उत्तराखंड: पहाड़ से राजधानी तक वन्यजीवों का आतंक, हाथी, गुलदार और भालू का सबसे ज्यादा खौफ
उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक वन्यजीव आतंक मचा रहे हैं. भालू के खौफ से लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 27, 2025 at 3:40 PM IST
|Updated : December 27, 2025 at 4:51 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अभी तक ये आतंक पहाड़ी जिलों तक सिमित था, लेकिन अब जानवरों की आमद मैदानी जिला देहरादून में भी दिखाई देने लगी है. हाथी, गुलदार और भालू जैसे हमले देहरादून में होने से सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब विभाग वन्यजीवों को देहरादून आबादी के बीच आने से नहीं रोक पा रहा है तो सोचिए पहाड़ पर किस तरह का आतंक होगा?
शहर में हाथियों का उत्पात: देहरादून के नवादा क्षेत्र में 13 और 14 जुलाई की रात लगभग 2 बजे हाथियों ने जमकर दहशत बढ़ाई थी. खास बात है इससे पहले क्षेत्र में कभी भी हाथियों के कदम नहीं पड़े थे, लेकिन अचानक शहर के बीचों बीच रिहायशी इलाके में पहुंचकर हाथियों ने न केवल खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि घर में घुसने की कोशिश करते हुए दीवारों और दरवाजे भी तोड़ दिए. इसके अलावा गुलदार भी कई बार एफआरआई के कैंपस तक देखा गया है.

गुलदार दिख रहा है बार-बार: हाथियों के अलावा गुलदार भी देहरादून के आसपास के इलाकों में लोगों की दहशत का कारण बना हुआ है. इसी महीने 12 दिसंबर के दिन देहरादून के विकासनगर क्षेत्र के उपरौली गांव में गुलदार एक जानवर को उठा ले गया था. इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. हालांकि, यह गांव राजधानी देहरादून मुख्यालय से बेहद दूर है. लेकिन देहरादून के डोईवाला और छिद्दवाला के बीच टाइगर और गुलदार की मौजूदगी कई बार दर्ज की जा चुकी है. बीते दिनों कॉर्बेट से राजाजी नेशनल पार्क में शिफ्ट कए गए टाइगर को राजू नाम के व्यक्ति ने अपना शिकार बना लिया था. यह घटना तब हुई जब राजू चारा पत्ती लेने के लिए जंगल गया था. इसके अलावा भी गुलदार कई बार राजधानी देहरादून के आसपास के इलाकों में देखा जा चुका है. राजधानी में गुलदार रायपुर, विकास नगर, डोईवाला और अन्य कॉलोनियों में देखा गया है.

देहरादून पहुंचा भालू: हाल ही में 18 दिसंबर को देहरादून के डोईवाला में जंगल में घास लेने गई महिला पर एक नहीं बल्कि दो-दो भालुओं ने हमला कर दिया था. इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी. अभी भी महिला का इलाज चल रहा है. 45 साल की सुशीला जंगल में रोज की तरह घास लेने गई थी. तभी दो भालू सामने से आए. इस दौरान महिला को भागने तक का मौका नहीं मिला.

इस घटना के बाद वन विभाग से लेकर स्थानीय लोग बेहद चिंता में आ गए थे कि चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा के बाद देहरादून में भी भालू के हमले की घटना दर्ज की गई है. इस घटना ने लोगों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया था. स्थानीय निवासी सुधीर जोशी का कहना है कि घटना के बाद क्षेत्र में जागरूक अभियान लगातार चलाया जा रहा है. लेकिन फिर भी लोगों से जंगल न जाने की अपील की गई है. हालांकि, लोग भी अब इस बात को समझ रहे है. लेकिन, गांव में जानवर हैं, उनके चारे की व्यवस्था और ठंड में लकड़ी के लिए लोगों का जंगल में जाना मजबूरी है.

अधिकारी बोले निगरानी रख रहे हैं: डीएफओ अमित कंवर कहते हैं कि देहरादून के आसपास के इलाकों भी जंगल से घिरे हैं. डोईवाला मामले के बाद हमारी टीम मौके पर लगातार गश्त कर रही है. इसके साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि जंगल में अकेले ना जाएं. हमने अलग-अलग जगह पर पेट्रोलिंग के लिए लोग लगाए हैं जो पैदल और गाड़ी से निगरानी रख रहे है. हाथी और गुलदार के जो हाल फिलहाल में मामले आए हैं, वो पछवादून के वो इलाके हैं, जो जगलों से लगे हैं. हमारी टीम लगातार निगरानी रख रही है.
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