दिल्ली पुलिस का डर दिखाकर रिटायर्ड बैंककर्मी से 55 लाख की ठगी, दो दिन तक व्हाट्सएप कॉल पर रखा बंधक
बेटे को पिता के व्यवहार पर शक हुआ तो पूरे मामले का खुलासा हुआ.

Published : July 6, 2026 at 9:45 AM IST
सीकर : जिले में साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं. सीकर में जनवरी से जून तक साइबर ठगी के 19 मामले दर्ज हुए हैं. हाल ही में ऐसा ही एक नया मामला रिटायर्ड बैंक कर्मचारी के साथ हुआ है. साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर 65 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी महावीर प्रसाद शर्मा से 55 लाख रुपए ठग लिए. आरोपियों ने उन्हें लगातार दो दिन तक व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर व्यस्त रखा और किसी से संपर्क नहीं करने की सख्त हिदायत दी. बेटे को पिता के व्यवहार पर शक हुआ तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाने में मामला दर्ज कराया.
साइबर थाना इंचार्ज मुकेश कुमार ने बताया कि दर्ज मामले के अनुसार, महावीर प्रसाद शर्मा के व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से इस्तेमाल हो रही एक सिम के जरिए आपत्तिजनक संदेश और विज्ञापन भेजे गए हैं. साथ ही उनके खिलाफ दिल्ली के दरियागंज थाने में 24 मुकदमे दर्ज हैं. जब पीड़ित ने इन आरोपों से इनकार किया तो ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के केस में फंसाने की धमकी दी.
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इसके बाद आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी, ईडी अधिकारी और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट की कार्रवाई दिखाई. उन्होंने संपत्ति जब्त करने, जमानत खारिज होने और जेल भेजने का भय पैदा किया. राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताकर महावीर प्रसाद को किसी परिजन या परिचित से बात करने से भी रोक दिया गया.
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55 लाख ठगों को डाले : डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने 2 और 3 जुलाई को दो किस्तों में कुल 55 लाख रुपए आरोपियों की ओर से बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए. बाद में बेटे से बातचीत होने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस को व्हाट्सएप कॉल के रिकॉर्ड और संबंधित मोबाइल नंबर भी सौंप दिए गए हैं. साइबर थाना इंचार्ज मुकेश कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठग केवल व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल करते थे और वारदात के बाद सभी मोबाइल नंबर बंद कर दिए, मामले की जांच जारी है.
6 महीने में डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की ठगी : साइबर थाना अधिकारियों के अनुसार, जिले में जनवरी से जून तक साइबर ठगी के 19 मामले दर्ज हो चुके हैं. इनमें कई मामलों में 10 लाख से 30 लाख रुपए तक की ठगी हुई है और कुल रकम डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर गिरोह कमीशन देकर लोगों के बैंक खाते हासिल करते हैं और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन करते हैं.
ऐसे रहें सुरक्षित: साइबर थाना इंचार्ज ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती. कोई भी पुलिस, ईडी, सीबीआई या अदालत वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती. यदि कोई अधिकारी बनकर रुपए ट्रांसफर करने का दबाव डाले तो तुरंत कॉल काट दें. ओटीपी, बैंक विवरण, पासवर्ड या स्क्रीन शेयर किसी से साझा न करें. किसी भी संदिग्ध कॉल या साइबर ठगी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें.

