Bikaner Camel Festival- फैशन शो की तर्ज पर सज रहे ऊंट, स्पेशल डाइट व फर कटिंग भी अद्भुत
तीन दिन तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में काफी संख्या में देसी-विदेशी सैलानी बीकानेर आते हैं.

Published : January 5, 2026 at 4:01 PM IST
बीकानेर : राजस्थान के रेतीले धोरों में गुलाबी सर्दी के बीच देश और विदेश के सैलानियों के लिए बीकानेर का अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का बड़ा ट्रेंड है. यह उत्सव पर्यटन की दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है. ठेठ राजस्थानी रंग से रंगे इस अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव में राजस्थानी संस्कृति के वो सब रंग देखने को मिलते हैं, जिसके लिए ये धरती प्रसिद्ध है. इस बार ऊंट उत्सव 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होगा. तीन दिनों तक ऊंट नृत्य, ऊंट दौड़ और फर कटिंग और सैलानियों के बीच अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी.
तैयारियां जोरों पर : हर साल प्रशासन और पर्यटन विभाग इस आयोजन की तैयारी करता है. इस आयोजन को सफल बनाने के लिए ऊंट पालक पूरे साल मेहनत करते हैं और जैसे जैसे ऊंट उत्सव नजदीक आता है, तैयारियों का सिलसिला और तेज हो जाता है. ऊंट के शरीर पर फर कटिंग की जाती है. ये आकृति उकेरने की कला, जिसे स्थानीय भाषा में फर कटिंग कहा जाता है अपने आप में अद्भुत है.

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तोता, फ्लेमिंगो से लेकर सब कुछ : ऊंट पालक मोईन खान ने बताया कि हर बार फर कटिंग के जरिए कुछ नया करना पड़ता है ताकि पिछली बार से कुछ अलग नजर आए. ऊंट के पूरे शरीर पर राजस्थान की अलग-अलग खासियत और महत्वपूर्ण चीजों को उकेरने का प्रयास किया है. इनमें घोड़ा, तोता, राजस्थानी घूमर, बाज और बैलों का जोड़ा और राजस्थान की संस्कृति को दिखाने का प्रयास किया जाता है. ये सब कटिंग बहुत बारीकी से की जाती है और पिछले तीन पीढ़ियों से हमारा परिवार इसमें जुड़ा हुआ है. ऊंट उत्सव से पहले भाई, पिता सब मिलकर इसी में लगे रहते हैं.
घी-मेवों से लेकर दूध-अंडों तक खुराक : मोहम्मद कामिल ने बताया कि केवल फर कटिंग नहीं बल्कि ऊंट उत्सव के दौरान होने वाली दौड़ और ऊंट नृत्य के साथ ही दूसरी प्रतियोगिताओं के लिए ऊंट की खुराक पर भी फोकस करना पड़ता है. ऊंट को रोजाना तीन किलो दूध, 250 ग्राम घी मेवा, अंडा और दूसरी चीजें भी डाइट के रूप में खिलाते हैं ताकि प्रतियोगिता के दौरान वो शारीरिक रूप से कमजोर न पड़े और अपना बेहतर प्रदर्शन कर सके.

इस बार के आयोजन : ऊंट उत्सव की शुरुआत 9 जनवरी को होगी. सुबह 8 से 10 बजे तक 'हमारी विरासत' के तहत हेरिटेज वॉक का आयोजन लक्ष्मीनाथजी मंदिर से रामपुरिया हवेली तक होगा, जो बड़ा बाजार, मोहता चौक, हनुमान मंदिर, असानिया चौक होते हुए हवेली तक पहुंचेगी. सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक राजस्थान राज्य अभिलेखागार में 'राजस्थान के रंग-बीकाणा के संग' कार्यक्रम के तहत पिछवई, उस्ता, मथेरण जैसी लुप्तप्राय कलाओं की प्रदर्शनी लगेगी. शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक रवीन्द्र रंगमंच के ओपन थिएटर में 'बीकाणा की आवाज़ (वॉयस ऑफ बीकानेर)' कार्यक्रम होगा.

दूसरे दिन के आयोजन : 10 जनवरी को दूसरे दिन सुबह 9 बजे से दोपहर ढाई बजे तक राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) में 'ऊंटां रो मेलो' आयोजित होगा, जिसमें ऊंट नृत्य, फर कटिंग, साज-सज्जा, ऊंट दौड़ और घुड़दौड़ जैसे रोचक कार्यक्रम होंगे. पहली बार भीतरी शहर में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक धरणीधर स्टेडियम में 'बीकाणा की शान' कार्यक्रम होगा, जिसमें मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण शो, ढोला-मारू शो और राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता शामिल रहेगी. शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में 'स्वरम' सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी लोक नृत्य-गायन की प्रस्तुति होगी. राज्य अभिलेखागार की ओर से ऊंटों के इतिहास पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.


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धोरों पर होगा समापन : 11 जनवरी को रायसर के धोरों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक 'दम-खम' कार्यक्रम में रस्साकशी, कुश्ती, कबड्डी, पगड़ी बांधना, मटका दौड़ और देसी-विदेशी पर्यटकों की धोरों पर दौड़ होगी. दोपहर 1:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक 'उड़ान' में सैंड आर्ट, हैंडीक्राफ्ट-फूड बाजार, भारतीय रीति से विदेशी जोड़े की शादी, कैमल सफारी, ऊंट गाड़ी सफारी आदि आयोजित होंगे. शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक 'कला संगम' में सांस्कृतिक संध्या, अग्नि नृत्य और सेलिब्रिटी नाइट के साथ आतिशबाजी के बीच ऊंट उत्सव का भव्य समापन होगा.

