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अमौली में प्रधान और शिक्षकों की खास पहल, अवकाश में बच्चों की दी जा रही निशुल्क शिक्षा

उत्तराखंड में स्कूलों में शीतकालीन अवकाश चल रहा है. बच्चे पढ़ाई से दूर ना हो इसके लिए अमौली में खास पहल की गई है.

Champawat Amauli Village
अमौली में बच्चों की दी जा रही निशुल्क शिक्षा (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 4, 2026 at 11:04 AM IST

3 Min Read
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चंपावत: लोहाघाट विधानसभा के आदर्श पंचायत अमौली में ग्राम प्रधान और स्थानीय शिक्षकों ने सराहनीय निर्णय लिया है. कक्षा एक से 12 तक के छात्र छात्राओं को ग्राम पंचायत भवन में रोजाना लगभग चार घंटे की निशुल्क शिक्षा दी जा रही है. आदर्श पंचायत अमौली की इस अनूठी पहल की अब चारों तरफ प्रशंसा हो रही है. अक्सर देखा जाता की पहाड़ों में जनवरी माह में पड़ने वाले अवकाश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे शिक्षा से विरत हो जाते हैं. इसलिए ग्राम प्रधान निशा भट्ट व ग्राम पंचायत के शिक्षकों द्वारा ग्राम पंचायत एवं आसपास के बच्चों की शिक्षा को यथावत रखने का फैसला लिया है. ग्राम पंचायत भवन में रोजाना चल रहे निशुल्क क्लासेस ने बच्चे भी बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग कर रहे हैं.

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में 1 जनवरी से 31 जनवरी तक स्कूलों में शीतकालीन अवकाश रहता है. छुट्टियों के दौरान कक्षा एक से लेकर बाहर तक के बच्चों की शिक्षा प्रभावित ना हो, इसके लिए चंपावत जिले के लोहाघाट विधानसभा के आदर्श पंचायत अमौली में ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत के शिक्षकों ने अनूठी पहल की है. ग्राम पंचायत के चार शिक्षकों ने पंचायत घर में रोजाना चार घंटे बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का सराहनीय कार्य शुरू किया है. ताकि ग्राम पंचायत के छात्र छात्राओं की शिक्षा छुट्टी की वजह से प्रभावित ना हो पाए.

ग्राम प्रधान व स्थानीय शिक्षकों ने निशुल्क शिक्षा की पहल बच्चों को रास आ रही है. निशुल्क क्लासेस ने बच्चे भी बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग कर रहे हैं. इस शिक्षण अभियान में गांव के ही शिक्षक सुरेश चंद्र भट्ट, हिमांशु भट्ट, गिरीश चंद्र भट्ट एवं मोहन चंद्र भट्ट प्रतिदिन बच्चों को समय दे रहे हैं. ये शिक्षक बिना किसी मानदेय के समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाते हुए चार घंटे नियमित रूप से अध्ययन करवा रहे हैं. बच्चों को पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति के साथ-साथ विषयगत समझ, अनुशासन और अध्ययन की निरंतरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहल इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि छुट्टियों के दौरान बच्चों का पढ़ाई से दूरी बना लेना एक आम समस्या बन चुकी है. अमौली पंचायत के इस प्रयास से बच्चों की शैक्षणिक निरंतरता बनी हुई है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है और पढ़ाई के प्रति रुचि भी विकसित हो रही है. अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे बच्चों के भविष्य के लिए उपयोगी बताया है. कहा कि पंचायत, शिक्षक और अभिभावक एक साथ मिलकर बच्चों के हित में कार्य करते हैं, तब परिणाम भी सकारात्मक होते हैं.

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