पेट दर्द होना सामान्य हो सकता है, लेकिन समस्या बार-बार हो रही है तो उसके कारण की जांच जरूरी है. खासकर भूख कम लगना, लंबे समय तक कब्ज रहना, लगातार पेट दर्द, मल या उल्टी में खून आना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
मल में खून दिखे तो सिर्फ बवासीर न समझें
डॉ. जगदीश ने कहा कि मल में खून आने पर कई लोग इसे बवासीर मानकर छोड़ देते हैं, हालांकि हर मामले में कारण बवासीर ही हो, यह जरूरी नहीं. कुछ स्थितियों में यह आंत से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है.
अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर? इसे भी न करें नजरअंदाज
फैटी लिवर आजकल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में आमतौर पर सामने आने वाली समस्या बन गई है, लेकिन डॉक्टर के मुताबिक, इसे केवल रिपोर्ट की एक सामान्य टिप्पणी मानकर छोड़ना सही नहीं है. फैटी लिवर मिलने पर जरूरत के अनुसार, लिवर फंक्शन टेस्ट और अन्य जांच करानी चाहिए. स्थिति के मुताबिक, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना भी जरूरी हो सकता है.
मोटापा सिर्फ वजन का मामला नहीं
डॉ. जगदीश ने बढ़ते मोटापे को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि मोटापा केवल शरीर के वजन या दिखने से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इससे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और लिवर संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को स्वस्थ सीमा में रखना जरूरी है. धूम्रपान से पूरी तरह बचने की भी सलाह दी गई.
हर मरीज को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं
डॉक्टर ने बताया कि गैस्ट्रो से जुड़ी कई सामान्य बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधाएं रांची में भी उपलब्ध हैं. हालांकि जटिल लिवर रोग, लिवर ट्रांसप्लांट, गंभीर अग्न्याशय संबंधी बीमारी और उन्नत मोटापा उपचार जैसे मामलों में विशेषज्ञ केंद्र की जरूरत पड़ सकती है. रांची में हर महीने के चौथे बुधवार को विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई.
मोटापा घटाने में पहला कदम दवा नहीं, जीवनशैली
डॉ. जगदीश के अनुसार, मोटापे के उपचार में सबसे पहले खान-पान और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से दवाओं या इंजेक्शन आधारित उपचार का सहारा लिया जा सकता है. गंभीर मामलों में एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोप्लास्टी जैसी तकनीक भी विकल्प हो सकती है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उपचार के बाद भी स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना जरूरी है, यानी पेट बार-बार संकेत दे रहा है तो उसे सिर्फ ‘गैस’ कहकर टालने के बजाय समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना ही समझदारी है.
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