यमुनानगर में ठगों ने डॉक्टर को बनाया 'डिजिटल कैदी', 1.42 करोड़ रुपये हड़पे
डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 18 दिन तक लगातार वीडियो कॉल कर डॉक्टर से करोड़ों की राशि ठग ली.

Published : June 20, 2026 at 8:19 PM IST
यमुनानगर: साइबर ठगों ने यमुनानगर में एक सेवानिवृत्त डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 18 दिनों तक अपने जाल में फंसाए रखा. ठगों ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर डॉक्टर से 1 करोड़ 42 लाख 9 हजार 22 रुपये ठग लिए. मामले की शिकायत साइबर थाना में दर्ज कराई गई है.
3 जून को कॉल कर डराया गयाः अंसल टाउन निवासी और सिविल अस्पताल से रिटायर्ड डॉ. नरेंद्र छाबड़ा को 3 जून को एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके दस्तावेज देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल हुए हैं. गिरफ्तारी और कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें कथित जांच के नाम पर अपने नियंत्रण में ले लिया गया.
3 से 18 जून तक राशि को कराया गया ट्रांसफरः ठगों ने डॉ. छाबड़ा और उनकी पत्नी को घर से बाहर न निकलने, किसी से बात न करने और मोबाइल कैमरा लगातार ऑन रखने के निर्देश दिए. दोनों करीब 18 दिन तक वीडियो कॉल पर रहे और खुद को सरकारी जांच के दायरे में समझते रहे. मानसिक दबाव और डर के माहौल में डॉ. छाबड़ा ने 3 से 18 जून के बीच कई किश्तों में अलग-अलग खातों में कुल 1 करोड़ 42 लाख 9 हजार 22 रुपये ट्रांसफर कर दिए. बाद में जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई.
कैसे खुला मामलाः डॉ. छाबड़ा जगाधरी सिविल अस्पताल में भी सेवाएं दे रहे थे. लगातार ड्यूटी पर न पहुंचने पर अस्पताल प्रशासन ने जानकारी जुटाई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ. अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से इस तरह के झांसे में न आने की अपील की है.
खातों को खंगाल रही है पुलिसः पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिन खातों में रकम भेजी गई है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है. साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती, इसलिए ऐसे किसी भी कॉल पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.

