आयकरदाता 'निर्धन' बन डकार गए 463 मेट्रिक टन गेहूं, 1104 परिवारों को नोटिस, रिकवरी की तैयारी
विभाग की ओर से अपात्र परिवारों से नियमों के तहत 27.50 रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं की वसूली की जाएगी.

Published : August 27, 2026 at 2:13 PM IST
झालावाड़ : जिले में खाद्य सुरक्षा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां मुफ्त के राशन के चक्कर में 1104 सक्षम परिवार 463 मेट्रिक टन गेहूं डकार गए. इनमें से कई परिवार आयकर दाता हैं. जांच में सामने आया कि ई-मित्र संचालकों ने इन परिवारों को एपीएल श्रेणी बदलकर अंत्योदय श्रेणी में जोड़ दिया. इसके बाद परिवार को मिलने वाले सरकारी गेहूं की मात्रा दोगुनी हो गई. ऐसे में इन परिवारों ने एक साल में करीब 463 मीट्रिक टन गेहूं उठा सरकारी योजना में सेंधमारी कर डाली. अब जिला रसद विभाग ऐसे परिवारों से 27.50 रुपए प्रति किलो गेंहू की दर से रिकवरी की तैयारी कर रहा है.
रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी गोविंद सिंह देथा ने बताया कि जिले भर में करीब 1104 परिवारों को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने अपने राशन कार्ड में एपीएल श्रेणी में बदलाव कर उन्हें अंतोदय श्रेणी में बदल दिया. पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कई ऐसे परिवार हैं, जिनके सदस्य आयकरदाता हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें गरीब और खाद्य सुरक्षा के पात्र के रूप में दर्ज किया गया. विभाग की ओर से अपात्र परिवारों से नियमों के तहत 27.50 रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं की वसूली की जाएगी.
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उन्होंने बताया कि ऐसे मामले खानपुर उपखंड में सर्वाधिक हुए जबकि मनोहर थाना, अकलेरा, डग, चौमहला से ऐसे मामलों की जानकारी मिली है. रसद विभाग की ओर से की गई जांच में खानपुर कस्बे के आठ ई-मित्र केंद्रों और संचालकों की भूमिका सामने आई है, जिन्होंने परिवारों की एपीएल श्रेणी को अंत्योदय श्रेणी में बदल दिया. प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि ऐसे ईमित्र संचालकों के खिलाफ विभाग की ओर से मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. वहीं, 1104 परिवारों को नोटिस दिए जा रहे हैं.
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पोर्टल पर बढ़ी अंत्योदय श्रेणी परिवारों की संख्या : देथा ने बताया कि राशन डीलरों की ओर से की गई शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा योजना के पोर्टल पर एक साल के डेटा की पड़ताल की गई. इसमें अनियमित संख्या में परिवारों के नाम अंत्योदय श्रेणी में जुड़ने पर संदेह गहराया. इस श्रेणी में 2015 के बाद नाम जोड़ने का काम बंद हो गया है. ऐसे में परिवारों की संख्या बढ़ने पर शक गहराया. बाद में कलेक्टर के निर्देश पर रसद विभाग ने जांच के लिए टीम गठित की. इसके बाद जांच में आठ ई-मित्र केंद्रों और खानपुर उपखंड में लगे पंचायत सहायक गौतम नागर की संदिग्ध भूमिका सामने आई है. विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि अपात्र लोगों के नाम किस स्तर पर बदले गए और इस पूरे खेल में कितने लोग शामिल हैं.
डेटा एडिट के नाम पर बदली गई श्रेणी : प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि ईमित्र संचालकों व पंचायत सहायक की भूमिका संदिग्ध आने के बाद मामले में जांच की गई. ज्यादातर मामलों में अपात्र परिवारों ने ई-मित्र संचालकों से राशन कार्ड में डेटा करेक्शन के नाम पर अप्लाई किया था. इसमें राशन कार्ड में नाम, जन्मतिथि और सरनेम बदलने के लिए अप्लाई किया जाता था, लेकिन इसी दौरान फर्जीवाड़ा कर परिवारों की श्रेणियां तक बदल दी गईं.

