चार महीने बाद पर्यटकों के लिए खुला FRI, एंट्री फीस बढ़ी, वाहन शुल्क भी निर्धारित
देहरादून स्थित FRI घूमने वालों के लिए खुशखबरी है. संस्थान को फिर खोल दिया गया है. जनवरी में अस्थायी रूप से बंद किया गया था.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 26, 2026 at 3:27 PM IST
देहरादून: प्रसिद्ध वन अनुसंधान संस्थान (FRI) करीब चार महीने बाद सोमवार से फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है. जनवरी के अंत में मरम्मत कार्य और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने के लिए एफआरआई को अस्थायी रूप से बंद किया गया थाय अब नई सुरक्षा व्यवस्था और सख्त नियमों के साथ पर्यटकों को प्रवेश दिया जाएगा.
नई शुल्क दरों की घोषणा: एफआरआई प्रशासन ने 25 मई 2026 से लागू होने वाली नई शुल्क दरों की घोषणा कर दी है. नई व्यवस्था के तहत भारतीय पर्यटकों को संस्थान परिसर में प्रवेश के लिए 100 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क देना होगा. विदेशी नागरिकों के लिए यह शुल्क 1000 रुपये निर्धारित किया गया है. पहले भारतीयों के लिए प्रवेश शुल्क करीब 20 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए लगभग 150 रुपये था.

वाहन शुल्कों में भी वृद्धि: वाहनों के प्रवेश शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है. दोपहिया वाहन के लिए 50 रुपये निजी कार और टैक्सी के लिए 150 रुपये, ऑटो रिक्शा के लिए 100 रुपये तथा बस और ट्रक के लिए 300 रुपये शुल्क तय किया गया है. बिना अनुमति परिसर में प्रवेश करने वालों पर 1000 रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना लगाया जाएगा. एफआरआई के संग्रहालयों के भ्रमण शुल्क में भी बड़ा बदलाव किया गया है.

ताजमहल से महंगा हुआ FRI संग्रहालय: भारतीय वयस्क पर्यटकों को संग्रहालय देखने के लिए 150 रुपये और विदेशी नागरिकों को 1500 रुपये चुकाने होंगे. वहीं, स्कूल समूहों के बच्चों के लिए 30 रुपये प्रति बच्चा और कॉलेज छात्रों के लिए 50 रुपये प्रति छात्र शुल्क निर्धारित किया गया है.
देश के प्रमुख वानिकी अनुसंधान संस्थानों में शामिल एफआरआई की स्थापना वर्ष 1878 में फॉरेस्ट स्कूल ऑफ देहरादून के रूप में हुई थी. बाद में इसे इम्पीरियल फॉरेस्ट स्कूल और फिर इम्पीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित किया गया. स्वतंत्रता के बाद इसका नाम वन अनुसंधान संस्थान रखा गया. वर्ष 1991 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला.

करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एफआरआई परिसर अपनी हरियाली दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों संग्रहालयों और भव्य वास्तुकला के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. लाल ईंटों से बना इसका मुख्य भवन ब्रिटिशकालीन वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है. जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार सीजी. ब्लामफील्ड ने डिजाइन किया था.
पढे़ं-

