बक्सर में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा, नावों के परिचालन पर रोक, दहशत में निचले इलाकों के लोग
बक्सर में गंगा का रौद्र रूप देखकर हर बार डूबने वाले पांच प्रखंड के लोगों में दहशत फैल गई है. पढ़ें रिपोर्ट- उमेश पांडेय


Published : August 21, 2026 at 6:12 PM IST
|Updated : August 21, 2026 at 6:23 PM IST
बक्सर : बिहार के बक्सर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. जीवनदायिनी मां गंगा अब बक्सर के लोगों को डराने लगी हैं. लगातार बढ़ता जलस्तर, उफनती लहरें और किनारों की ओर बढ़ता पानी पांच प्रखंडों के दर्जनों गांवों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए एक बार फिर बाढ़ की पुरानी दहशत लेकर आया है.
ग्रामीणों ने कहा हर साल का है यही हाल : गंगा का रौद्र रूप देखकर दियारा इलाके के लोगों की चिंता बढ़ गई है. लोगों को डर है कि अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो कब नदी अपने किनारे लांघकर रिहायशी इलाकों में तबाही मचा दे, कहना मुश्किल है. हर साल बाढ़ का दंश झेलने वाले चौसा, बक्सर, सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर प्रखंड के ग्रामीणों के लिए गंगा दहशत लेकर आईं हैं.
चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंची गंगा : गुरुवार देर शाम तक गंगा का जलस्तर 58.59 मीटर दर्ज किया गया. चेतावनी स्तर 59.32 मीटर है. यानी नदी का पानी चेतावनी स्तर से महज 0.73 मीटर नीचे पहुंच चुका है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.
गंगा किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट : हालात को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है. बक्सर जिलाधिकारी साहिला ने रामरेखा घाट पहुंचकर गंगा के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया और अधिकारियों को संभावित बाढ़ एवं कटाव की स्थिति से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया.
"अभी गंगा का पानी हमारे यहां डेंजर लेवल को क्रॉस नहीं किया है. प्रतिदिन दो सेंटीमीटर की स्पीड से जलस्तर बढ़ रहा है. अच्छी खबर ये है कि प्रयागराज में गंगा के पानी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ है. इसलिए यहां भी उम्मीद है कि जलस्तर में कमी आएगी. लेकिन अभी वार्निंग लेबल 59.32 से 0.73 मीटर कम रह गया है. कोई हादसा न हो इसलिए लोगों को गंगा नदी से दूर रहने की चेतावनी दी गई है."- साहिला, जिलाधिकारी, बक्सर

नाव परिचालन पर रोक : बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे को देखते हुए नदी में नाव परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन की नजर खासकर दियारा और उन इलाकों पर है, जहां बाढ़ का पानी सबसे पहले दस्तक देता है. जिलाधिकारी ने अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर सांकेतिक चिह्न लगाने के साथ ही निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है. रामरेखा घाट स्थित कंट्रोल रूम को लाइट एंड साउंड के समीप स्थापित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सूचना और कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
याद आया 2025 का वो मंजर : लोगों की आंखों के सामने पिछले वर्षों की तबाही के दृश्य घूमने लगे हैं. जंहा एक महीने के अंदर बाढ़ ने दो बार दस्तक दी. उन्हें डर है कि इस बार भी अगर गंगा ने रौद्र रूप धारण किया तो फिर वही नाव सहारा बनेगी, फिर वही ऊंचे स्थान तलाशने की मजबूरी होगी और फिर वही घर-गृहस्थी को बचाने की जद्दोजहद शुरू होगी.

तैयार प्रशासन का दियारा पर विशेष नजर : जिलाधिकारी साहिला ने अधिकारियों को पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है. प्रशासन के अनुसार एसडीआरएफ की टीम पहले से मौजूद है और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है. खासकर दियारा इलाके में निगरानी बढ़ाई गई है.
प्रशासन ने जारी की चेतावनी : प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने, स्नान करने, तैरने, नौका विहार करने और रील या वीडियो बनाने के लिए जान जोखिम में डालने से बचने की अपील की है. बच्चों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने तथा मवेशियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर रखने को कहा गया है.

आपातकालीन नम्बर जारी : आपात स्थिति, जलभराव या बाढ़ से संबंधित सूचना के लिए जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के 0618-3223333 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है. साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और केवल प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है.
हर साल आती है बाढ़ लेकिन दर्द वही : बक्सर के इन पांच प्रखंडों के ग्रामीणों की कहानी हर मानसून में बदलते पानी के साथ फिर सामने आती है. बाढ़ जाती है तो अपने पीछे कीचड़, बीमारी, बर्बादी और टूटी हुई जिंदगी छोड़ जाती है. लोग किसी तरह अपनी दुनिया फिर बसाते हैं और अगले साल गंगा फिर परीक्षा लेने पहुंच जाती हैं.
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