निराकार शक्ति का धाम : गढ़ादेवी माता अनहोनी से पहले ही देती हैं संकेत, ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा
एमसीबी जिले के भरतपुर में गढ़ादेवी का धाम है.इस धाम में भक्तों की अटूट आस्था है.नए साल के दिन यहां लाखों भक्तों ने दर्शन किए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 2, 2026 at 3:02 PM IST
मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर- नववर्ष के आगमन पर भरतपुर ब्लॉक के तिलौली गांव के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गढ़ादेवी में भक्तों की भीड़ जुटी. तिलौली गांव में गढ़ादेवी का मंदिर काफी पुराना है. हर साल नए साल के पहले हफ्ते में इस मंदिर में लाखों श्रद्धालु एकजुट होते हैं.सिर्फ छत्तीसगढ़ से ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के भी भक्त माता के दर्शन करने के लिए आते हैं.
प्राकृतिक सौंदर्य के बीच गढ़ादेवी का धाम
आपको बता दें कि मां गढ़ादेवी मंदिर लगभग 1000 मीटर ऊंचे पहाड़ पर स्थित है. चारों ओर फैली पर्वत श्रृंखलाएं, घने जंगल और पहाड़ी रास्ते इस स्थान को अत्यंत रमणीय बनाते हैं. पहाड़ की चोटी से देखने पर दूर-दूर तक फैला प्राकृतिक सौंदर्य मन को मोह लेता है.मंदिर परिसर की विशेषता ये है कि पहाड़ में हनुमान जी का मंदिर स्थित है,जबकि मुख्य पहाड़ी पर मां गढ़ादेवी का धाम है.वहीं ऊंचाई पर शिव मंदिर भी है.जहां के शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भक्त एकजुट होते हैं. यह धार्मिक संरचना मानो सनातन परंपरा के त्रिदेव और शक्ति उपासना का प्रतीक बन गई है.
निराकार रूप में विराजमान हैं माता
गढ़ादेवी के मंदिर में किसी भी तरह की प्रतिमा नहीं है.भक्तों का मानना है कि माता यहां पर निराकार रुप में विराजित हैं. यहां जो भी भक्त आते हैं वो किसी प्रतिमा या तस्वीर का दर्शन नहीं बल्कि आस्था,विश्वास और अनुभूति के साथ माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. कहा जाता है कि पत्थरों और गुफा के बीच एक ऐसी दिव्य शक्ति विराजमान है, जिसे आंखों से नहीं, बल्कि हृदय से महसूस किया जाता है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां गढ़ादेवी से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है.इसी विश्वास के कारण हर साल यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

गढ़ादेवी धाम में बहुत दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं. जो सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत जरुर पूरी होती है. यह जगह बेहद रमणीय है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता मन को आकर्षित करती है - महेश, श्रद्धालु
तिलौली ग्राम वासियों का गढ़ादेवी में अटूट आस्था इसलिए भी है क्योंकि लोगों का मानना है कि आसपास के क्षेत्र में अनहोनी से पहले ही गढ़ादेवी उन्हें संकेत दे देती है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार रहस्यमयी आवाजें, असामान्य घटनाएं और स्वप्न देकर भक्तों को सावधान किया गया है.

गढ़ा देवी से जुड़ी प्राचीन कथा
वर्षों पहले एक राजा और रानी अपनी बारात के साथ इस गांव से गुजर रहे थे. तभी उनकी नजर इस गुफा पर पड़ी और वे भीतर प्रवेश कर गए. लेकिन जैसे ही वे अंदर पहुंचे गुफा का द्वार पत्थरों से बंद हो गया. रानी की पालकी पत्थर की बन गई और वे सभी रहस्य में विलीन हो गए. आज भी यह कथा श्रद्धालुओं को आश्चर्य और श्रद्धा से भर देती है.

शहनाई, ढोल और नगाड़ों की रहस्यमयी आती हैं आवाजें
ग्रामीणों का दावा है कि इस प्राचीन गुफा से ढोल और नगाड़ों जैसी आवाजें सुनाई देती हैं. कई लोगों ने इन आवाजों को स्वयं सुनने की बात कही है, लेकिन आज तक यह रहस्य अनसुलझा है कि ये ध्वनियां कहां से आती हैं और क्यों आती हैं.

नववर्ष में होता है मेले का आयोजन
मां गढ़ादेवी धाम में हर वर्ष 31 दिसंबर और 1 जनवरी को भव्य मेले का आयोजन होता है. यह मेला 2 से 3 दिनों तक चलता है.मंदिर समिति सदस्य रमाकांत गुप्ता ने बताया हर साल यहां अन्य राज्यों से भी भक्त आते हैं.
हर साल जनवरी की शुरुआत में गढ़ादेवी धाम में दर्शन के लिए लाखों की भीड़ आती है. माता के दर्शन लाभ लेने और मन्नत मांगने वालों का तांता लगा रहता है.साल के पहले दिन काफी ज्यादा भीड़ होती है. यहां पर मेला भी लगाया जाता है.जिसमें साल के पहले हफ्ते में भारी भीड़ देखने को मिलती है- रमाकांत गुप्ता, सदस्य मंदिर समिति
वहीं श्रद्धालु राम रहीस गुप्ता ने बताया कि मां गढ़ादेवी पहाड़ी के ऊपर निराकार रूप में विराजमान हैं. हर साल यहां मेला लगता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. वहीं भक्त हीरा लाल यादव ने बताया यह मेला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन भी है.लोग अपनी परंपराओं को यहां जीते हैं.

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से लाखों लोग आए हैं। आज इतनी भीड़ है कि दर्शन करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन मां की कृपा सब पर है- रमाशंकर, श्रद्धालु
सीढ़ियां सकरी होने से श्रद्धालुओं को परेशानी
गढ़ादेवी धाम में साल के प्रमुख अवसरों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है. लेकिन मंदिर तक जाने के लिए जो सीढ़ियां हैं वो केवल कुछ ही लोगों के भार सहने लायक हैं.ऐसे में जब एकाएक भीड़ बढ़ती है तो लोग इकट्ठा सीढ़ियों के सहारे ऊपर चढ़ते हैं.जिससे कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है. माता की कृपा से आज तक तो ऐसी किसी भी तरह की स्थिति नहीं आई है,लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को मंदिर तक के पहुंच मार्ग को व्यवस्थित करना चाहिए.

भारी भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को सीढ़ियों पर चढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि सीढ़ियों के टूटने का डर रहता है. शासन को यहां दो अलग-अलग सीढ़ियां बनानी चाहिए एक चढ़ने के लिए और एक उतरने के लिए- भैया गुप्ता,उपसरपंच
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मां गढ़ादेवी धाम में दर्शन कर क्षेत्रवासियों को 2026 नववर्ष की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने गढ़ादेवी धाम में सुविधाएं बढ़ाने की मांग सरकार से की है.ताकि पर्यटन के केंद्र के रुप में इसे विकसित किया जा सके.
यह धाम पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां पानी, सीढ़ियां और मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकता है.मेरी सरकार से यही मांग है कि आने वाले समय में यहां पर सुविधाएं बढ़ाई जाए.जैसे अभी जो सीढ़ी है वो भारी भीड़ के कारण हिलने लगी है.यदि पहुंचमार्ग को व्यवस्थित किया जाए तो श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी- गुलाब कमरो,पूर्व विधायक

पर्यटन का केंद्र बन सकता है गढ़ा देवी धाम
इस वर्ष गढ़ादेवी धाम में सप्तदिवसीय रामकथा और सतचंडी यज्ञ का आयोजन भी किया गया. वृंदावन से आए पंडित संविधानंद चतुर्वेदी की वाणी में रामकथा का श्रवण श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा. सातवें दिन पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ आयोजन का समापन हुआ. आपको बता दें कि गढ़ादेवी धाम में पर्यटन अपार संभावनाएं हैं.लेकिन इसके लिए प्लान बनाकर मंदिर परिसर का विकास करना होगा.जिसमें पीने के पानी की व्यवस्था, आने जाने के लिए मजबूत सीढ़ियां, पार्किंग के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं होनी जरुरी है. यदि ऐसा हुआ तो गढ़ादेवी धाम न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान भी बना सकता है.
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